Monthly Archives: April 2017

भारत की यात्रा पर पहुंचे तुर्की राष्ट्रपति इर्दोगान, मोदी से करेंगे बातचीत

नई दिल्ली: तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब तैयब इर्दोगान रविवार को यहां पहुंचे और सोमवार को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत के एनएसजी सदस्यता प्राप्त करने की कोशिश और आतंकवाद-निरोध एवं व्यापार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूती देने के विकल्पों समेत प्रमुख द्विपक्षीय और क्षेत्रीय हितों के व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. इस महीने की 16 तारीख को विवादित जनमत संग्रह के बाद इर्दोगान का यह पहला विदेश दौरा है. इस जनमत संग्रह से उनकी कार्यकारी शक्तियों में इजाफा हुआ है. तुर्की के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी एमीन इर्दोगान, मंत्रिमंडल के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और 150 सदस्यों का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जो भारत-तुर्की व्यापारिक फोरम की एक बैठक में हिस्सा लेगा.

इर्दोगान की यात्रा से पहले भारत ने तुर्की और पाकिस्तान के बीच नजदीकी के साथ ही जम्मू कश्मीर पर अंकारा के बयानों को तवज्जों नहीं देने का प्रयास किया और कहा कि सरकार इससे अवगत है कि तुर्की का पाकिस्तान के साथ बहुत नजदीकी संबंध है और यह उनका द्विपक्षीय मामला है. विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) रूचि घनश्याम ने कहा, हमने हमेशा ही इस बात पर जोर दिया है कि भारत-तुर्की संबंध अपने बल पर कायम है और हमारा मानना है कि तुर्की पक्ष हमारी भावनाओं को साझा करता है. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पर भारत का यह रूख बहुत अच्छी तरह से ज्ञात है कि यह देश का अभिन्न हिस्सा है.

यद्यपि यह पूछे जाने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया कि क्या भारत यह मुद्दा उठाएगा. ऐसे में कि तुर्की परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का एक सदस्य है भारत का इस समूह की सदस्यता के लिए दावेदारी दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत के दौरान उठने की उम्मीद है. यह पूछे जाने पर कि क्या भारतीय पक्ष बातचीत के दौरान देश के एनएसजी की दावेदारी का मुद्दा उठाएगा, रूचि ने कहा, हम तुर्की के साथ सम्पर्क में रहेंगे. राजनयिक सूत्रों ने कहा कि तुर्की सीधे तौर पर भारत की एनएसजी की सदस्यता की दावेदारी के खिलाफ नहीं है लेकिन उसका कहना है कि इस शक्तिशाली समूह को ऐसी व्यवस्था के साथ सामने आना चाहिए जिसमें ऐसे देशों के प्रवेश पर विचार हो जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जो कि पाकिस्तान के मामले के भी पक्ष में है.

तुर्की के राष्ट्रपति इर्दोगान की यहां की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा किये जाने की उम्मीद है. इर्दोगान को सत्ता से बेदखल करने के लिए गत वर्ष जुलाई में एक असफल तख्तापलट के बाद तुर्की ने इसके लिए फतहुल्ला गुलेन टेरर्रिस्ट आर्गेनाइजेशन (एफईटीओ) को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि संगठन ने भारत में भी पैठ बना ली है. तुर्की ने भारत से संगठन के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी कहा था. भारत की ओर से अभी तक की गई कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर रूचि ने कहा कि तुर्की ने उसे सरकार के समक्ष उठाया था जिसने उनकी चिंता पर गौर किया था.

तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोगलू ने गत वर्ष यहां की अपनी एक यात्रा के दौरान एफईटीओ को एक गोपनीय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क बताया था जिसकी विश्वभर में मौजूदगी है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से एफईटीओ ने संगठनों और स्कूलों के जरिये भारत में भी पैठ बना ली है. मोदी और इर्दोगान के बीच बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया, विशेष तौर पर सीरिया में क्षेत्रीय सुरक्षास्थिति पर चर्चा होने की उम्मीद है.

