Monthly Archives: April 2017

ईवीएम पर संदेहों को दूर करने के लिए सभी दलों की बैठक बुलाएगा EC

चंडीगढ़ : हाल के चुनावों में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर हुए विवाद और शिकायतों को दूर करने के लिए चुनाव आयोग जल्द ही सभी पार्टियों के साथ बैठक करने वाला है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं.

ईवीएम के इस्तेमाल पर और पारदर्शिता लाएगा ईसी

मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने शनिवार को कहा कि आयोग का इरादा आने वाले चुनावों में ‘वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपीएटी) का उपयोग कर चुनाव प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता लाने तथा लोगों का भरोसा बढ़ाने का है. गौरतलब है कि वीवीपीएटी से एक पर्ची निकलती है जिसे देख कर मतदाता यह सत्यापित करता है कि ईवीएम में उसका वोट उसी उम्मीदवार को गया है जिसके नाम के आगे का उसने बटन दबाया है.

‘छेड़छाड़ से मुक्त और सुरक्षित हैं ईवीएम’

जैदी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम जल्द ही एक सर्वदलीय बैठक करेंगे जिसमें उन्हें बताया जाएगा कि हमारी ईवीएम हमारी प्रशासनिक एवं तकनीकी सुरक्षा प्रणाली के मुताबिक किस तरह से छेड़छाड़ से मुक्त और सुरक्षित हैं.’उन्होंने ईवीएम के खिलाफ विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के आरोपों के बारे में सवालों का जवाब देते हुए यह कहा. हाल ही में 16 विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से मतदान पत्र (बैलेट पेपर) व्यवस्था की ओर लौटने का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि ईवीएम में लोगों का विश्वास खत्म हो गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की योजना इस सिलसिले में एक ‘चुनौती’ का आयोजन करने की है जिसके समय को लेकर विचार किया जा रहा है.

समझा जाता है कि चुनाव आयोग एक खुली चुनौती देकर किसी से भी यह कहने वाला है कि वह ईवीएम के दुरूपयोग के संदेह को दूर करने के लिए उसे हैक करने की कोशिश कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि आयोग ने चुनाव में उपयोग के लिए वीवीपीएटी मशीनों की आपूर्ति के लिए आदेश दिया है.

15 लाख वीवीपीएटी की आपूर्ति का ऑर्डर

जैदी ने बताया, ‘वीवीपीएटी के लिए हमने सारा धन प्राप्त कर लिया है. हमने दो सार्वजनिक उपक्रमों – भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपारेशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) को 15 लाख वीवीपीएटी की आपूर्ति को लेकर आर्डर दिया है.’उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सितंबर 2018 तक करीब 15 लाख वीवीपीएटी मशीनें तैयार हो जाएंगी. आयोग का लक्ष्य सभी आगामी चुनावों में वीवीपीएटी का उपयोग करने का है. 

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Petrol पंपों पर पेट्रोल चोरी से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके!

नई दिल्ली: लखनऊ में कई पेट्रोल पंपों पेट्रोल चोरी का खुलासा हुआ है. यूपी एसटीएफ ने छापे मारकर तेल की चोरी के गोरखधंधे को बेनकाब किया था बताया जा रहा है कि लखनऊ का केस तो एक बानगी है पूरे देश में तमाम पेट्रोल पंपों पर ग्राहक रोज ही ठगे जाते हैं और पूरा पैसा देने पर भी आपको कम पेट्रोल मिलता है.

आपको हम कुछ ऐसे TIPS बताते हैं ऐसे तरीके जिनसे आप इस ठगी से बच सकते हैं-

1-गाड़ी की टंकी को न रखें खाली

गाड़ी की खाली टंकी में पेट्रोल भरवाने से ग्राहक को नुकसान होता है. इसकी वजह यह है कि आपकी गाड़ी की टंकी जितना खाली रहेगी, उसमें हवा उतनी ही अधिक रहेगी. ऐसे में पेट्रोल भरवाने के बाद हवा के कारण पेट्रोल की मात्रा घट जाती है.कम से कम आधा टंकी हमेशा भरा रखें. 

