पंचकूलाः रसोई गैस सिलेंडर में रिसाव की वजह से धमाके में 8 घायल

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यूपीः मंदिर में दीपक जलाने गये किशोर को जिंदा जलाया

सम्भलः यूपी के सम्भल के गुन्नौर थाना क्षेत्र में मंदिर में दीपक जलाने गए 14 वर्षीय युवक पर तीन सगे भाइयों ने कथित रूप से केरोसिन का तेल छिड़क कर आग लगा दी. युवक की इलाज के दौरान मौत हो गयी. परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी.

गुन्नौर के क्षेत्राधिकारी पुलिस सुदेश कुमार ने बताया कि दबतरा गांव निवासी रामप्रसाद ने आरोप लगाया है कि कल शाम उनका पोता योगेंद्र गांव के मंदिर में पूजा करने और दीपक जलाने गया था. वहीं गांव के तीन सगे भाईयों छोटू, सुगरपाल और व धर्मपाल ने उसपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी. योगेंद्र को इलाज के लिए अलीगढ़ ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गयी.

यह भी पढ़ेंः यूपी के संभल में दो संप्रदायों के बीच तनाव के बाद पलायन को मजबूर हुए लोग

उक्त मामले मे युवक के दादा रामप्रसाद की तहरीर पर तीनों भाईयों छोटू, सुगरपाल और धर्मपाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर जांच शुरू कर दी है

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दिवाली के अवसर पर सभी जायज लंबित मामलों में मेडिकल वीजा देगा भारत : सुषमा स्‍वराज

नई दिल्‍ली : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को कहा कि दिवाली के शुभ अवसर पर भारत सभी ऐसे लंबित मामलों में मेडिकल वीजा देगा, जिनमें वीजा देना जायज है. उन्होंने पाकिस्तानी नागरिकों की ओर से किए गए ऐसे अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए यह टिप्पणी की.

आमना शमीन नाम की एक पाकिस्तानी महिला की ओर से वीजा के लिए किए गए अनुरोध पर सुषमा ने कहा, ‘कृपया पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग से संपर्क करें. हम इसकी अनुमति देंगे’. शमीन के पिता इलाज के लिए पहले से दिल्ली में हैं और वह उनसे मिलना चाहती हैं. सुषमा ने ट्वीट किया, ‘दीपावली के शुभ अवसर पर भारत आज ऐसे सभी लंबित मामलों में मेडिकल वीजा देगा, जिनमें वीजा देना जायज है’.

 

कल सुषमा ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग को निर्देश दिया था कि वह भारत में इलाज के लिए एक पाकिस्तानी बच्चे को वीजा जारी करे. बच्चे के पिता काशिफ ने ट्विटर पर सुषमा से अनुरोध किया था कि अब्दुल्ला के इलाज के लिए मेडिकल वीजा दिया जाए. काशिफ ने उनसे कहा कि अब्दुल्ला को भारत में लीवर प्रतिरोपण के बाद की जांच करानी है.

सुषमा ने कल काशिफ को जवाब देते हुए ट्वीट किया था, ‘दवा के अभाव में आपके बच्चे के इलाज पर असर नहीं पड़ना चाहिए. मैंने भारतीय उच्चायोग से कहा है कि वह मेडिकल वीजा जारी करें’. काशिफ ने बताया था कि बच्चे की दवाएं खत्म होने वाली हैं और उन्हें भारत में तुरंत मेडिकल सलाह की जरूरत है.

एक अन्य ट्वीट में कल सुषमा ने कहा कि उस पाकिस्तानी महिला के लिए भी मेडिकल वीजा को मंजूर दे दी गई है जो भारत में लीवर सर्जरी कराना चाहती है.

महिला के बेटे रफीक मेमन ने सुषमा से इस मामले में दखल देकर उसकी मां के लिए वीजा का इंतजाम करने का अनुरोध किया था. 

