बिना शौचालय की ट्रेन और यातना में बदला सफर

अक्षय कुमार और भूमि पेडणेकर की फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ इन दिनों चर्चा में है. यह मसाला फिल्म तो है, लेकिन आम मसाला फिल्म नहीं. आलोचकों की राय भले ही जुदा हो लेकिन दर्शकों को फिल्म पसंद आ रही है. तभी तो शुरुआती पांच दिनों में ही फिल्म 100 करोड़ क्लब के करीब पहुंच चुकी है. फिल्म में नायक के घर पर शौचालय नहीं है और मर्दवादी सोच के साथ पला बढ़ा हीरो कभी इस बारे में सोचता भी नहीं. उसकी आंखें तब खुलती हैं जब उसका ब्याह होता है और नवविवाहिता पत्नी कहती है कि वह खेतों में ‘लोटा पार्टी’ की मेंबर बनकर नहीं जाएगी, उसे शौचालय चाहिए. फिल्म कई रोचक उतारचढ़ाव के साथ सुखद अंजाम को पहुंचती है, लेकिन यहां मेरा मकसद इस फिल्म पर बात करना नहीं बल्कि इस फिल्म के बहाने स्मृति में कौंध गई एक भयावह याद से आपको रूबरू कराना है.

वाकया पिछले साल का है जब मैं एक ऐसी ट्रेन में फंस गई थी जिसमें शौचालय ही नहीं था. ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ का हीरो घर पर शौचालय न होने पर अपनी पत्नी को गांव के स्टेशन पर रुकने वाली उस गाड़ी में शौच करने के लिए ले जाता है जो वहां पूरे 7 मिनट रुकती है. लेकिन सोचिए क्या हो अगर आपको किसी ट्रेन में करीब 5-6 घंटे का सफर करना हो और उसमें शौचालय ही न हो? यह कल्पना भले ही बहुत अजीब न लग रही हो, मन में ख्याल आ रहा हो कि अरे 5-6 घंटे की तो बात है, शौचालय नहीं था तो भी क्या हुआ…अगर वाकई ऐसा है तो मेरी यही कामना है कि आप कभी उस स्थिति में न फंसें जिससे मुझे दो-चार होना पड़ा था.

बात पिछले साल की है. मुझे एक स्टोरी के सिलसिले में भोपाल से झाबुआ जाना था. झाबुआ मेरे लिए अनजाना इलाका था और इस प्यारे से आदिवासी बहुल जिले को लेकर लोगों ने मेरे मन में इतने भ्रम डाल दिए कि मैंने अपनी कार से जाने के बजाय ट्रेन जैसा सुरक्षित माध्यम चुनना बेहतर समझा. मैं एक शाम पहले भोपाल से उज्जैन पहुंची और एक मित्र के घर पर रात गुजारी. अलसुबह उन्होंने मुझे उज्जैन से वाया रतलाम, मेघनगर, दाहोद को जाने वाली यात्री गाड़ी में बिठा दिया. चूंकि मैं अपनी बॉडी क्लॉक के हिसाब से काफी जल्दी उठ गई थी इसलिए मैं ठीक से फ्रेश भी नहीं हो पाई और आकर उनींदी सी ट्रेन में बैठ गई. 

यह एक पैसेंजर ट्रेन थी, जिसकी अपनी अलग सवारियां और अपनी अलग गति होती है. ट्रेन में सवारियां तो थीं ही साथ ही, दूध के डोले, मुर्गियां,बकरियां सब सहयात्री होने का आनंद दे रहे थे. यह अपनी तरह का पहला अनुभव था जिसका मैं खूब लुत्फ ले रही थी. ट्रेन ने अभी कुछ एक स्टेशनों का ही सफर तय किया था कि मुझे शौचालय जाने की इच्छा महसूस हुई. मैं उठकर दो डिब्बों के जोड़ वाले स्थान पर पहुंची. मुझे यह देखकर झटका लगा कि ट्रेन में कोई शौचालय ही नहीं है. मुझे मेघनगर उतरकर वहां से झाबुआ की बस पकडऩी थी. मेरे लिए अभी दिल्ली दूर थी और टॉयलेट जाने का दबाव बढ़ता जा रहा था. बीच के स्टेशनों पर ट्रेन रुकती भी थी, लेकिन इतना अधिक समय नहीं था कि मैं भागकर जाऊं और निपटकर आ जाऊं. मेरी सहयात्री ग्रामीण महिलाओं को मेरी उलझन समझ में आ गई थी. उन्होंने सुझाव दिया कि वे ट्रेन के गेट पर मेरे इर्दगिर्द घेरा बना लेंगी और मैं चलती ट्रेन के दरवाजे पर निपट लूं. मैंने यह सुझाव सिरे से नकार दिया. इस बीच ट्रेन रतलाम स्टेशन पहुंच गई थी. 