 

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नक्सलियों के खिलाफ आखिरी जंग!

Today Hindi News: सुकमा में नक्सलियों के हमले में CRPF के 25 जवानों की शहादत के बाद केंद्र सरकार ने नक्सलियों को उनके ही मांद में घुसकर मुंहतोड़ जवाब देने का फैसला किया है। इस संबंध में 2 मई को राज्य के आला अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करेंगे। आईजी विवेकानंद सिन्हा ने कहा, नक्सलियों के खिलाफ पलटवार और नई रणनीति के लिए 2 मई को रायपुर में आला अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में विडियो काॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद होंगे।

आईजी सिन्हा ने कहा, ‘बस्तर में तैनात फोर्स को सड़क निर्माण से हटाकर नक्सल इलाकों में भेजा गया है। फोर्स अब रोड ओपनिंग नहीं करेगी। सीधे नक्सलियों से मोर्चा लेगी। फोर्स लगातार अंदरूनी इलाकों में गश्त कर रही है। ऑपरेशन क्लीन चलाकर अटैक की रणनीति पर काम किया जा रहा है।’

आईजी सिन्हा ने कहा, ‘मैं अभी बीजापुर में हूं। यहां आंतरिक सुरक्षा सलाहकार विजय कुमार बस्तर पहुंच गए हैं। डीजी नक्सल ऑपरेशन के साथ जिला मुख्यालयों में फोर्स के साथ बैठक हो रही है। नक्सलियों को उनके ही मांद में घुसकर मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।’ आईजी सिन्हा ने बताया, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री रमन सिंह से बस्तर के ताजा हालात की जानकारी ली है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को नक्सल समस्या को हैंडल करने का निर्देश दिया है। उनके ही निर्देश पर आंतरिक सुरक्षा सलाहकार विजय कुमार, जिन्होंने चंदन तस्कर वीरप्पन को मार गिराया था, उन्हें और डीजी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी को बस्तर में रहकर केंद्रीय बल और राज्य पुलिस बल को नक्सलियों पर हमले तेज करने और आपसी तालमेल बनाकर हर हाल में नक्सली नेटवर्क पर अंकुश लगाने को कहा गया है।’

आईजी सिन्हा ने कहा, ‘आगामी 2 मई को अजीत डोभाल नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से बस्तर और राज्य के आला अफसरों से नक्सलवाद के संदर्भ में चर्चा करेंगे, जिसके लिए अफसरों का जमावड़ा राजधानी में होगा। कॉन्फ्रेंस में खासकर बस्तर के आईजी, डीआईजी सहित सभी 7 जिले के कलेक्टर, एसपी को रायपुर बुलाया गया है। इसके अलावा सीआरपीएफ और भारत तिब्बत सीमा पुलिस के अफसर भी बैठक में शामिल होंगे।’

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चुनाव आयोग ने कहा, ‘वोटर्स को घूस देने वाले आरोपित उम्मीदवारों की सदस्यता रद्द की जाए’

नई दिल्ली: मतदाताओं को लुभाने को लेकर जो उम्मीदवार आरोपपत्रों में नामजद हैं, चुनाव आयोग जल्द ही सरकार को उनकी सदस्यता पांच साल तक के लिए रद्द करने को कहेगा. तमिलनाडु विधानसभा उपचुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए नए तरीकों के पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है.

आयोग में मौजूद सूत्रों ने बताया कि चुनाव निगरानी संस्था ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में बदलाव की मांग करते हुए कानून मंत्रालय को पत्र लिखने का फैसला किया है. इसके पीछे यह उद्देश्य है कि अदालत में किसी उम्मीदवार के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने के बाद उसे पांच साल तक के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया जाए. इस महीने की शुरुआत में आयोग ने जब पाया कि आरके नगर विधानसभा उपचुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन का इस्तेमाल किया गया, तब आयोग ने उपचुनाव अनिश्चित काल के लिए रद्द कर दिया था. उपचुनाव 12 अप्रैल को होना था. जे जयललिता की मृत्यु के बाद तमिलनाडु विधानसभा की इस सीट पर उपचुनाव कराने की जरूरत पड़ी थी.