सुषमा ने नजीर अहमद की ओर से वीजा के लिए किए गए अनुरोध पर भी सकारात्मक रुख अपनाया. नजीर का आठ साल का बेटा मोहम्मद अहमद पिछले एक साल से मेडिकल वीजा का इंतजार कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘हम आपके 8 साल के बच्चे का भारत में इलाज कराने के लिए वीजा जारी करेंगे’. सीमा पार आतंकवाद सहित अन्य मुद्दों को लेकर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कायम तनाव के बावजूद सुषमा पाकिस्तानी नागरिकों को मेडिकल वीजा देने में हमदर्दी दिखाती रही हैं.

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हिमाचल प्रदेश चुनाव: नामांकन के तीसरे दिन 15 उम्मदीवारों ने भरा पर्चा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नामांकन के तीसरे दिन यानि बुधवार को 15 उम्मीदवारों ने अपना पर्चा भरा. 


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: Oct 19, 2017, 09:51 AM IST

हिमाचल प्रदेश चुनाव: नामांकन के तीसरे दिन 15 उम्मदीवारों ने भरा पर्चा

नौ नवंबर को होंगे हिमाचल प्रदेश में चुनाव (फाइल फोटो)

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ZEE जानकारी: दिवाली का बदला स्वरूप, खुशियों के बजाय प्रदूषण और जाम की सताती है चिंता

अब हम देश के सबसे बड़े त्योहारों में एक दिवाली के बदलते स्वरूप की बात करेंगे. दिवाली के शुभ अवसर पर हमारे देश में रोशनी, मिठाईयां, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की बात करने की परंपरा है लेकिन विडंबना ये है कि आज के दौर में दिवाली के मायने पूरी तरह बदल गये हैं. अब दिवाली पर समृद्धि की नहीं स्वास्थ्य की बात की जाती है क्योंकि शहर की हवा में फैला प्रदूषण लोगों को बीमार कर रहा है. खुशी के मौके पर ट्रैफिक जाम में फंसकर होने वाले तनाव की चिंता की जाती है. माना जाता है कि त्रेता युग में भगवान राम के अयोध्या लौटने पर लोगों ने दीये जलाकर दिवाली का त्योहार मनाया था लेकिन कलियुग में अगर भगवान राम को लौटना होता तो शायद वो शहर के ट्रैफिक Jam में फंस जाते और वो प्रदूषण वाली हवा में सांस लेने पर विवश हो जाते. ये आज की कड़वी सच्चाई है… जिसने दिवाली जैसे खुशी और उत्साह से भरे त्योहार को बदलकर रख दिया है. सबसे आप दिवाली के बदलते मायनों की कुछ तस्वीर देखिए.

कुछ वर्ष पहले तक दिवाली पर कुछ ऐसी तस्वीरें देखने को मिलती थीं..जहां रोशनी…आतिशबाज़ी, मिठाईयां और खुशियों का माहौल दिखाई देता था. लेकिन अब ये तस्वीर बदल गई है अब दिवाली के मौके पर दम घोंटने वाला प्रदूषण होता है, सड़कों पर लंबे लंबे Traffic Jam लगते हैं और इस बार आपने ये भी महसूस किया होगा कि दिवाली पर बहुत गर्मी है. 

अब दिवाली के मौके पर घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है.. क्योंकि अगर आप घर से बाहर निकले तो ट्रैफिक Jam में फंस जाएंगे और आपको मजबूरी में ज़हरीली हवा में सांस भी लेनी होगी. सबसे ज़्यादा परेशानी की बात ये है इन समस्याओं को सहन करने अलावा आपके पास कोई विकल्प नहीं है. लापरवाह सिस्टम के सामने देश का आम इंसान लाचार और बेबस नज़र आता है.

Central Road Research Institute यानी CRRI की एक स्टडी के मुताबिक दिल्ली के सिर्फ आठ Junctions पर Traffic Jams की वजह से हर रोज़ 40 हज़ार लीटर Fuel बर्बाद होता है… इस जाम से दिल्ली में करीब 115 टन carbon dioxide गैस पैदा होती है. दिवाली के मौके पर शहरों में Traffic Jam की समस्या बहुत आम है..और इसकी वजह से लोगों के मन में खुशियों के बजाए तनाव रहता हैं. Traffic Jams की वजह से भारत को हर वर्ष करीब 60 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होता है

Peak Hours में वाहनों को कई जगहों पर ट्रैफिक सिग्नल पार करने में 11 मिनट से ज्यादा का समय लग जाता हैं. यानी अगर आपके रास्ते में 5 या 6 ट्रैफिक सिग्नल आ गये तो समझ लीजिए कि आपको दो-गुना समय लग सकता है…दिवाली के मौके पर समय की ये बर्बादी और ज़्यादा बढ़ जाती है. 

एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली में Traffic Jams की वजह से हर रोज लोगों के 90 मिनट बर्बाद हो जाते हैं. 90 मिनटों को लेकर अगर हम बड़े पैमाने पर गणना करें तो एक वर्ष में एक व्यक्ति के 32 हजार 850 मिनट Traffic Jams में बर्बाद होते हैं जो करीब 547 घंटे यानी करीब 23 दिन के बराबर है. इस हिसाब से 60 वर्ष के समय में.. करीब 4 वर्ष Traffic Jams में ही बर्बाद हो जाते हैं.

Centre for Science and Environment ने 2016 में एक स्टडी की थी. जिसके मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली में Peak Hours में किसी वाहन की औसत रफ़्तार 5 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. ये साइकिल की रफ्तार से भी कम है.

देश में दिवाली का माहौल है….और आप भी दिन- रात दिवाली की तैयारियां कर रहे होंगे. इस दौरान आपको घर से बाहर जाना पड़ता होगा.. और जब भी आप अकेले या अपने परिवार के साथ खरीददारी करने जाते होंगे, तो ट्रैफिक Jam आपकी खुशियों पर पानी फेर देता होगा. कई बार ट्रैफिक जाम में फंसने के बाद आपको लगता होगा कि इससे अच्छा तो मैं पैदल ही चला जाता. ये पूरे देश की हकीकत है, इसीलिए आज हमने दिवाली के मौके पर देश की जाम हो चुकी नसों का स्पेशल DNA टेस्ट किया है. सवाल ये है कि त्यौहारों के मौसम में ट्रैफिक Jam से निपटने के लिए हमारी सरकारें कोई नीति क्यों नहीं बनातीं? और अगर सरकारें कोई नीति बनाती भी हैं, तो वो सड़क पर दिखती क्यों नहीं हैं. 

हमारे देश के लोगों को भी सड़क पर चलने से जुड़ी सोच को बदलना होगा….क्योंकि भारत के ज़्यादातर लोग सारे नियम-कायदे.. घर पर रखकर ही सड़क पर निकलते हैं. इसके अलावा एक बड़ी बात ये भी है कि जो जगह यातायात के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए वहां अतिक्रमण हो जाता है… दुकाने खुल जाती हैं.. सिस्टम को रिश्वत देकर फुटपाथ पर अवैध बाज़ारों का निर्माण हो जाता है… और फिर ना तो पार्किंग की जगह बचती है और ना ही किसी को, सड़क पर सुविधा के साथ चलने की जगह मिलती है.

यानी हमारा सिस्टम भी Wrong Side यानी उलटी दिशा में चल रहा है..हमारा सिस्टम वाहनों की बिक्री तो बड़े चाव से करता है.. लेकिन इन वाहनों को चलाने के लिए चौड़ी सड़कें बिछाना… और उनसे अतिक्रमण हटाना भूल जाता है… हमारा सिस्टम कभी ये भी नहीं सोचता कि जो गाड़ियां बिक रही हैं वो सड़क पर उतरने के बाद कहां पार्क होंगी.. हमारे देश में पार्किंग की व्यवस्था को कभी अहमियत नहीं दी जाती.. ये सारे कारण मिलकर एक बड़ी समस्या बन जाते हैं.. और इसी की वजह से आम जनता को तकलीफें सहनी पड़ती हैं.

आप सड़कों पर और फुटपाथ पर जो भी अतिक्रमण देखते हैं… उसके संदर्भ में आपको ये बात याद रखनी होगी कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस को रिश्वत दिए बगैर ये अतिक्रमण नहीं हो सकता. इसलिए अगली बार आप जब भी कहीं अतिक्रमण देखें.. तो समझ जाइए कि उस इलाक़े की पुलिस और प्रशासन बिके हुए हैं.. और उनके संरक्षण में ही ये गैरकानूनी काम हो रहे हैं.