अब तक मेरा टॉयलट न जा पाना ‘अखिल बोगी’ की समस्या बन चुका था. लोगों ने मुझे बताया कि ट्रेन यहां कुछ देर रुकेगी. मैं भागकर ट्रेन से उतरी और प्लेटफॉर्म पर बने शौचालय के दरवाजे तक पहुंची… लेकिन उसे दरवाजा कहा ही नहीं जा सकता था. भीतर इतनी गंदगी कि सांस लेना मुहाल. मैंने एक बार मुड़कर ट्रेन की ओर देखा और स्टेशन से बाहर की ओर भागी. रतलाम एक छोटा सा स्टेशन था. शायद नई जगह होने के चलते दूर-दूर तक कुछ नजर नहीं आ रहा था. पहले सोचा झाड़ियों में बैठ जाऊं, लेकिन उस समय तक सरकार का स्वच्छता अभियान चालू हो चुका था, डर लग रहा था कि कहीं कोई सरकारी कर्मचारी कैमरा लिए मुस्तैद न हो. खैर, स्टेशन से खासा दूर कई दरवाजे खटखटाने के बाद आखिकरकार एक परिवार का दिल पसीजा और उन्होंने मुझे अपने घर का शौचालय इस्तेमाल करने दिया.

इस मोर्चे से निपटने के बाद दूसरी समस्या याद आई. मेरी ट्रेन तो अब तक स्टेशन से जा चुकी होगी. मुझे अगले कुछ घंटों में हर हाल में झाबुआ पहुंचना था. जहां तक मुझे याद आ रहा है, शायद अगली ट्रेन के आने में बहुत ज्यादा वक्त था, या शायद उस दिन और कोई ट्रेन ही नहीं थी जो मेघनगर रुकती. टैक्सी वाले रतलाम से मेघनगर तक 90 किलोमीटर ले जाने के लिए 2000-2500 रुपये मांग रहे थे. मैंने 1000 रुपये तक देने की हिम्मत भी जुटाई लेकिन वे तैयार नहीं हुए. सर पर कड़ी धूप और एक अनजान शहर का वीरान सा रेलवे स्टेशन. मुझे कई फिल्मी दृश्य याद आ रहे थे जो जाहिर है सुखद नहीं थे. मैंने तुरंत फैसला लिया और बस स्टैंड पहुंची. वह एक लोकल बस थी जो मेघनगर तक जा रही थी. धूल-पसीने-बीड़ी और शराब की मिलीजुली उबकाई लाने वाली गंध के बीच मेघनगर तक का 90 किमी का सफर मैंने करीब चार घंटे में तय किया. यह पूरा सफर एक ऐसी यातना थी जिसे मैं चाहकर भी भूल नहीं सकती. 

मैं रेलवे पर बहुत गुस्सा थी. मुझे लगा इस कदर अमानवीयता कैसे बरती जा सकती है. इतनी लंबी सवारी गाड़ी बिना शौचालय के कैसे चलाई जा सकती है. मेरा सफर कुछ बुरी स्मृतियों का रहा लेकिन पता नहीं ऐसे हालात में किस-किस के साथ क्या, क्या हो सकता है? क्या होता अगर सफर दिन के बजाय रात का होता और मैं ऐसे ही किसी हालात में फंस गई होती! बहरहाल अपने काम से निपटने के बाद मैंने इस बारे में दरयाफ्त की. रेलवे से पता चला कि कोई भी ट्रेन अगर 160 किमी से अधिक दूरी तय करती है और उसकी यात्रा अवधि 4 घंटों से ज्यादा है तो उसमें शौचालय होना ही चाहिए. मेरी ट्रेन इन दोनों मानकों पर खरी नहीं थी. उज्जैन से दाहोद की दूरी 210 किमी है और ट्रेन इस सफर में करीब 6 घंटे लेती है. लेकिन उसमें शौचालय नहीं था. पता है क्यों? क्योंकि रेलवे उस ट्रेन को उज्जैन से दाहोद तक चलाता जरूर है, लेकिन सीधा नहीं. वह ट्रेन उज्जैन से रतलाम तक अलग नाम से जाती है और आधे घंटे बाद रतलाम से दाहोद नए नाम से रवाना हो जाती है. क्या रेलवे ने यह कवायद केवल शौचालयों का खर्च बचाने के लिए की होगी? लगता तो नहीं. यह भी शायद उन अनंत पहेलियों में से एक है जिनके बीच भारत सरकार के कई विभाग दशकों से काम करते आ रहे हैं. 