अपने लंबे आदेश में आयोग ने इस बात की ओर इशारा किया था कि राजनीतिक पार्टियों और उनके शीर्ष नेताओं ने आरके नगर विधानसभा उपचुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल किया ताकि चुनाव खर्च पर नजर रख रहे कानून प्रवर्तन अधिकारियों को चकमा दिया जा सके. दरअसल, मतदाताओं को लुभाने के लिए नकद, उपहार, टोकन, प्रीपेड फोन रिचार्ज कूपन, अखबारों का सब्सक्रिप्शन, दूध का टोकन, बैंक खातों में धन का अंतरण और यहां तक कि मोबाइल नंबरों पर मोबाइल वैलेट भुगतान करने की शिकायतें चुनाव आयोग को मिली थी.

इससे पहले, चुनाव आयोग ने सरकार से चुनाव कानून के तहत वह शक्तियां देने के लिए कहा है जहां वह धन के इस्तेमाल वाले चुनाव को रद्द कर सके. अभी, आयोग सिर्फ बाहुबल के इस्तेमाल वाले चुनाव को रद्द कर सकता है. यह धन बल का इस्तेमाल होने पर किसी चुनाव को अनुच्छेद 324 के तहत अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर रद्द कर सकता है, लेकिन यह चाहता है कि यह शक्ति कानून के तहत निहित की जाए. तर्क यह है कि यह अपनी संवैधानिक शक्तियों का अक्सर इस्तेमाल नहीं करना चाहता.

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…जब बाबा रामदेव ने स्कूल छोड़ा, घर से भागे और चले गए गुरुकुल

नई दिल्ली: बचपन में रामदेव दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं से इतना प्रभावित हुए थे कि उन्होंने सरकारी स्कूल को अलविदा कह दिया, घर से भाग गए और गुरुकुल में दाखिला ले लिया. दरअसल, 1875 में लिखी दयानंद सरस्वती की किताब ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का रामदेव पर गहरा असर पड़ा था.

सरस्वती के इसी प्रभाव के कारण रामदेव कभी फोन पर हेलो नहीं कहते. इसके बजाय वह ú का जाप करते हैं. सत्यार्थ प्रकाश के पहले अध्याय में ú की व्युत्पत्ति और महत्व पर प्रकाश डाला गया है. इस किताब को पढ़ने के बाद रामदेव प्राचीन ऋषियों के नक्शे कदम पर चलने की कोशिश करने लगे. कौशिक डेका ने अपनी किताब ‘द बाबा रामदेव फेनोमेनन: फ्राम मोक्ष टू मार्ट’ में बताया कि चूंकि प्राचीन ऋषि ब्रह्मचर्य का पालन करते थे, तो उन्होंने कभी शादी नहीं करने का प्रण किया.

डेका की किताब के अनुसार रामदेव ने बताया, ‘इस किताब ने मेरे लिए एक नई दुनिया के द्वार खोल दिए. इसने मेरे अंदर जागरण ला दिया, मुझे जीने का एक मकसद दिया. मैं प्राचीन ऋषियों के दिखाए रास्ते पर चलना चाहता था. उन्होंने कहा, वह (रामदेव) जानते थे कि उनके मां-बाप नियमित स्कूल छोड़ने के उनके फैसले से कभी सहमत नहीं होंगे जहां वह बहुत अच्छा कर रहे थे. इसलिए एक सुबह वह घर से भाग गए और हरियाणा के खानपुर में वैदिक उसूलों पर आधारित एक गुरुकुल में नाम लिखा लिया.

रामदेव ने बताया, दयानंदजी ने मुझे वैदिक शिक्षा में छिपे खजाने का एहसास दिलाया. यह ‘तर्क’, ‘तथ्य’, ‘युक्ति’ और ‘प्रमाण’ पर आधारित एक प्रगतिशील रूख था जबकि ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का लक्ष्य हमारे दिमाग को गुलाम बनाना और हमारी तर्कसंगत सोच को कुंद करना था.

