IGI एयरपोर्ट से इटली की महिला को अगवा कर चंडीगढ़ ले जाया गया, दो अरेस्ट

नई दिल्ली. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दो लोगों ने 36 साल की इतालवी महिला को कथित तौर पर अगवा कर लिया और उससे 500 यूरो लूट लिए और महिला को चंडीगढ़ ले गए. पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

20 जून को दिल्ली पहुंची थी महिला

महिला 20 जून को दिल्ली पहुंची थी और उसके बाद पहाड़गंज स्थित होटल जाने के लिए टैक्सी बुक की थी. हालांकि ड्राइवर उसे गोल मार्केट स्थित फर्जी सरकारी ऑफिस ले गया. उसे बताया गया कि दिल्ली में चुनाव होने की वजह से पहाड़गंज की तरफ जाने वाले सभी रास्ते बंद हैं. 

महिला को जबरदस्ती चंडीगढ़ ले गए आरोपी

महिला को इस बात पर संदेह हुआ और उसने आरोपियों से वाईफाई पासवर्ड मांगा. इसके बाद उसने अपने फेसबुक वॉल पर एक मैसेज पोस्ट किया. इस पर आरोपियों को लगा कि महिला को उनके बारे में शह हो गया है और उन्होंने उससे 500 यूरो लूट लिए और जबरदस्ती कार में बैठा दिया. आरोपी महिला को आवाज उठाने पर नतीजा भुगतने की धमकी देते हुए चंडीगढ़ ले गए.

चंड़ीगढ़ में महिला आरोपियों के चंगुल से भागने में कामयाब रही

चंडीगढ़ पहुंचने के बाद महिला उनके चंगुल से भागने में कामयाब रही और उसने इटली के दूतावास को इस बारे में सूचित किया. दूतावास ने दिल्ली पुलिस को मामले के बारे में सूचित किया और मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने बताया कि तकनीकी सवर्लिांस के बाद आरोपियों निक्की एवं पृथ्वी राज को अरेस्ट कर लिया गया.

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चीनी मीडिया ने भी माना, मोदी की अमेरिका यात्रा से भारत को फायदा हुआ

बीजिंग: चीन के सरकारी मीडिया ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के बाद दोनों देशों के संबंधों ने नई उंचाइयां छुईं और इससे कई ‘सकारात्मक नतीजे’ आए. मोदी की अमेरिकी यात्रा को लेकर सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के एक समाचार विश्लेषण लेख में कहा गया कि ट्रंप के जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से यह किसी राष्ट्र प्रमुख के साथ ट्रंप का पहला वर्किंग डिनर था.

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ट्रंप को बताया भारत का सच्चा दोस्त

इसमें कहा गया कि ट्रंप, जिन्होंने कहा कि वह भारत के ‘सच्चे दोस्त’ हैं, ने पूर्ववर्ती बराक ओबामा के शासनकाल में गहराए उन संबंधों को और मजबूत किया जिनके लिए उससे पहले जॉर्ज डब्ल्यू बुश एवं बिल क्लिंटन ने योगदान दिया था. लेख के मुताबिक, ‘इस दौरे को विशेषज्ञ इस बात को ध्यान में रखकर शानदार बता रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप के जलवायु परिवर्तन से संबंधित पेरिस समझौते से पीछे हटने के साथ भारत पर समझौते के कायार्न्वयन के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाने के बाद दोनों देशों के बीच विवाद हुआ था.

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ट्रंप ने पाकिस्तान को भी संदेश दिया

इसमें कहा गया कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद को लेकर मजबूत सहयोग सुनिश्चित करने का प्रण लिया. ट्रंप ने साथ ही पाकिस्तान को संदेश भी दिया कि वह 26/11 के मुंबई हमले, पठानकोट एवं पाकिस्तान स्थित समूहों द्वारा किए गए दूसरे सीमा पार आतंकी हमलों के गुनहगारों को तेजी से सजा दे. 