2-चेक करते रहें माइलेज

पेट्रोल चुराने के लिए पंप मालिक अक्सर पहले से ही मीटर में हेराफेरी करते हैं. जानकारों के मुताबिक देश में कई पेट्रोल पंप अब भी पुरानी तकनीक पर चल रहे हैं जिसमें हेराफेरी करना बेहद आसान है. आप अलग-अलग पेट्रोल पंपों से तेल डलवाएं और अपनी गाड़ी की माइलेज लगातार चेक करते रहें.

और पढ़ें: Zee जानकारी : लखनऊ के पेट्रोल पंपों पर चिप के जरिए चल रहा था गोरखधंधा

3-डिजिटल मीटर वाले पेट्रोल पंप से लें पेट्रोल और डीजल

पेट्रोल हमेशा डिजिटल मीटर वाले पंप पर ही भरवाना चाहिए. इसका कारण यह है कि पुराने पेट्रोल पंप पर मशीने भी पुरानी होती है और इन मशीनों पर कम पेट्रोल भरे जाने की डर अधिक रहता है.

4- मीटर रीडिंग करते रहें चेक

पेट्रोल पंप की मशीन में जीरो तो आपने देख लिया, लेकिन रीडिंग किस अंक से शुरू हुआ, यह नहीं देखा. आपको यह ध्यान रखना होगा कि मीटर की रीडिंग सीधे 10, 15 या 20 अंक से शुरू होती है. मीटर की रीडिंग कम से कम 3 से स्टार्ट होना चाहिए.

ये भी पढ़ें: लखनऊ के सात पेट्रोल पम्पों पर STF का छापा, 1 लीटर की जगह मिल रहा था 900 मिली तेल

5- मीटर रीसेट करवाना जरुर रखें याद

कई पेट्रोल पंपों में कर्मचारी आपकी बताई रकम से कम पैसे का तेल भरते हैं. टोकने पर ग्राहकों से कहा जाता है कि मीटर को जीरो पर रीसेट किया जा रहा है. 
लेकिन अगर आप चूके तो अक्सर ये मीटर जीरो पर नहीं लाया जाता है. इसलिए ये जरूरी है कि आप तेल भरवाते वक्त सुनिश्चित करें कि पेट्रोल पंप मशीन का मीटर जीरो पर सेट है.

6- गाड़ी से नीचे उतरकर ही भरवायें 

ज्यादातर लोग जब अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाते हैं, तो वे गाड़ी से नीचे नहीं उतरते. इसका फायदा पेट्रोल पंप के कर्मचारी उठाते हैं. पेट्रोल भरवाते समय वाहन से नीचे उतरें और मीटर के पास खड़े हों.

7- ध्यान रखे कि पाइप में बचा ना रहे पेट्रोल

आपने देखा होगा कई पेट्रोल पंपों पर तेल भरने की पाइप को लंबा रखा जाता है. कर्मचारी पेट्रोल डालने के बाद ऑटो कट होते ही फौरन नोजल गाड़ी से निकाल लेते हैं. इस वजह से पाइप में बचा हुआ पेट्रोल हर बार टंकी में चला जाता है. इस बात पर जोर दें कि ऑटो कट होने के कुछ सेकेंड बाद तक पेट्रोल की नोजल आपकी गाड़ी की टंकी में रहे ताकि पाइप में बचा पेट्रोल भी उसमें आ जाए.

8-कहीं दबा तो नहीं रह गया नोजल का बटन?

पेट्रोल पंप वाले से कहें कि वो तेल निकलना शुरू होने के बाद नोजल से हाथ हटा लें. तेल डलवाते वक्त नोजल का बटन दबा रहने से उसके निकलने की स्पीड कम हो जाती है और चोरी आसान हो जाती है.

9- ना उलझें पेट्रोल पंप कर्मियों की बातों में 

ऐसा भी होता है कि जिस पेट्रोल पंप पर आप अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाने गये हैं, उसका कर्मचारी आपको अपनी बातों में उलझाये हुए है और आपको बातों में लगाकर पेट्रोल पंपकर्मी जीरो तो दिखाये, लेकिन मीटर में आपके द्वारा मांगा गया पेट्रोल का मूल्य नहीं सेट करे. 