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नए 50 रुपए के नोट की तस्वीर हुई लीक, इंटरनेट पर वायरल हो रही है ये फोटो!

नई दिल्ली: पिछले साल रिजर्व बैंक ने 50 रुपये के नए नोट जल्द ही जारी करने का ऐलान किया था. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही महात्मा गांधी (नई) सीरीज के 50 रुपये के नोट फ्लूरोसेंट ब्लू रंग में जारी करेगा. केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा पहले जारी 50 रुपये के नोट भी प्रचलन में बने रहेंगे. बयान में कहा गया, “नए नोट में हम्पी की आकृति उकेरी गई है जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है.

नोट का आधार रंग फ्लूरोसेंट ब्लू होगा.”इस नोट का आकार 66 मिमी गुणा 135 मिमी होगा. इस 50 रुपये के नए नोट पर आरबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल के हस्क्षातर होंगे.

हालांकि अभी तक इसे जारी नहीं किया गया है लेकिन सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर हो रही है जिसमें 50 रुपये के नये नोट होने का दावा किया जा रहा है. वायरल हो रही इस तस्वीर में 50 रुपये लिखे हुए नोटों का रंग हरा है.

आरबीआई ने ये भी साफ कर दिया है कि देश में पहले से चल रहे 50 रुपये के नोट भी मान्य रहेंगे. हालांकि अभी तक भारतीय रिजर्व बैंक ने इन नोटों के बारे में किए जा रहे दावों को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है.

रिजर्व बैंक ने पिछले साल कहा था कि 50 रुपये के नए नोटों का सुरक्षा फीचर और आकार-प्रकार अभी प्रचलित नोटों जैसे ही होंगे. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.

खुद रिजर्व बैंक के गवर्नर ने ही पिछले साल घोषणा की थी कि आरबीआई जल्द नए आकार और रंगों में 50 का नोट जारी करेगी जिस पर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे.जो तस्वीर वायरल हो रही है उसकी सत्यता की भी पुष्टि नहीं हुई है.

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भारत ने लद्दाख सीमा पर भारतीय व चीनी जवानों में हुई झड़प की पुष्टि की

नई दिल्ली: भारत ने लद्दाख सीमा पर पैंगोंग झील के पास भारतीय व चीनी जवानों में हुई झड़प की शुक्रवार को पुष्टि की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “मैं 15 अगस्त को पैंगोंग त्सो में हुई घटना की पुष्टि कर सकता हूं. बाद में दोनों पक्षों के स्थानीय सेना कमांडरों ने इस पर चर्चा की.” उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं किसी भी पक्ष के हित में नहीं है. हमें (सीमा पर) शांति बनाए रखना चाहिए.”

बताया जा रहा है कि चीनी जवानों ने पैंगोंग झील के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा पार करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें भारतीय जवानों ने रोक दिया.इसे लेकर तेज झड़प हुई और सैनिकों में एक घंटे से ज्यादा समय तक गतिरोध चला जिस दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने पथराव किया.

और पढ़ें: डोकलाम विवाद: चीन ने कहा, क्या होगा यदि हम उत्तराखंड के कालापानी और कश्मीर में घुस जाएं?

यह पूछे जाने पर कि क्या मुद्दे को दोनों पक्षों की सीमा कार्मिक बैठक (बीपीएम) में उठाया गया, कुमार ने कहा कि इस तरह की बैठकों का विवरण साझा नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि हाल में दो बीपीएम हुई हैं. एक नाथू ला में व दूसरी चुसुल में.