 

 

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कांग्रेस ने क़तर दिए दिग्विजय के पर

Today Hindi News: गोवा में सरकार नहीं बना पाने का ख़ामियाज़ा आखिरकार दिग्विजय सिंह को भुगतना पड़ा. कांग्रेस ने उनके पर कतरते हुए उन्हें गोवा और कर्नाटक के प्रभारी के पद से हटा दिया है. इस पर प्रतिक्रया देते हुए दिग्विजय ने कहा, वे बदलाव से खुश हैं और वे नेहरू-गांधी परिवार के वफादार हैं.

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं. आखिरकार यह नई टीम राहुल द्वारा चुनी गई है. गोवा और कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करते हुए मुझे बहुत मजा आया. उन सबके सहयोग के लिए मैं उनका आभारी हूं. मैं कांग्रेस पार्टी और नेहरू-गांधी परिवार का वफादार हूं. मैं पार्टी में आज जो कुछ भी हूं, वह सबके उन्हीं की वजह से है.’

गोवा मेंबीजेपी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के विधायक पार्टी छोड़ रहे हैं. कुछ दिन पहले ही विश्वजीत राणे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये, बीजेपी ने उन्हें मंत्री पद से नवाजा है. दिग्विजय सिंह पर चुटकी लेते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था, ‘आपकी फिल्म चल पड़ती अगर आपके हीरो रात भर नहीं सोते. आपको हीरो सोते रहे तो मुझे क्यों खलनायक बना रहे हो.’

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VIDEO : गौतम गंभीर का ऐलान, IPL-10 में मिलने वाला सारा पैसा शहीदों के नाम

नई दिल्ली : हाल ही में छत्तीसगढ़ के सुकमा में शहीद हुए जवानों की मदद के लिए कोलकाता नाइटराइडर्स के कप्तान क्रिकेटर गौतम गंभीर आगे आए हैं. गौतम गंभीर ने जब सुकमा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 25 जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की तो देश ने उनके इस जज्बे की तारीफ की. गौतम गंभीर के इस जज्बे का हर कोई मुरीद हो गया है. हर कोई गंभीर की तारीफ कर रहा है. आम जनता से लेकर नेता, खिलाड़ी और बॉलीवुड स्टार भी गौतम गंभीर की इस पहल की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं.  

सुकमा शहीदों की ‘गंभीर’ मदद के मुरीद हुए योगी आदित्यनाथ, कहा- देश को आप पर गर्व

केकेआर के कप्‍तान गौतम गंभीर ने आईपीएल 10 में मिलने वाली पुरस्‍कार राशि को सुकमा हमले के शहीदों के परिवारवालों को देने का ऐलान किया है. 28 अप्रैल को दिल्‍ली डेयरडेविल्‍स के खिलाफ मैच के बाद पोस्‍ट मैच प्रजेंटेशन के दौरान मैन ऑफ द मैच चुने जाने के बाद उन्‍होंने कहा कि वह यह पुरस्‍कार राशि शहीदों के परिवारों को देते हैं. उन्‍होंने कहा, ”अभी तक मैंने जो भी कमाया है (इस आईपीएल में) और जो भी अवार्ड जीतूंगा, सारा पैसा सुकमा में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों को जाएगा.” 

गौतम गंभीर हैं देश के असली ‘बाहुबली’, सुकमा शहीदों के परिवारों के नाम की ‘मैन ऑफ द मैच’ की राशि

बता दें कि छत्‍तीसगढ़ के सुकमा में नक्‍सली हमले में 25 जवान शहीद हो गए थे. गंभीर ने आगे बताया, ”मेरा मानना है कि मुझे भारतीय होने पर गर्व है और मैं इसके लिए योगदान करना चाहता हूं और उम्‍मीद है कि सभी ऐसा करेंगे. वे हमारे लिए अपनी जान देते हैं. उम्‍मीद करता हूं कि हम इतना तो उनके लिए कर ही सकते हैं.”