10- मीटर की स्पीड का भी रखें ख्याल

अगर आपने पेट्रोल आर्डर किया और मीटर बेहद तेज चल रही है, तो समझिए कुछ गड़बड़ है. पेट्रोल पंपकर्मी को मीटर की गति सामान्य करने के निर्देश दें. हो सकता है कि तेज मीटर चलने से आपकी जेब पर डाका डाला जा रहा हो. 

11- राउंड फिगर की रकम में ना भरवाएं पेट्रोल, डीजल 

ज्यादातर लोग 500, 1000 या 2000 जैसी रकम देकर पेट्रोल या डीजल भरवाते हैं. लेकिन कई पेट्रोल पंप मालिक एसे नंबर के लिए पहले ही मशीन को फिक्स करके रखते हैं. इसलिए बेहतर होगा कि आप राउंड फिगर की रकम देकर पेट्रोल ना भरवाएं. 

इन टिप्स को अपनाकर उम्मीद है कि आप इस तरह की चीटिंग से बचे रह सकते हैं.

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अब बोले केजरीवाल, हां हमने गलती की

पंजाब, गोवा और MCD चुनाव में हार के बाद केजरीवाल ने पहली बार चुप्पी तोड़ते…
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गौतम गंभीर हैं देश के असली ‘बाहुबली’, सुकमा शहीदों के परिवारों के नाम की ‘मैन ऑफ द मैच’ की राशि

नई दिल्ली : हाल ही छत्तीसगढ़ के सुकमा में शहीद हुए जवानों के लिए जहां एक ओर अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने सोशल साइट के जरिए लोगों से जवानों के परिजनों की मदद करने की अपील की है तो वहीं दूसरी ओर भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर भी इस काम में आगे आए हैं. 

सुकमा में शहीद CRPF जवानों के बच्चों की मदद के लिए गौतम का ‘गंभीर’ कदम, उठाएंगे पढ़ाई का खर्च

क्रिकेटर गौतम गंभीर सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों के परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है. उन्होंने शहीद 25 सीरीआरपीफ जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की है. वे ‘गौतम गंभीर फाउंडेशन’ के जरिए मदद के लिए आगे आए हैं. शहीदों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के बाद गंभीर ने उनके परिवार की मदद के लिए अपनी जीत की राशि भी दे दी है. 

ग्राउंड रिसर्च सुकमा हमला: नक्सलियों ने गांववालों को सीआरपीएफ दोस्तों पर हमला करने के लिए मजबूर किया

बुधवार को ईडन गार्डन्स में खेले गए आईपीएल मुकाबले में कोलकाता नाइड राइडर्स ने दिल्ली डेयरडेविल्स को 7 विकेट से हरा दिया. कप्तान गौतम गंभीर ‘मैन ऑफ द मैच’ रहे. उन्होंने अवॉर्ड की ये राशि सुकमा के शहीदों के परिवार को देने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि ये राशि पीड़ित परिवारों के बच्चों के शिक्षा पर खर्च की जाएगी. इस मैच गौतम गंभीर ने नाबाद 71 रनों की कप्तानी पारी खेली. 

सुकमा में नक्सलियों ने यूं मचाया तांडव, देखिए खौफनाक तस्वीरें

इससे पहले उन्होंने एक अखबार में कॉलम लिखकर कहा, ‘बुधवार सुबह मैंने अखबार उठाए, तो दो शहीद जवानों की बेटियों की तस्वीरें देखीं. एक अपने शहीद पिता को सल्यूट कर रही थी, जबकि दूसरी तस्वीर में युवती को उसके घरवाले सांत्वना दे रहे थे.’

गंभीर ने लिखा, ‘गौतम गंभीर फाउंडेशन इन शहीदों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगा. मेरी टीम ने काम शुरू कर दिया है. शीघ्र ही मैं इसका अपेडट दूंगा.’ बुधवार रात राइजिंग पुणे सुपरजाइंट के खिलाफ मैच में गंभीर ने कलाई में काली पट्टी लगाकर सीआरपीएफ जवानों को प्रति सम्मान जताया था.