उन्होंने कहा कि एक बीपीएम सिक्किम क्षेत्र के नाथू ला में एक सप्ताह पहले हुई थी जबकि एक लद्दाख के चुसुल में 16 अगस्त को हुई. उन्होंने कहा कि बीपीएम दो देशों के बीच में विश्वास निर्माण के उपायों का हिस्सा है.

सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्र में भारत व चीन के जवानों के बीच चल रहे गतिरोध पर कुमार ने कहा कि भारत, चीन के साथ परस्पर स्वीकार्य समाधान के लिए अपना प्रयास जारी रखेगा.उन्होंने कहा, “जैसा कि हमने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के सुचारु विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति महत्वपूर्ण शर्त है.”

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डोकलाम विवाद: चीन के खिलाफ भारत को मिला जापान का साथ, भड़का चीन फटकारा जापान को

बीजिंग: चीन ने शुक्रवार को जापान को फटकार लगाते हुए कहा कि वह चीन, भारत सीमा विवाद पर ‘बिना सोचे-समझे’ बयानबाजी करने से बाज आए. यदि वह इस मुद्दे पर भारत का समर्थन करना चाहता है, ऐसी स्थिति में भी वह इस तरह की अनर्गल बयानबाजी से बचे.गौरतलब है कि जापान ने डोकलाम विवाद पर भारत का समर्थन किया है. भारत में जापान के राजदूत केन्जी हिरामात्सू ने कहा कि यह क्षेत्र विवादित है और जापान समझता है कि भारत इस विवाद में क्यों उलझा है.

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, “हमें पता चला है कि भारत में जापान के राजदूत इस विवाद पर भारत का समर्थन करना चाहते हैं. मैं उन्हें याद दिलाना चाहती हूं कि वह संबद्ध तथ्यों को स्पष्टता से समझे बिना इस तरह की अनर्गल बयानबाजी नहीं करें.”

हुआ ने जापान के राजदूत हिरामात्सू की बातों को झुठलाया. हिरामात्सू ने कहा है कि डोकलाम विवादित क्षेत्र है और किसी भी देश को ताकत के बल पर इसकी यथास्थिति में बदलाव नहीं करना चाहिए.हुआ ने कहा, “डोकलाम के डोंगलांग क्षेत्र में कोई क्षेत्रीय विवाद नहीं है और सीमा निर्धारित की गई है और इसे दोनों पक्षों ने स्वीकार किया है. सेना द्वारा अतिक्रमण के जरिये इस यथास्थिति में बदलाव का प्रयास चीन द्वारा नहीं बल्कि भारत द्वारा किया जा रहा.”

गौरतलब है कि जापान पहला देश है, जिसने डोकलाम विवाद पर खुलकर भारत का समर्थन किया है.हुआ चुनयिंग ने भारत से तत्काल प्रभाव से अपनी सेनाएं डोकलाम से हटाने को कहा है. इस क्षेत्र में जून से ही भारत और चीन के बीच गतिरोध बना हुआ है.

हुआ ने कहा कि इस संकट के समाधान हेतु संवाद के लिए भारत को बिना शर्त अपनी सेनाएं हटानी होंगी.गौरतलब है कि डोकलाम भूटान और चीन के बीच विवादित क्षेत्र है. भारत का कहना है कि यह क्षेत्र भूटान का है और चीनी सैनिक इस क्षेत्र में घुस आए हैं, जिससे भारत के रणनीतिक हित प्रभावित होते हैं.

जापान मौजूदा विवाद पर “करीबी नजर” रखे हुए है. जापान का मानना है कि इस विवाद से पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर पड़ सकता है. जापान का भी चीन के संग सीमा विवाद है. जापान का मानना है कि “विवाद में शामिल किसी भी पक्ष को ताकत के बल पर यथास्थिति बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.” चीन द्वारा “यथास्थिति में बदलाव” की कोशिशों पर जापान का पहले भी यही रुख रहा है. 30 जून को भारत ने चीन पर डोकलाम इलाके में यथास्थिति बदलने का आरोप लगाया था.

जापान ने ये भी साफ किया है कि डोकलाम का विवाद मूलतः चीन और भूटान के बीच का विवाद है और दोनों देश इसे स्वीकार करते हैं. डोकलाम में भारत की “मौजदूगी” पर जापान का रुख साफ है कि ये चीन और भारत के बीच हुए समझौते के तहत ही है. पूरे विवाद में भारत के बातचीत से हल निकालने के भारत के रवैये को लेकर भी जापान सकारात्मक है.