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पेट्रोलियम और रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाना राज्यों के हित में होगा: अरुण जेटली

नई दिल्ली : जीएसटी लागू होने से दो दिन पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जी बिजनेस को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में जीएसटी के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उम्मीद जताई की जल्द ही पेट्रोल और रियल एस्टेट को भी जीएसटी के दायरे ले आया जाएगा. उन्होंने कहा केंद्र तो इन दोनों को जीएसटी के दायरे में  लाना चाहता था लेकिन राज्यों को कुछ समस्या जिसकी वजह से इनको छोड़ दिया गया है.  उन्होंने उम्मीद जताई कि जब जीएसटीएन की फंक्शनिंग सामन्य हो जाएगी और लोग इसका फायदा देखेंगे तो राज्य इसको भी लाएंगे. वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोलियम और रियल एस्टेट को GST में लाना राज्यों के हित में होगा. 

राजनीतिक दलों ने दिखाई परिपक्वता

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी एक ऐसा मुद्दा है जिसमें कमोबेश सभी राजनीतिक दलों की सहमति शामिल है. उन्होंने जो राजनीतिक दल अभी भी कुछ बिंदुओं पर विरोध कर रहे हैं वह अपने विरोध को छोड़ेंगे.वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्री थे अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोग थे, नियम बनाए गए, रेट्स तय किए गए, प्रक्रियाएं तय की गई और सैंकड़ों निर्णय लिए गए, सब सर्वसम्मति से लिए गए. वित्त मंत्री ने कहा कि देश की राजनीति करने वाले लोगों ने, शासन चलाने वाले लोगों ने, राजनीतिक विचारधारा और मतभेद के बावजूद भी एक विचित्र मैच्योरिटी दिखाई है. 

जीएसटी लागू होने से कारोबार हो जाएगा आसान

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू हो जाने के बाद कारोबार काफी आसान हो जाएगा, कारोबार करने का तरीका बदल जाएगा और टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी. एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हम एयर लाइन को घाटे में नहीं चला सकते. 

‘गरीब और अमीर बराबर टैक्स दें ऐसा नहीं होगा’

जेटली ने कहा कि सरकार ने एक ऐसी स्थिति नहीं बनानी चाहती जिसमें गरीब और अमीर को एक जैसा टैक्स देना पड़े. उन्होंने कहा कि जो प्रोडेक्ट्स गरीब इस्तेमाल करते हैं उस पर कम टैक्स लगना होगा और जो लग्जरी प्रोडेक्ट्स हैं उन पर ज्यादा टैक्स लगे. वित्त मंत्री ने एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन पर भी बात की.उन्होंने कहा कि हम एयर इंडिया  को घाटे में नहीं चला सकते हैं.

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योग में गोल्ड मेडलिस्ट मां के साथ कर रही मजदूरी, पिता बेचते हैं गुब्बारे

रायपुर: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) पर जहां पूरी दुनिया योगासन में व्यस्त थीं, वहीं छत्तीसगढ़ की रहने वाली दामिनी साहू ईंट और गारा ढो रही थी. जी हां, यह कहानी है अंतरराष्ट्रीय योग स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली दामिनी की. अंग्रेजी की एक प्रतिष्ठित वेबसाइट में प्रकाशित खबर के मुताबिक दामिनी घर खर्च में मदद करने के लिए मजदूरी करती है.

रायपुर से 65 किमी दूर दर्रा गांव (जिला धमतरी) की रहने वाली दामिनी ने तमाम परेशानियों के बावजूद 6 से 9 मई तक काठमांडू में आयोजित होने वाली ‘साउथ एशियन योगा स्पोट्र्स चैंपियनशिप’ में हिस्सा लिया था. यहां उसने पाकिस्तान के खिलाड़ी को धूल चटाकर गोल्ड पर कब्जा किया था.

एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी वेबसाइट से दामिनी ने बातचीत में बताया कि मेरे पास नेपाल जाने के लिए पैसे नहीं थे. इसके लिए मैंने 4 मई को केंद्रीय मंत्री अजय चक्रधर से आर्थिक मदद के लिए गुजारिश की लेकिन उनकी तरफ से मदद नहीं मिली. अंत में मैंने दो प्रतिशत प्रतिमाह के ब्याज पर पैसे लेकर नेपाल जाकर चैंपियनशिप में हिस्सा लिया.