इससे पहले भी गंभीर ने सुकमा के शहीदों के बच्‍चों की जिम्‍मेदारी उठाने की बात कही थी. उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स के एक कॉलम में लिखकर कहा है कि वे सुकमा में शहीद हुए 25 CRPF जवानों के बच्चों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने को तैयार हैं. गंभीर ने लिखा है कि बुधवार सुबह जब उन्होंने अखबार पढ़ा तो उनकी नजरें 2 तस्वीरों पर पढ़ी, जिनमें एक में एक तस्वीर में एक बच्ची अपने शहीद पिता को सलामी दे रही थी तो दूसरी तस्वीर में शहीद की पत्नी को उसके रिश्तेदार संभालते हुए नजर आ रहे थे. इन दो तस्वीरों को देखकर गौरम गंभीर काफी परेशान हुए और उन्होंने सभी जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने का ऐलान कर दिया है.

सुकमा में शहीद CRPF जवानों के बच्चों की मदद के लिए गौतम का ‘गंभीर’ कदम, उठाएंगे पढ़ाई का खर्च

इन बच्चों की पढ़ाई का खर्चा गौतम गंभीर फाउंडेशन उठाएगा. गंभीर ने कहा है कि उन्होंने कहा उनकी टीम ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है और जल्दी ही वे इस पर हुई प्रगति से अवगत कराएंगे. गंभीर ने बताया कि वे इस खबर को पढ़कर इतने आहत हुए कि वे मैच में ध्यान नहीं दे पा रहे थे. गौरतलब है कि बुधवार रात को राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स के खिलाफ मैच में गंभीर ने कलाई में काली पट्टी लगाकर सीआरपीएफ जवानों को सम्मान दिया.

अक्षय कुमार का आइडिया हुआ ‘सुपरहिट’, सुकमा शहीदों के लिए दिल खोलकर मिल रही मदद

सोमवार को हुआ था सुकमा में हमला

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार दोपहर 12.25 बजे सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन पर नक्सलियों ने हमला किया. फायरिंग में 25 जवान शहीद हो गए थे. चिंतागुफा और बुरकापाल के करीब सड़क बनाई जा रही है. सीआरपीएफ की पेट्रोल पार्टी को यहां सिक्युरिटी में लगाया गया था. करीब 300 नक्सलियों ने उन पर घात लगाकर हमला किया. सीआरपीएफ अफसर के मुताबिक पेट्रोल पार्टी में 99 जवान थे.

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दिग्विजय सिंह पर गिरी गाज, कांग्रेस ने गोवा और कर्नाटक के प्रभारी पद से हटाया

नई दिल्ली: गोवा विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद राज्य में सरकार नहीं बना पाने के कुछ हफ्तों बाद शनिवार (29 अप्रैल) को कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से गोवा के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी वापस ले ली. जबकि संगठन में कुछ अन्य बदलाव भी किये गये हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार दिग्विजय सिंह से न केवल गोवा बल्कि कर्नाटक के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी भी वापस ले ली गयी है. 

विस चुनाव के बाद ही चल रही थी कवायद 
पार्टी में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद संगठन स्तर पर बदलाव की प्रक्रिया को लेकर कई दिन से अटकलों का बाजार गर्म था. पार्टी के भीतर फेरबदल की शुरुआत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एआईसीसी सचिव ए चेला कुमार को पार्टी ने गोवा का प्रभार सौंपा. पार्टी ने के सी वेणुगोपाल को कर्नाटक का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है. 

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 में
कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है तथा पार्टी राज्य में फिर से सत्ता हासिल करने की तैयारियों में जुटी है. कर्नाटक में एम टैगोर, पी सी विश्वनाथ, मधु यक्षी गौड़ा और डा. एस सज्जीनाथ को भी राज्य में पार्टी प्रभारी सचिव की जिम्मेदारी दी गई है. अमित देशमुख को गोवा का प्रभारी सचिव बनाया गया है. इसके अलावा पार्टी ने केन्द्रीय चुनाव प्राधिकार का गठन कर मुल्लापल्ली रामचन्द्रन को इसका अध्यक्ष बनाया है. भुवनेश्वर कालिता और मधुसूदन मिस्त्री को इस प्राधिकार का सदस्य बनाया गया है.