सूत्रों के अनुसार चीन द्वारा बार-बार भड़काऊ बयान दिए और किसी भी बड़े देश के एशिया की दो महाशक्तियों के बीच सीधे तौर पर किसी एक का पक्ष न लेने के बाद जापान हिंदुस्तान के पक्ष में खड़ा हुआ है. अमेरिका और ब्रिटेन डोकलाम को दो देशों के बीच का मसला बता चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया ने भी तनाव न बढ़ाने और मसले को बातचीत से सुलझाने की सलाह दी है. यहां ये ध्यान रखना भी जरूरी है कि जापान और भूटान के बीच तीन दशकों से बहुत ही घनिष्ठ संबंध हैं.

 

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AIDMK के दोनों गुटों का पार्टी में होगा विलय, पन्नीरसेल्वम करेंगे घोषणा

चेन्नई: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने कहा कि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के दो मुख्य गुटों के विलय के फैसले की घोषणा देर शुक्रवार को की जाएगी. पन्नीरसेल्वम गुट मुख्यमंत्री के. पलनीस्वामी की ओर से गुरुवार को की गई घोषणाओं का आकलन करेगा. मुख्यमंत्री पलनीस्वामी ने गुरुवार को तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के मृत्यु की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन और उनके पोएस गार्डन आवास को एक स्मारक में बदलने का ऐलान किया था.

जयललिता के निधन के बाद तीन गुटों में बटीं पार्टी

बीते साल दिसंबर में जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके तीन गुटों में बंट गई. पार्टी की महासचिव वी.के. शशिकला के खिलाफ विद्रोह करने वाला पहला गुट पन्नीरसेल्वम का रहा. शशिकला मौजूदा समय में जेल में हैं. बाद में उभर कर आए दूसरे दो गुटों में मुख्यमंत्री पलनीस्वामी व उप महासचिव टी.टी.वी. दिनाकरन का गुट है. दिनाकरन शशिकला के भतीजे हैं. पन्नीरसेल्वम गुट ने एआईएडीएमके के विलय की तीन शर्ते रखी थीं. इनमें शशिकला व उनके परिवार के सदस्यों को पार्टी से बाहर रखने, जयललिता के निधन की न्यायिक जांच कराने और जयललिता के आवास को स्मारक में बदलने की बात शामिल है.

पन्नीरसेल्वम गुट पारित किया प्रस्ताव

कुछ दिन पहले पन्नीरसेल्वम गुट ने एक प्रस्ताव पारित किया, इसमें दिनाकरन की उप महासचिव के रूप में नियुक्ति को अनुचित, अस्वीकार्य व अवैध घोषित किया गया. इस प्रस्ताव को दिनाकरन ने चुनौती दी. दिनाकरन ने दावा किया कि उसके पास 20 विधायकों का समर्थन है. प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि शशिकला की खुद की महासचिव के तौर पर नियुक्ति निर्वाचन आयोग के जांच के घेरे में है. पलनीस्वामी गुट का कहना है कि पन्नीरसेल्वम गुट की प्रमुख मांगों को गुरुवार की घोषणा के जरिए पूरा कर दिया गया है.

पन्नीरसेल्वम बन सकते हैं उप मुख्यमंत्री

यह अटकलें लगाई जा रही है कि पन्नीरसेल्वम को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा और उनके गुट के कुछ सदस्यों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी. लेकिन, पन्नीरसेल्वम गुट के सदस्यों ने इसे खारिज कर दिया. पन्नीरसेल्वम गुट के एक नेता ने कहा, “सरकार पलनीस्वामी के तहत होगी और पार्टी पन्नीरसेल्वम के तहत होगी. पार्टी को एक समन्वय समिति द्वारा चलाया जाएगा.”