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने योग के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए ‘योग कमीशन’ बनाया है. वेबसाइट के मुताबिक इस बारे में जब केंद्रीय मंत्री से बात करने की कोशिश की तो उनसे बात नहीं हो सकी. सात साल की उम्र में योग का अभ्यास शुरू करने वाली दामिनी बताती हैं कि केंद्रीय मंत्री मेरे पास के ही कुरुड लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं.

प्रतिदिन आठ से दस घंटे दैनिक मजदूरी करके 100 से 150 रुपये कमाने वाली दामिनी बताती हैं कि मैं पिछले सात महीने से लेबर कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगा रही हूं. परिवार का गुजारा चलाने के लिए मेरी मां भी मजदूरी करती हैं. दामिनी के पिता दिव्यांग होने के कारण काम करने में असमर्थ हैं और वह गुब्बारे बेचकर परिवार के भरण पोषण में मदद करते हैं.

दामिनी के तीन छोटे भाई-बहन हैं. बीकॉम प्रथम वर्ष की परीक्षा पास कर चुकी दामिनी ने बताया कि मेरा कॉलेज ही मेरे लिए प्रेरणास्रोत रहा. अब मैं शाम को मजदूरी के बाद समय मिलने पर योग करती हूं.

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डियर जिंदगी: सारे दोस्‍त हमेशा के लिए नहीं होते…

दोस्‍तों को लेकर क्रेजी होना नई बात नहीं. हर कोई होता है, लेकिन यह वन-वे ट्रैफि‍क है. और अगर है भी तो कब तक? ‘डियर जिंदगी’ को अहमदाबाद से नियमित पाठक का ईमेल मिला. आईआईएम से पूर्व छात्र, वहीं मल्‍टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले दिनेश वर्मा ने दोस्‍तों को लेकर अनूठे अनुभव साझा किए हैं. आइए, आज इसी पर बात करते हैं. दिनेश ने लिखा है..

1. दोस्‍त बहुत सारे होते हैं, जब तक आप सफल न हों. सफलता दोस्‍तों की दुश्‍मन है.

2. हर दोस्‍त हमेशा पुराने जैसा नहीं रहता. वह काम आपके साथ नहीं रहता. उनकी मजबूरी को समझें 

3. परिचित और दोस्‍तों में अंतर होता है. हर वह व्‍यक्‍ति जिसका मोबाइल में नंबर हो, दोस्‍त नहीं होता. 

दिनेश लिखते हैं, ‘दोस्‍ती को लेकर उनका संघर्ष, दोस्‍तों की जिंदगी में हुए कुछ परिवर्तनों के बाद शुरू हुआ. लेकिन उनके लिए इसे संभाल पाना इतना मुश्किल हो गया कि इसकी कीमत उन्‍हें प्रोफेशनल लाइफ में कुछ अवसर गंवाने की हद तक चुकानी पड़ी. आईआईएम से प्रबंधन की पढ़ाई पढ़ने वाला जिंदगी के छोटे से प्रबंधन में उलझ गया’. उन्‍होंने हर जान पहचान, परिचित को दोस्‍त मानने की गलती कर दी. वह सबके लिए उपलब्‍ध रहने कि कोशिश में खुद को स्‍वयं के लिए अनुपलब्‍ध करवा बैठे. हर किसी को प्रसन्‍न की आदत उनको संयुक्‍त परिवार से मिली, लेकिन इसे परिचितों, प्रोफेशनल दुनिया से कैसे निभाना है, इसमें दिनेश लगातार गलती करते रहे.

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उन्‍होंने अपने खास दोस्‍तों के लिए बच्‍चों, पत्‍नी को मिलने वाले समय को आधा कर दिया. घर की जगह दोस्‍तों की खुशी को उन्‍होंने महत्‍व दिया. यहां तक सब ठीक था, क्‍योंकि उनकी पत्‍नी बेहद समझदार, संवेदनशील हैं. लेकिन जैसे ही उनके सबसे अजीज दोस्‍तों की शादियां शुरू हुईं. दोस्‍तों ने उनकी जगह अपने परिवार को चुना. परिवार के समय के आधार पर उनको समय देना शुरू कर दिया. 