दिवाली के मौसम में ‘सड़क Jam’ वाली समस्या के बारे में तो हमने आपको बता दिया. लेकिन, अभी दो बहुत बड़ी समस्याएं हैं, जिनका ज़िक्र किए बगैर ये विश्लेषण पूरा नहीं हो सकता. हम दिवाली वाले प्रदूषण और दिवाली पर बढ़ती हुई गर्मी की बात कर रहे हैं. ये विश्लेषण हमारे देश के उस सिस्टम के लिए है, जिसे दिवाली के मौके पर ही देश की हवा स्वच्छ रखने की याद आती है. और बाकी के 364 दिन…इंसान, जिये या मरे…किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता.

अगर आप दिल्ली में रहते हैं, तो आपको ये जानकर झटका लग सकता है…कि अक्टूबर 2017 में गर्मी ने पिछले 2 वर्षों का Record तोड़ दिया है.  तीन दिन पहले यानी 15 अक्टूबर को दिल्ली का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सामान्य से क़रीब 3 डिग्री सेल्सियस अधिक था. 2015 और 2016 में 15 अक्टूबर को तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. यानी इस बार तापमान पूरे 1.6 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है.

बढ़ते तापमान की सबसे बड़ी वजह प्रदूषण को माना जा रहा है. ये हाल देश के सभी बड़े शहरों में देखने को मिलता है. और इस प्रदूषण को बढ़ाने में Traffic Jam ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी. वाहनों से निकलने वाला धुआं…63 फीसदी वायु प्रदूषण की वजह बनता है. कल दिल्ली में PM 2.5 का स्तर करीब 129 तक पहुंच गया था. और ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है, कि अगले एक हफ़्ते में PM 2.5 का Level 200 से 250 तक पहुंच सकता है…और अगर ऐसा हुआ…तो लोगों की सेहत के लिए खतरा पैदा हो सकता है.

मौसम विभाग के अनुसार, 20 अक्टूबर से दिल्लीवालों को परेशान करने वाला Smog भी नज़र आने लगेगा. यानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्से प्रदूषण वाली Emergency का शिकार होने वाले हैं. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदूषण बढ़ने से तापमान बढ़ाने वाली गैसें जमा होने लगती हैं. जिससे तापमान कम नहीं हो पाता. अगर आप सोच रहे हैं, कि ये सिर्फ दिल्ली की तस्वीर है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है.

मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों के कुछ इलाके भी असामान्य रूप से गर्म हैं. शहरों के तापमान में होने वाले इस इज़ाफे को Urban Heat Islands कहा जाता है. दिल्ली , मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, कोच्चि, और चेन्नई जैसे शहरों में Heat Islands की संख्या बढ़ती जा रही है. 

Urban Heat Islands वहां बनते हैं जहां सूरज की गर्मी कैद हो जाती है. इसके साथ ही हरियाली का अभाव और तालाबों, नदियों और झीलों का ना होना.. इस तापमान को और बढ़ाता है. इसके अलावा वाहनों का प्रदूषण और Air Conditioner के इस्तेमाल से भी गर्मी बढ़ती है. जब रात होती है तो यही इमारतें गर्मी छोड़ने लगती हैं. जिससे शहर का तापमान बढ़ जाता है.

Centre for Atmospheric Sciences के मुताबिक दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर तेज़ी से कम हो रहा है. इस शोध के मुताबिक वर्ष 2001 में दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर 12.48 डिग्री सेल्सियस था, जो वर्ष 2011 में घटकर 10.34 डिग्री सेल्सियस रह गया. यही हाल देश के दूसरे शहरों का भी है.