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दिल्‍ली के 5 स्‍टार होटल में महिला से छेड़छाड़, CCTV में कैद हुई वारदात

पिछले कई महीनों से होटल का सिक्योरिटी मैनेजर पवन उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बना रहा था.
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आरएसएस नेता ने कहा, 'राहुल को न संघ की जानकारी है न इतिहास की'

गुरुवार को जदयू के बागी नेता शरद यादव की ओर से आयोजित विपक्षी पार्टियों की बैठक में राहुल ने आरएसएस पर हमला किया था. 
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ज़ी जानकारी: Power Cut से होने वाले साइड इफेक्ट

आपको याद होगा आज से 5 वर्ष पहले 30 जुलाई 2012 को हमारे देश में एक बड़ा Power Cut हुआ था. देश के उत्तरी हिस्से के 8 राज्य पूरी तरह से Blackout हो गए थे. जिसकी वजह से करीब 30 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे.इसके बाद अगले ही दिन यानी 31 July, 2012 को तीन electricity grids में गड़बड़ी हो गई थी. Power Cut की वजह से पूरे देश के 21 राज्यों और 1 केन्द्र शासित प्रदेश के करीब 62 करोड़ लोग प्रभावित हो गए थे. लेकिन तब किसी भी मंत्री ने अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए इस्तीफा नहीं दिया था.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च में महाराष्ट्र में सबसे कम बिजली कटी. महाराष्ट्र में मार्च के महीने में औसतन 1 घंटा 26 मिनट बिजली कटी. जिन 17 राज्यों के आंकड़ें उपलब्ध हैं, उनमें हरियाणा में सबसे ज्यादा बिजली कटी. मार्च में हरियाणा में औसतन 48 घंटे 17 मिनट तक Power cut हुआ. यानी हरियाणा में हर रोज़ 1 घंटे 33 मिनट तक Power Cut होता है.

इस रिपोर्ट में लिखा है कि 8 वर्षों के अंदर पेट्रोल और डीजल की कारें बेकार हो जाएंगी.. क्योंकि इलेक्ट्रिक कारों का दौर में Transportation को पूरी तरह से बदलकर रख देगा आज के दौर में पेट्रोल और डीजल पर चलने वाली कारों की Life करीब 3 लाख 21 हज़ार किलोमीटर होती है जबकि इलेक्ट्रिक कारों की Life16 लाख किलोमीटर होगी.

इस वजह से आने वाले समय में लोग इलेक्ट्रिक कारों और सेल्फ ड्राइविंग कारों की खऱीदना शुरू करेंगे.ये सारा बदलाव इसलिए होगा क्योंकि इलेक्ट्रिक कार और Self ड्राइविंग कार पर आने वाला खर्च पेट्रोल और डीजल वाली कार के मुकाबले 10 गुना सस्ता होगा.

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में 18 से 25 Moving Parts होते हैं जबकि पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों में 2 हज़ार से ज़्यादा Moving parts होते हैं. ऐसे में Electric गाड़ियां एक तरह से Maintenance Free हो जाएंगी.

ऐसी स्थितियों में पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम हो जाएगी और दुनिया भर में Crude Oil के दाम 25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक गिर जाएंगे. इसकी वजह से वो देश परेशान हो जाएंगे जिनकी अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर है. ख़ासतौर पर Russia, Nigeria, सऊदी अरब और Venezuela में आर्थिक संकट आ जाएगा.

इस अर्थशास्त्री ने ये भी लिखा है कि 2022 तक सामान्य और औसत दर्जे की इलेक्ट्रिक कारों की Range 300 किलोमीटर के पार चली जाएगी और उनकी कीमत भी गिर जाएगी और इसके बाद इन कारों की बिक्री बढ़ जाएगी. और इस वजह से दुनिया की पूरी पेट्रोलियम इंडस्ट्री खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगी.

भारत 2032 तक देश में इलेक्ट्रिक कारों की क्रांति लाना चाहता है.इस बीच चीन भी इस दिशा में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है 2025 तक चीन में 70 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां सड़कों पर आ सकती हैं. ऐसे में पेट्रोल और डीज़ल का बिज़नेस करने वाली कंपनियों और इस पर निर्भर रहने वाले देशों के बुरे दिन आने वाले हैं.

इसके लिए सबसे पहले सरकारी दफ्तरों में इलेक्ट्रिक कारों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसी वर्ष नवंबर के महीने से देश के तमाम कैबिनेट मंत्री और सीनियर Bureaucrats इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं . भारत 10 हजार Electric Cars के लिए कई Electric Vehicle कंपनियों से समझौता करने वाला है. इन इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज करने के लिए दिल्ली-NCR में करीब 4 हज़ार Charging स्टेशन भी बनाए जाएंगे.