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यहां से दिनेश का मुश्किल समय शुरू हो गया. वह खुद को संभालने में नाकाम हो गए. उनके भीतर एक हलचल शुरू हो गई. उन्‍हें ‘अपेक्षा’ के अवसाद ने घेर लिया. पत्‍नी और बच्‍चों के साथ के बाद भी उन्‍हें अचानक एहसास हुआ कि वह कितने अकेले हैं. क्‍योंकि उनके अजीज दोस्‍तों ने शादी के बाद खुद को अपनी ‘प्रायरिटीज’ के हिसाब से तय कर ली. बड़ी मुश्किल से दिनेश खुद को सामान्‍य कर पाए. उन्‍होंने खुद को परिवार के साथ रि-एलाइन किया. अपनी रुचियों की ओर मुड़े. दोस्‍तों से गिले-शिकवे की जगह व्‍यावहारिक रवैए को अपनाया. 

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आप दूसरों से जितना प्रेम करते हैं, जैसा व्‍यवहार करते हैं, जरूरी नहीं कि उनकी ओर से समय आने पर वैसा ही व्‍यवहार मिले. इसलिए जितना संभव हो अपने मन के बगीचे में ‘अपेक्षा’ की घास कम से कम उगने दें. किसी से प्रेम करना, उसकी समय आने पर मदद करना,यह आपका स्‍वभाव है, दूसरे का नहीं. इसलिए अपने जैसे व्‍यवाहर की उम्‍मीद दूसरे से बिल्‍कुल नहीं करनी चाहिए. हम वह कर रहे हैं, जो हमें खुशी देता, लेकिन यह दूसरे का स्‍वभाव नहीं है. आप अपने स्‍वभाव में रहें, दूसरों को ‘अपने’ में रहने दें. बस, इतना जरूर करें कि दिनेश के इस दोस्‍ती मैनेजमेंट सबक को अपनी जिंदगी में जरूर जांच लें, कहीं आप भी तो इसी राह पर नहीं चल रहे हैं. 

(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

(https://twitter.com/dayashankarmi)

(अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें: https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

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नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूटे ने पीएम नरेंद्र मोदी को दिया एक शानदार गिफ्ट

नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कि बुधवार (28 जून) को ही तीन देशों की सफल यात्रा कर स्वदेश लौटे हैं, को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूटे ने एक शानदार उपहार भेंट किया. 

न्यूज एजंसी एएनआई द्वारा माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर साझा की गई एक तस्वीर दिखाती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साईकिल की सवारी कर रहे हैं जिसे नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने उपहार स्वरूप भेंट किया है जो कि उनके (नरेंद्र मोदी के) बगल में ही खड़े मुस्कुरा रहे हैं.  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूटे को उनके द्वारा दिए गए इस प्यारे से तोहफे के लिए ‘धन्यवाद’ कहा.

गौरतलब है कि नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूटे कभी सुरक्षाघेरे में नहीं चलते. डच राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में दिखाया गया है पीएम रूटे अपने घर से ऑफिस आने और फिर ऑफिस से घर जाने के लिए साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं.

वीडियो में, प्रधानमंत्री मार्क रूटे अपने काले रंग की माम्बा साइकिल में आई एक छोटी-सी तकनीकी परेशानी को सुलझाते दिखते हैं. यहां तक कि स्टेट विजिट के दौरान भी रूटे साइकिल से काम पर आने की परंपरा को बरकरार रखने की कोशिश करते हैं.

तीन देशों की यात्रा से लौटे प्रधानमंत्री मोदी, सुषमा स्वराज ने किया स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों के अपने दौरे को पूरा करके बुधवार (28 जून) को अपने देश लौट आए हैं. वह पुर्तगाल, अमेरिका और नीदरलैंड की यात्रा पर गए थे. भारत पहुंचने पर मोदी का स्वागत विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया. मोदी की इस चार दिवसीय यात्रा का प्रमुख आकर्षण उनकी अमेरिका की यात्रा रही. मोदी ने 26 जून को वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पहली मुलाकात की थी.