हमें लगता है कि सिर्फ दिवाली के बाद प्रदूषण और बिगड़ते मौसम पर चिंता जताने के बजाय…पूरे वर्ष हमारे सिस्टम को एक मुहिम चलानी चाहिए. अक्सर कहा जाता है कि Say No to Crackers.. लेकिन हम इस Tag Line को बदलकर कहना चाहते हैं Say No to Pollution…ये प्रदूषण की मूल समस्या को देखने का और बड़ा नज़रिया है…क्योंकि अगर हमारा वातावरण प्रदूषित है…तो गर्मी को बढ़ने से कोई नहीं रोक 
अक्टूबर के महीने में देश में गर्मी का अहसास…एक गंभीर संकट की पहचान है. पूरी दुनिया में जब Global Warming की बात होती है तो हम बड़े बड़े उपायों पर चर्चा करने लगते हैं. लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि अगर हमारे शहर कुछ मामलों में तालाबों, नदियों, बावड़ियों और झीलों की प्राचीन व्यवस्था की तरफ लौट जाएं, तो आधी समस्या समाप्त हो जाएगी. और अगर हमने सड़क Jam…और प्रदूषण वाले रावण का वध कर दिया…तो हम सही मायनों में एक स्वच्छ दिवाली मना पाएंगे.

दुनिया में पहली बार पटाखे कहां फोड़े गये थे ? आतिशबाज़ी करने का चलन कहा से शुरु हुआ.. और इसका सही इतिहास क्या है? ये ऐसे सवाल हैं जिन पर आजकल देश भर में चर्चाएं हो रही हैं. इस विषय पर Social Media और तमाम News Channels पर बहसबाज़ी के बम-पटाखे फूट रहे हैं. और बहुत सारे लोग पटाखों के इतिहास को धार्मिक एंगल भी दे रहे हैं.. जिसकी वजह से लोग भ्रमित हो रहे है. इसलिए आज हम आपके लिए पटाखों का एक ऐतिहासिक DNA टेस्ट करेंगे. पटाखों के इतिहास को समझने के लिए हमने बहुत सारी किताबों का अध्ययन किया है. और इस अध्ययन से जो जानकारियां निकली हैं.. वो हम आपके साथ शेयर करना चाहते हैं.

दुनिया के करीब करीब सभी इतिहासकार इस बात पर एकमत हैं कि आतिशबाज़ी या पटाखों की शुरुआत चीन से हुई. आतिशबाजी का मतलब होता है आग का खेल. जब पहली बार चीन में आतिशबाज़ी हुई तो उसमें बारूद का इस्तेमाल नहीं हुआ था. चीन में पहली आतिशबाज़ी कब हुई. इस पर भी इतिहासकारों में मतभेद है. 

Kama आइनहॉर्न की किताब The Explosive Story of Fireworks में लिखा है कि आज से 2 हजार 217 वर्ष पहले चीन में बांस की मदद से आतिशबाज़ी हुई थी.तब इसमें बारूद का इस्तेमाल नहीं किया गया था. बांस में कई तरह की गांठें होती हैं और जब बांस में आग लगाई जाती है तो वो बहुत तेज़ आवाज के साथ फटता है. चीन के लोगों ने इस बात को नोट किया और सबसे पहले इसे ही आतिशबाज़ी के तौर पर इस्तेमाल किया.

आज हम जिन पटाखों का इस्तेमाल करते हैं. उनमें बारूद होता है. बारूद की खोज के बाद आतिशबाज़ी में क्रांतिकारी बदलाव आया.  Michael S Russell की किताब The Chemistry of Fireworks के Page Number 2 पर लिखा है कि  8वीं शताब्दी के आस-पास चीन के रसायन वैज्ञानिकों ने बारूद की खोज की. हालांकि कुछ किताबों में ये भी लिखा गया है कि वर्ष 1044 में चीन में सल्फर, शोरा, आर्सेनिक, तेल और मोम की मदद से बारूद बनाया गया. 

हैरानी की बात ये है कि जिस बारूद की खोज चीन ने की. वही बारूद उसके लिए बहुत बड़ी मुसीबत लेकर आया. चीन के लोग तो बारूद का इस्तेमाल आतिशबाज़ी के लिए करते थे. लेकिन इसी बारूद का इस्तेमाल मंगोल योद्धाओं ने हथियारों के रूप में किया. इस तरह बारूद, युद्ध में इस्तेमाल होने वाला हथियार बन गया. मंगोल योद्धाओं ने चीन पर हमले किए. और बारूद का खूब इस्तेमाल किया. इसके बाद बारूद का प्रयोग मध्य Asia, कोरिया, जापान और पश्चिमी Asia में भी शुरू हो गया. 