आपको याद दिला दें कि जलवायु परिवर्तन पर हुए पेरिस सम्मेलन में ग्लोबल वॉर्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है. एक International Energy Agency के अनुसार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2040 तक दुनिया को 60 करोड़ इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ज़रूरत होगी और इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत में मौजूद होगा.

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ज़ी जानकारी: बाढ़ की वजह से देश में करोड़ों की संपत्ति बर्बाद

National Disaster Management Authority के मुताबिक देश में बाढ़ से अब तक 621 लोगों की मौत हो चुकी है देश के 14 राज्यों के 10 हज़ार से भी ज़्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. 44 हज़ार 682 घर बर्बाद हो चुके हैं, 1 करोड़ से भी ज़्यादा लोग बाढ़ से संघर्ष कर रहे है अब तक बाढ़ से 793 करोड़ की संपत्ति बर्बाद हो चुकी है.

Central Water Commission और Ministry of Water Resources के मुताबिक वर्ष 1953 से 2013 तक बाढ़ की वजह से देश की कम से कम 2 लाख 32 हज़ार करोड़ रुपये की संपत्ति बर्बाद हो चुकी है .इन 60 वर्षों में किसानों की 66 हज़ार करोड़ रुपये की फसल बाढ़ में बह गई ये वो सरकारी आंकड़े हैं जो हक़ीक़त से कुछ कम नज़र आ रहे हैं.

ज़मीनी स्तर पर होने वाला नुकसान इससे ज़्यादा भी हो सकता है. बाढ़ की वजह से 2 लाख 32 हज़ार करोड़ रूपये की रकम पानी में डूब गई इस रकम से देश में AIIMS जैसे 52 बड़े अस्पताल बनाए जा सकते हैं.इतनी रकम से देश में लगभग 8 करोड़ Toilets बन सकते हैं.

देश में 12 हज़ार 800 से ज़्यादा स्कूलों का निर्माण किया जा सकता है. सरकार ने वर्ष 2016-17 में MGNREGA के लिए 38 हज़ार 500 करोड़ रूपये का बजट तैयार किया है इस हिसाब से ये रकम MNREGA का पांच साल का बजट है.

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थलसेना, नौसेना, वायुसेना के प्रमुखों ने की देश की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा; लद्दाख में घुस आई थी चीनी सेना

नई दिल्ली: सेना, नौसेना और वायुसेना की शक्तिशाली चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) ने गुरुवार (17 अगस्त) को चीन-भारत सीमा समेत देश में तीनों सेनाओं की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी.

सूत्रों ने बताया कि बैठक में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाओं के बीच बने हुए गतिरोध पर और मंगलवार (15 अगस्त) को चीन के सैनिकों द्वारा लद्दाख की पैंगांग झील के किनारे भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिशों पर भी चर्चा हुई.

एक सूत्र ने कहा, ‘‘देश की बाहरी सुरक्षा और सीमाओं के हालात से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई.’’ दो दिन पहले ही भारतीय सीमा पर तैनात जवानों ने पैंगांग झील के किनारों से भारतीय क्षेत्र में घुसने की चीन के सैनिकों की कोशिश को नाकाम कर दिया था.

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने बीच में दो बार दो इलाकों-फिंगर फोर और फिंगर फाइव में भारत की तरफ घुसने का प्रयास किया. लेकिन दोनों बार मुस्तैद भारतीय सैनिकों ने इन कोशिशों को विफल कर दिया.

दोनों पक्षों के जवानों को मामूली चोट आईं और परंपरागत बैनर अभ्यास के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया गया जिसके तहत दोनों पक्ष अपनी अपनी स्थितियों में वापस लौटने से पहले बैनर दिखाते हैं. इस घटना पर बुधवार (16 अगस्त) को लेह के चूसूल सेक्टर में दोनों पक्षों की फ्लैग वार्ता में चर्चा हुई.

भारत और चीन के सैनिकों के बीच भारत-चीन-भूटान ट्राई-जंक्शन में डोकलाम में दो महीने से थोड़ा अधिक वक्त से गतिरोध चल रहा है. चीन भारत के खिलाफ बयान देते हुए डोकलाम से भारतीय जवानों को तत्काल हटाने की मांग करता आ रहा है. चीन के सरकारी मीडिया ने डोकलाम गतिरोध पर भारत की आलोचना करते हुए लेख प्रकाशित किये हैं.

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