सुकमा हमले में बचे जवान ने बतायी आंखों देखी, कहा-मैंने 3-4 नक्सलियों के सीने में मारी गोली

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भी देश के लोगों से सुकमा नक्सली हमले में शहीद जवानों के परिवारों की मदद करने की अपील की है. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अक्षय ने एक ऑडियो मेसेज में कहा, ‘हाल ही में हुए सुकमा हमले में सीआरपीएफ के हमारे बहादुर जवानों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. मेरा आप सबसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि अगर आप इन शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजिल अर्पित करना चाहते हैं तो भारत सरकार की वेबसाइट bharatkeveer.gov.in पर जाकर अपना योगदान दीजिए ताकि शहीदों के परिवारों को महसूस हो सके कि इस दुख की घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है. वे अकेले नहीं हैं.’

सुकमा: नक्‍सलियों ने इस तरह घात लगाकर किया हमला? जानिए पूरी कहानी

सोमवार को हुआ था सुकमा में हमला

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार दोपहर 12.25 बजे सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन पर नक्सलियों ने हमला किया. फायरिंग में 25 जवान शहीद हो गए थे. चिंतागुफा और बुरकापाल के करीब सड़क बनाई जा रही है. सीआरपीएफ की पेट्रोल पार्टी को यहां सिक्युरिटी में लगाया गया था. करीब 300 नक्सलियों ने उन पर घात लगाकर हमला किया. सीआरपीएफ अफसर के मुताबिक पेट्रोल पार्टी में 99 जवान थे.

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PM से मिले राजनाथ, सुकमा हमले और कश्मीर पैकेज के बारे में दी जानकारी

नई दिल्ली : गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. गृह मंत्री ने पीएम को सुकमा में सुरक्षा बलों पर हुए नक्सली हमले के बाद उठाए गए कदमों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के लिए 80 हजार करोड़ रुपये के विकास पैकेज की स्थिति के बारे में जानकारी दी.

पीएम और राजनाथ के बीच आधें घंटे तक चली बैठक

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आधिकारिक आवास पर आधे घंटे की बैठक में सिंह ने छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों द्वारा सीआरपीएफ के जवानों पर किए गए कायरतापूर्ण हमले के बाद उठाए गए कदमों का ब्योरा दिया. गौरतलब है कि सुकमा में हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए थे.

80 हजार करोड़ रुपए के पैकेज के बारे में दी जानकारी

गृह मंत्री ने जम्मू कश्मीर के लिए 80 हजार 68 करोड़ रपये के पैकेज की स्थिति के बारे में भी प्रधानमंत्री को जानकारी दी. इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर 2015 में की थी. अब तक केंद्र ने राज्य सरकार को 19000 करोड़ रुपये जारी किए हैं. अधिकारी ने कहा, ‘मेगा पैकेज को सफलतापूर्वक लागू करना कश्मीर में अलगाव की भावना को शांत करने के लिए महत्वपूर्ण है.’

और पढ़ें : केंद्र का कश्मीरी अलगाववादियों से बात करने से इनकार

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Zee जानकारी : शांति के लिए सौदेबाज़ी नहीं कर पाएंगे पत्थरबाज और अलगाववादी

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके, पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन से कहा, पहले वो लिखकर इस बात की गारंटी दे कि अगले दो हफ़्तों में कश्मीर घाटी में पत्थरबाज़ी की घटना नहीं होगी। तभी कोर्ट केंद्र सरकार को पैलेट गन का इस्तेमाल ना करने के निर्देश देगी। शांति की दिशा में पहला कदम अलगाववादी पक्ष को ही बढ़ाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा, कि क्या याचिककर्ता इस बारे में अदालत को कोई लिखित आश्वासन दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा, कि घाटी में हालात सामान्य करने के लिए सकारात्मक कोशिश सबसे पहले याचिककर्ता की तरफ से होनी चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा कि – मौजूदा हालात में जब घाटी में पत्थरबाज़ी की घटनाएं हो रही हों, तो बातचीत कैसे हो सकती है? कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 9 मई तक के लिये स्थगित कर दी।

दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ शब्दों में ये बात कही है, कि कश्मीर में हिंसा और पत्थरबाज़ी की घटनाओं को रोकने के लिए वो अलगाववादियों के साथ किसी भी प्रकार की कोई बातचीत नहीं करेगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, कि वो कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत तभी करेगी, जब मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल इसमें हिस्सा लें ना कि अलगाववादी। केंद्र सरकार ने ये बात भी कही है, कि अलगाववादियों से बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट भी सरकार को बाध्य नहीं कर सकता। इसका मतलब ये हुआ, कि अब कश्मीर घाटी में पत्थरबाज़ों और अलगाववादियों के लिए सारे दरवाज़े बंद हो चुके हैं। अब वो शांति के लिए सौदेबाज़ी नहीं कर पाएंगे।

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Zee जानकारी : भारत में वित्तीय वर्ष बदलने के हैं कई फायदे

नई दिल्ली : भारत में फिलहाल वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच होता है, इसकी शुरुआत वर्ष 1867 में हुई थी। 1867 से पहले भारत का वित्तीय वर्ष 1 मई से 30 अप्रैल के बीच का होता था। केंद्र सरकार वित्तीय वर्ष की तरीख बदलकर अब इसे हर वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक करना चाहती है।

ऐसा नहीं है कि वित्तीय वर्ष की तारीख को बदलने का फैसला सिर्फ अंग्रेजों के ज़माने से चली आ रही परंपरा को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। इसके कई फायदे भी हैं। नया वित्तीय वर्ष किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि मौजूदा वित्तीय वर्ष की टाइमिंग, मॉनसून की टाइमिंग से मैच नहीं करती है जिसकी वजह से किसान मॉनसून का फायदा नहीं उठा पाते हैं।

कुछ एक्सपर्ट ऐसा भी मानते हैं कि वित्तीय वर्ष की नई तारीख मौसम की वजह से होने वाले बदलावों की गणना भी कर लेगी। विशेषज्ञों की राय है कि अक्टूबर में दक्षिण पश्चिम मानसून के खत्म होने के बाद बजट को अंतिम रूप दिया जाए। क्योंकि ये वो वक्त होता है जब खरीफ की फसल तैयार होती है और रबी की फसल का अनुमान लगाया जा सकता है। इस हिसाब से नवंबर में देश का बजट पेश किया जा सकता है। 

मॉनसून के खराब रहने से भारत में अक्सर कुछ इलाक़ों में जून और सितंबर के बीच में सूखा पड़ता है, अगर वित्तीय वर्ष की तारीख बदलती है तो नवंबर में पेश होने वाले बजट में, कृषि से जुड़ी ऐसी समस्याओं का ध्यान रखा जा सकता है। यहां आपको याद दिला दें कि भारत के GDP में कृषि का योगदान 15 प्रतिशत से ज्यादा है, और 58 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण परिवार खेती की पैदावार पर ही निर्भर है।

भारत के वित्तीय वर्ष में अगर बदलाव हुआ तो ये कोई अनोखी घटना नहीं होगी, क्योंकि दुनिया के 156 देशों का वित्तीय वर्ष कैलेंडर ईयर यानी 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच होता है। वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मोनेट्री फंड जैसी दुनिया बड़ी एजेंसियां भी डाटा इकट्ठा करने के लिए कैलेंडर ईयर को ही फॉलो करती है।

वर्ष 1865 में ब्रिटिश सरकार में एक कमीशन गठित किया गया था जिसमें भारत के वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 जनवरी से करने की सलाह दी गई थी। भारत में ब्रिटिश राज होने की वजह से वर्ष 1867 में भारत के वित्तीय वर्ष की तारीख भी ब्रिटिश वित्तीय वर्ष के हिसाब से 1 अप्रैल से 31 मार्च कर दी गई। ये तारीखें अंग्रेज़ों को सूट करती थीं।

वर्ष 1921 में कांग्रेसी नेता सर दिनशॉ वाचा ने ब्रिटिश सरकार से भारत के वित्तीय वर्ष की तारीख को 1 जनवरी से करने की सिफारिश की थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज़ादी के बाद 1954 में प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के सामने भी वित्तीय वर्ष की तारीख को 1 जनवरी करने का प्रस्ताव आया था। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।