अपने Research के दौरान हमने एक और किताब पढ़ी जिसमें आतिशबाज़ी का जिक्र है. इस किताब का नाम है. ‘On the Weapons, Army Organisation, and Political Maxims of the Ancient Hindus’ इस किताब के Page Number 51 पर लिखा है कि West Asia में मंगोल बादशाह हलाकू खान ने वर्ष 1258 में अपने एक दूत को दिल्ली के सुल्तान नसीरुद्दीन महमूद के पास भेजा था. तब सुल्तान के वज़ीर ने हलाकू खान के दूत के स्वागत में खूब आतिशबाज़ी करवाई थी. 

आतिशबाजी का इस्तेमाल युद्ध में भी किया जाता था. इसी किताब के Page Number 50 पर आतिशबाजी से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख है. वर्ष 1398 में तैमूर लंग ने दिल्ली के तुगलक वंश के सुल्तान महमूद पर हमला किया. सुल्तान महमूद की सेना में 10 हजार घोड़े, 40 हजार सैनिक और बहुत सारे हाथी थे. सुल्तान महूमद की योजना थी कि हाथियों को आतिशबाजी की मदद से इस तरह भड़काया जाए ताकी वो तैमूर की सेना को रौंदते हुए आगे चले जाएं.

ये योजना सफल हुई और 50 हाथियों ने तैमूर लंग की सेना को खूब नुकसान पहुंचाया. लेकिन इसके बाद तैमूर लंग ने एक नई तकनीक आज़माई. तैमूर ने हाथियों से मुकाबले के लिए ऊंटों का इस्तेमाल किया. 
और ऊंटों के ऊपर खूब सारी सूखी घास लदवा दी. जब युद्ध शुरू हुआ तो इस घास में अचानक आग लगा दी गई. ऊंटों पर जलती हुई घास देखकर हाथी भाग खड़े हुए.. और इस तरह तैमूर लंग ने आग के खेल की मदद से ये युद्ध जीत लिया था.

दक्षिण भारत में होने वाली आतिशबाज़ी पर भी विदेशी विद्वानों ने बहुत Research किया है. J. R. Partington की किताब ‘A History of Greek Fire and Gunpowder’ के Page Number 227 पर कुछ दिलचस्प बातें लिखी हैं. 

वर्ष 1400 के करीब संस्कृत की एक किताब अक्षय-भैरव-कल्प में बंदूक का जिक्र किया गया है. इस बंदूक को संस्कृत में ‘नलिका’ कहा गया है. किताब में लिखा है कि राजा जिन 32 हथियारों की पूजा करते थे… उनमें से एक थी ‘नलिका’. पूजा के बाद आतिशबाज़ी होती थी. जिसमें अग्निबाण छोड़े जाते थे.

लेखक ने इस अग्निबाण की तुलना Rocket से की है. महाभारत के संदर्भ में भी आपने ऐसे बहुत से अस्त्रों के बारे में भी सुना होगा. कुल मिलाकर आतिशबाज़ी और पटाखों का इतिहास बहुत पुराना है और इसकी कहानियां चीन से लेकर Mongolia और भारत तक फैली हुई हैं. आधुनिक दौर में दिवाली के त्यौहार के साथ पटाखों का गहरा रिश्ता है.. हमें उम्मीद है कि पटाखों से जुड़ी ये जानकारी आपको पसंद आई होगी. हालांकि पटाखों से ज़्यादा ताकत दीयों में होती है. क्योंकि दीयों की रोशनी देर तक बनी रहती है.. और इनसे प्रदूषण भी नहीं होता. आज हमारे पास अयोध्या से दीयों की शानदार तस्वीरें आई हैं. आज अयोध्या में सरयू नदी के किनारे राम की पैड़ी में 1 लाख 71 हज़ार से ज़्यादा दीये जलाए गये हैं. ये अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है. आपको भी इन तस्वीरों का आनंद लेना चाहिए.

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कांग्रेस ने हिमाचल के लिए जारी की 59 उम्मीदवारों की सूची, अर्की सीट से लड़ेंगे वीरभद्र सिंह

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू को नादौन सीट से टिकट दिया गया है.