अमेरिका में मोदी ने ट्रंप के साथ मुलाकात की और इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग मजबूत करने का संकल्प किया. भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान से अनुरोध किया कि वह सुनिश्चित करे कि उसकी धरती का इस्तेमाल सीमा पार आतंकी हमलों के लिए न हो.

मोदी सबसे पहले पुर्तगाल पहुंचे. वहां उन्होंने अपने समकक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ विस्तृत वार्ताएं की. वहां उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित भी किया और कोस्टा को ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड’ भी भेंट किया. अपनी इस यात्रा के अंतिम चरण में मोदी नीदरलैंड गए और वहां उन्होंने अपने समकक्ष मार्क रूटे के साथ वार्ता की. वहां उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया.

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सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने अल्पसंख्यक समुदाय पर हमलों के विरोध में लौटाया पुरुस्कार

नई दिल्ली: प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने भीड़ द्वारा मुसलमानों को पीट-पीट कर मार देने की नृशंस घटना और उनमें दहशत फैलाने के विरोध में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार लौटा दिया.

ताजा घटना राष्ट्रीय राजधानी के पास की है, जिसमें जुनैद नाम के एक मुस्लिम किशोर की मौत हो गई. वर्ष 2008 में इस पुरस्कार से सम्मानित शबनम ने कहा कि यह पुरस्कार देने वाला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अपनी पूरी विश्वसनीयता खो चुका है. उन्होंने आयोग के प्रमुख पर उनके बयानों को लेकर निशाना साधा.

आयोग प्रमुख गयोरुल हसन रिजवी हाल में उस समय विवादों में आ गए थे जब उन्होंने कहा था कि भारत के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने वालों को पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए.

शबनम ने आयोग को लिखे लेटर में कहा, ‘मैं अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों पर हमले, हत्याओं और सरकार द्वारा पूरी तरह से निष्क्रियता, उदासीनता और हिंसक गिरोहों को मौन समर्थन के विरोध में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार वापस करती हूं, जो अपनी पूरी विश्वसनीयता खो चुका है.’

गैर सरकारी संगठन ‘अनहद’की प्रमुख हाशमी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के कार्यालय में जाकर पुरस्कार लौटा दिया. उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 2008 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में मिला था.

उन्होंने मीडिया को बताया कि जिस तरह देश में मुसलमानों के खिलाफ सांप्रदायिक उन्माद का माहौल बनाया जा रहा है और अखलाक, पहलू खान तथा अब जुनैद की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या की गई, इससे व्यथित होकर उन्होंने पुरस्कार लौटने का फैसला किया.

उन्होंने कहा पिछले कुछ सालों से हिन्दू राष्ट्र बनाने की कोशिशें चल रही हैं और उसके लिए देश में मुसलामानों के खिलाफ घृणित प्रचार किया जा रहा है जिसका नतीजा यह है कि जुनैद जैसा किशोर भी भीड़ द्वारा पीट-पीट कर सरे आम मार दिया जा रहा है और सरकार तमाशबीन बनी रहती है. 

 

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बीजेपी के साथ थे ज्यादा सहज : केसी त्यागी

Bihar News: राष्ट्रपति उम्मीदवार को समर्थन के नाम पर महागठबंधन में उभरी दरार अब और चौड़ी होती जा रही है। अब महागठबंधन के घटक दाल जेडीयू का दर्द भी सामने आया। वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी के अनुसार जेडीयू का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन ही ज्यादा सहज था। के.सी. त्यागी ने हैरानी जताते हुए कहा कि ऐसे समय में जब कांग्रेस को बड़े राष्ट्रीय दल होने के कारण विवाद को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए थे तो पार्टी के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद ने नीतीश कुमार पर जो टिप्पणी की वह पूरी तरह आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान से चीजें और खराब होंगी।

के.सी. त्यागी ने कहा, ‘जेडीयू का बीजेपी के साथ गठबंधन सहज था। वैचारिक समस्या जरूर थी, लेकिन काम करने में कोई समस्या नहीं थी। हम बिहार में महागठबंधन पांच साल चलाना चाहते थे। लेकिन ऐसे बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, जिसमें किसी पार्टी के आला नेताओं के ही खिलाफ बात कही जा रही हो।’ उन्होंने कहा कि पार्टी कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के गैरदोस्ताना बयान से सहज नहीं है। के.सी. त्यागी ने कहा, ‘महागठबंधन हमने केवल बिहार में किया है, यह कांग्रेस को याद रखना चाहिए। कांग्रेस नीतीश कुमार का चरित्र हनन करने में लगी हुई है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।’