और पढ़ें : पर्रिकर ने कहा- दिग्विजय सिंह का ‘शुक्रिया’, आप गोवा में घूमते रहे और मैंने सरकार बना ली

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि इस केन्द्रीय चुनाव प्राधिकार की सलाहकार समिति में सांसद शमशेर सिंह ढुल्लों, बीरेन सिंह एंगती और पूर्व सांसद अश्क अली टाक को सदस्य बनाया गया है. मिस्त्री इस प्राधिकार का सदस्य बनने के बाद संगठन के किसी अन्य पद पर नहीं रहेंगे. वर्तमान में मिस्त्री पार्टी महासचिव हैं.

गोवा में नहीं बन सकी थी कांग्रेस, की सरकार
उल्लेखनीय है कि गोवा में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस सरकार बनाने का दावा समय पर नहीं कर पायी और इस मामले में भाजपा अपना दावा पेश कर सरकार बनाने में कामयाब रही थी.

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फारूक अब्दुल्ला बोले, अलगाववादियों से वार्ता नहीं करना जम्मू-कश्मीर के लिए ‘घातक’

श्रीनगर: विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों से वार्ता नहीं करने के केंद्र के निर्णय पर शनिवार (29 अप्रैल) को चिंता जताई और कहा कि राज्य के भविष्य के लिए यह नीति ‘विनाशकारी’ हो सकती है. पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘उच्चतम न्यायालय में केंद्र का यह हलफनामा कि वह अलगाववादियों से वार्ता नहीं करेगा, जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए विनाशकारी है. हम इस रुख पर चिंता और दुख जताते हैं.’ 

कश्मीर समाधान के लिए वार्ता ही रास्ता

कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए वार्ता को ‘एकमात्र रास्ता’ बताते हुए अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता जल्द बहाल होने की अपील करते हुए कहा कि ‘बम और गोलियों से समाधान नहीं होगा.’ 

भारत-पाक संबंध कश्मीर के लिए जरूरी

लोकसभा सदस्य ने भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ताना संबंधों के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि अच्छे संबंध न केवल दोनों पड़ोसी देशों के लिए अच्छे हैं, बल्कि कश्मीर के समाधान के लिए और दोनों तरफ कश्मीरियों की रक्षा के लिए भी जरूरी है.

पीडीपी पर बरसे अब्दुल्ला

पीडीपी की आलोचना करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘अगर यह गंभीर होती तो महबूबा मुफ्ती ने कुर्सी ठुकरा कर उच्चतम न्यायालय में केंद्र के हलफनामे का विरोध किया होता. मुख्यमंत्री पद छोड़ना तो दूर पीडीपी केंद्र की नीतियों के खिलाफ मुंह तक नहीं खोल सकती.’

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जेएनयू प्रोफेसर: शहीद जवानों की मौत पर शोकसभा करने पर मेरी कार में तोड़फोड़, घर पर पथराव

नयी दिल्ली: जेएनयू के एक सहायक प्रोफेसर ने शनिवार (29 अप्रैल) को आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनकी कार में तोड़-फोड़ की और सुकमा तथा कुपवाड़ा में जवानों की मौत पर शोक प्रकट करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर उनके घर पर पथराव किया गया.

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बुद्धा सिंह ने अपने ट्वीट में कहा, ‘मेरी कार में तोड़फोड़ की गई और मध्यरात्रि में मेरे घर पर पथराव किया गया. ऐसा जेएनयू में सुकमा और कुपवाड़ा के शहीदों की याद में शोक सभा का आयोजन करने के पुरस्कार स्वरूप हुआ.’’ अपने ट्वीट में उन्होंने अपनी कार के क्षतिग्रस्त शीशे की तस्वीर भी डाली है.

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सिंह ने कहा, ‘मैंने पेरियार हॉस्टल के निकट अपनी कार पार्क की थी, जो छात्र संघ कार्यालय के सामने है. मुझे किसी पर संदेह नहीं है, लेकिन मैंने वसंत कुंज थाने में मामला दायर किया है.’ जेएनयूएसयू ने एक वक्तव्य में कहा कि सिंह सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं.