भाषा | अंतिम अपडेट: Oct 19, 2017, 12:50 AM IST

कांग्रेस ने हिमाचल के लिए जारी की 59 उम्मीदवारों की सूची, अर्की सीट से लड़ेंगे वीरभद्र सिंह

वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य का नाम पहली सूची में नहीं है…(फाइल फोटो)

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वाड्रा मामले को पिछले 41 माह से क्यों लटकाए हुए है सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस ने बुधवार को भाजपा शासित केंद्र एवं राज्य की सरकारों से सवाल किया कि वे रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ विभिन्न आरोपों की जांच को पिछले 41 माह से लटकाए क्यों हुए है. 


भाषा | अंतिम अपडेट: Oct 19, 2017, 12:27 AM IST

वाड्रा मामले को पिछले 41 माह से क्यों लटकाए हुए है सरकार: कांग्रेस

फाइल फोटो

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फैजाबाद का बदलेगा नाम, कहलाएगा अयोध्या धाम: केशव प्रसाद मौर्य

 उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को ऐलान किया कि फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या धाम किया जाएगा. 


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: Oct 18, 2017, 08:59 PM IST

फैजाबाद का बदलेगा नाम, कहलाएगा अयोध्या धाम: केशव प्रसाद मौर्य

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य. फाइल तस्वीर

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तस्वीरों में देखें अयोध्या का दिवाली उत्सव का विहंगम दृश्य, ‘पुष्पक विमान’ से पहुंचे देवी सीता-राम

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में धूमधाम के साथ दिवाली मनाई गई. यूपी सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में रामचरित मानस में वर्णित कथा के अनुरूप दृश्य को एक बार फिर से दोहराने की कोशिश की गई. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाइक ने भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की अगवानी की. उनकी आरती उतारी. भगवान राम, सीता और लक्ष्मण पुष्पक विमान रूपी हेलिकॉप्टर से अयोध्या में पहुंचे. ठीक वैसे ही जब लंका में रावण का वद्ध कर तीनों अयोध्या पहुंचे थे और अयोध्या वासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था. हेलिकॉप्टर के अयोध्या में लैंड करते ही उनपर फूलों की बारिश की गई. सीएम योगी खुद अयोध्या राजघराने के गुरु विश्वामित्र की भूमिका निभाते हुए राम, सीता और लक्ष्मण की आरती उतारकर उनका स्वागत किया.

Ayodhya Diwali

करीब 1.5 लाख दीयों से अयोध्या को प्रकाशित कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का भी कार्यक्रम है. रावण के वध के बाद भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण सहित जब अयोध्या लौटे थे तो सरयू नदी के तट से होकर गए थे. इस उपलक्ष्य में अयोध्यावासियों ने सरयू के तट पर दीप जलाए थे. मुख्यमंत्री योगी ने उसी रीति को दोहराया.

Ayodhya Diwali

सरयू किनारे रामकथा पार्क में राज्यपाल राम नाईक, सीएम योगी आदित्यनाथ आदि ने इन सभी की आरती उतारी. भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ अयोध्या के रामकथा पार्क पहुंचे.

Ayodhya Diwali

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यहां योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम और सीता को माला पहनाकर और आरती उतारकर उनका स्वागत किया. इस दौरान मंत्री रीता बहुगुणा जोशी भी मौजूद रहीं.

Ayodhya Diwali

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पूरे अयोध्या में उत्सव का माहौल है. हर कोई रामचरित मानस में लिखित कथा को साक्षात रूप में दर्शन कर रहे हैं.

Ayodhya Diwali

ayodhya diwali

इस आयोजन में अयोध्या के अलावा आसपास के जिले के भी लोग भारी संख्या में पहुंचे हैं.

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पीएम मोदी से मजबूत रिश्ते, दिवाली मनाते हुए मुझे गर्व हो रहा है: डोनाल्ड ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने मजबूत रिश्तों को काफी अहमियत देते हैं. 


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: Oct 18, 2017, 02:32 PM IST

पीएम मोदी से मजबूत रिश्ते, दिवाली मनाते हुए मुझे गर्व हो रहा है: डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिक के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपनी पहली दिवाली मनाई

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