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नीदरलैंड के पीएम ने हिंदी में TWEET करके किया मोदी का स्वागत

नई दिल्ली. नीदरलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत नीदरलैंड के पीएम ने उनके ही अंदाज में किया. नीदरलैंड के मिनिस्‍टर प्रेसीडेंट (प्रधानमंत्री) मार्क रूट ने पीएम मोदी के स्वागत में हिंदी ट्वीट किए. रूट का यह अंदाज मोदी से मिलता है बता दें पीएम भी किसी विदेशी मेहमान का स्वागत करते हुए या किसी विदेशी दौरे पर जाते समय वहां की भाषा में ट्वीट करते हैं.

मार्क रूट ने दो ट्वीट हिंदी में किए

मार्क रूट ने मोदी के स्वागत में दो ट्वीट हिंदी में किए पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘नीदरलैंड्स में आपका स्वागत है @narendramodi. भारत और नीदेरलैंड्स के 70 साल के द्विपक्षीय रिश्ते के साथ मैं हमारी बैठक के लिए बहुत उत्सुक हूं.’ 

इसके कुछ समय बाद मार्क रूट ने एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा. ‘नीदरलैंड्स में पधारने के लिए धन्यवाद @narendramodi हम आने वाले सालों में हमारे सतत सहयोग के लिए तत्पर हैं.’

 

 

पीएम मोदी ने डच भाषा में किया किया ट्वीट
नीदरलैंड पहुंचने पर पीएम मोदी ने डच भाषा में ट्वीट किया ‘नीदरलैंड पहुंच गया हूं. यह यात्रा बेहद महत्‍वपूर्ण है जिससे एक मूल्‍यवान दोस्‍त के साथ रिश्‍ते गहरें होंगे.’

 

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देश को आगे ही नहीं बढ़ाना,आधुनिक भी बनाना है

News in Hindi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड्स में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार देश के विकास के लिए काम कर रही है, लेकिन देश को आगे बढ़ाना ही काफी नहीं है, इसे आधुनिक भी बनाना है। उन्होंने देश के विकास में जनभागीदारी का महत्व समझाने के साथ ही महिलाओं के योगदान की सराहना की। भोजपुरी में भाषण की शुरुआत करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड्स में बसे भारतीय मूल के लोगों विशेषकर सूर्यनाम के निवासियों की जमकर तारीफ की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘डेढ़ सौ साल पहले हमारे पूर्वज भारत से यहां आए, लेकिन दो-तीन पीढ़ियां बीत जाने के बाद भी सभी हिंदुस्तान से जुड़े हुए हैं। जड़ों से जुड़ने से ताकत मिलती है। जड़ों से जुड़े रहने की ताकत क्या होती है यह सूर्यनाम के लोगों से सीख सकते हैं। आप में से बहुत लोग होंगे जिन्होंने हिंदुस्तान नहीं देखा होगा। आपमें से कई होंगे जिनके दादा-परदादा हिंदुस्तान छोड़कर यहां आए थे। वे भारत के किस क्षेत्र, किस गांव से थे यह भी नहीं पता होगा, लेकिन आज भी आपके दिल में हिन्दुस्तान जिंदा है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीयों को राष्ट्रदूत बताते हुए कहा, ‘आप लोग देश की अच्छाइयों से विश्व को परिचित कराते हैं। जब लोगों को पता चलता है कि भारत ऐसा देश है जहां दुनिया के सभी संप्रदाय के लोग रहते हैं, 100 भाषाएं हैं, 1700 बोलियां तो लोगों को आश्चर्य होता है। लोग पूछते हैं कि आप 100 भाषाओं वाले देश में कैसे रहते हैं? हमें जोड़ने वाली जो भाषा है वह मातृभूमि के प्रति प्यार और इतिहास, संस्कृति, परंपरा के प्रति लगाव है।’

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