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‘भाजपा शौहर-बीबी के बीच वोट बैंक कायम करने की कोशिश से बाज आये’

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीन तलाक मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने शनिवार (29 अप्रैल) को कहा कि भाजपा को मुस्लिम पति-पत्नी के बीच इस मुद्दे को लेकर वोट बैंक कायम करने की कोशिश से बाज आना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीन तलाक मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की नसीहत देने के लिए उनको आड़े हाथ लते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा जिस तीन तलाक का राजनीतिकरण कर रही है, उसे कोई सही नहीं कह सकता है. कुरान में तलाक की एक बहुत लंबी प्रक्रिया है.

उन्होंने कहा, ‘हजारों सालों से हमारा देश और समाज बन रहा है. इसमें कुछ गलत बातें आती रहती हैं जैसे सती प्रथा. समाज स्वयं इनको दूर करता है. इस्लाम में भी समय के साथ कुछ तब्दीलियां आयी. इसे लेकर समाज में सोच-विचार चल रहा है. जो अच्छी और इस्लाम के अनुरूप चीजें हैं वे रहेंगी और जो बुरी हैं वे समय के साथ धीरे धीरे खत्म हो जाएंगी.’ 

आजाद ने कहा, ‘जब समाज इस पर पहले से ही चर्चा कर रहा है, मुद्दा अदालत के समक्ष विचाराधीन है तो ऐसे में भाजपा को बेकार में मुस्लिम शौहर एवं बीबी के बीच में नया वोट बैंक बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.’ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने कहा है कि इसका राजनीतिकरण मत करिये. मैं कहना चाहूंगा कि स्वयं प्रधानमंत्री ही राजनीतिकरण करने के सबसे बड़े चैंपियन हैं. शुरुआत उन्होंने की. यह कहना भी इस मामले का राजनीतिकरण मत कीजिये, स्वयं मामले का राजनीतिकरण करना है.’ 

आजाद ने कहा, ‘इस मुद्दे का राजनीतिकरण कौन कर रहा है. इस बारे में आपने अन्नाद्रमुक, द्रमुक, जदयू, बीजद, सपा, बसपा या कांग्रेस के किसी नेता से कोई बात सुनी है क्या. हिन्दुस्तान में इतनी पार्टी और नेता हैं, किसी एक का नाम ले दीजिए जिसने इस मामले में पहल की हो.’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा के नेता और आरएसएस के कार्यकर्ता 24 घंटे चुनाव से पहले से ही इस एजेंडा का राजनीतिकरण कर रहे थे. ‘सबसे पहले तो माननीय प्रधानमंत्रीजी, आप बाकी लोगों को नसीहत न दें. आप अपने और अपनी पार्टी पर नियंत्रण करें.’ 

कांग्रेस नेता ने कहा कि कोई भी मुसलमान कुरान में कही गयी बात से अलग नहीं जा सकता. चलते फिरते तीन तलाक देने की बात को कोई भी मुसलमान अच्छा नहीं मानता और मान भी नहीं सकता. यह शरीयत, कुरान और इस्लाम के खिलाफ है. प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार (29 अप्रैल) मुस्लिमों से अपील की कि वे तीन तलाक को राजनैतिक नजरिये से नहीं देखें और विश्वास जताया कि इस प्रथा को खत्म करने के प्रयासों का नेतृत्व समुदाय के ‘प्रबुद्ध’ सदस्य करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि तीन तलाक के मुद्दे को राजनैतिक नजरिये से नहीं देखें. आगे आएं और समाधान ढूंढें. उस समाधान का अपना गौरव होगा और पीढ़ियां आपको याद करेंगी.’ मोदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि समाज से शक्तिशाली लोग उभरेंगे और इस पुरातन प्रथा को समाप्त करने में मदद करेंगे और आधुनिक व्यवस्था विकसित करेंगे.

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