वित्तीय वर्ष की तारीख में बदलाव के लिए वर्ष 1984 में राजीव गांधी की सरकार ने एलके झा की नेतृत्व में एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी का गठन करने का फैसला भारत में वर्ष 1979-80 और 1982-83 में पड़े भीषण सूखे के बाद लिया गया था। लेकिन वर्ष 1985 में आई एलके झा कमेटी की रिपोर्ट पर राजीव गांधी की सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई।

पाकिस्तान, इजिप्ट और न्यूजीलैंड जैसे देशों के वित्तीय वर्ष का कैलेंडर 1 जुलाई से शुरू होकर 30 जून तक का होता है। भारत के अलावा, यूके, कनाडा, सिंगापुर जैसे देशों का वित्तीय वर्ष भी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का होता है।

सरकार को टैक्स असेसमेंट ईयर में बदलाव के साथ ही टैक्स कलेक्शन के इंफ्रास्ट्रक्चर का पुनर्गठन करना होगा। वित्तीय वर्ष में बदलाव के साथ संसद सत्र के समय में भी बदलाव हो सकता है। हालांकि इससे लोगों के टैक्स पेमेंट शेड्यूल पर फिलहाल फर्क नहीं पड़ेगा।

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सिरफिरे के मोदी को ट्वीट से मचा हड़कंप

Today Hindi News: गुरुवार को एक शख्स के प्रधानमंत्री मोदी को ट्वीट करने से हड़कंप मच गया। उसने ट्वीट किया कि उसे मुंबई से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट के हाइजैक हो जाने का डर है, जिसमें वह सफर कर रहा था।

पैसेंजर नितिन वर्मा ने बताया कि फ्लाइट ने तीन घंटे की देरी से सुबह 11:30 बजे टेकऑफ किया, जिसकी वजह से वह परेशान हो गया। दिल्ली एयरपोर्ट व्यस्त होने की वजह से फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट किया गया, जयपुर में उसे फ्लाइट से उतारा गया और सीआईएसएफ ने हिरासत में लेकर उससे तीन घंटे तक पूछताछ की।

पुलिस के अनुसार, बोर्डिंग के बावजूद कुछ तकनीकी कारणों से फ्लाइट मुंबई से तीन घंटों की देरी से उड़ी। इसी वजह से नितिन वर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी को ट्वीट कर दिया। ट्वीट में लिखा था- ‘Sir, we have been in Jet Airways Flight for past 3 hours, looks like highjacked. Pl Help (सर, हम पिछले 3 घंटों से जेट एयरवेज की फ्लाइट में हैं, ऐसा लगता है हाइजैक कर लिया गया है, प्लीज मदद करें। )’. इस ट्वीट पर पीएमओ तुरंत हरकत में आ गया और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सिक्यॉरिटी एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया।

ऑफिशिएटिंग एय़रपोर्ट डायरेक्टर एमपी बंसल ने कहा, ‘उसने हड़कंप का माहौल पैदा किया, इसलिए उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।’ वहीं, जयपुर पुलिस में डीसीपी कुंवर राष्ट्रदीप ने कहा, ‘फ्लाइट में देरी की वजह से परेशान होने पर नितिन ने ट्वीट किया।’ नितिन वर्मा के खिलाफ आपीसी की धारा 503 और 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

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केंद्र का कश्मीरी अलगाववादियों से बात करने से इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने J&K बार एसोसिएशन से मांगा पत्थरबाज़ी रोकने के लिए सुझाव

नई दिल्ली : सरकार ने शुक्रवार (28 अप्रैल) को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह जम्मू कश्मीर के संकट को सुलझाने के लिये वहां के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से वार्ता के लिये तैयार है परंतु अलगाववादियों के साथ नहीं. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार वार्ता की मेज पर तभी आयेगी जब मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल इसमें शिरकत करेंगे न कि अलगाववादी तत्व.

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष यह दावा किया. उन्होंने जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के इस दावे को खारिज किया कि केन्द्र संकट को सुलझाने के इरादे से वार्ता के लिये आगे नहीं आ रहा है.

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पीठ ने बार एसोसिएशन से सुझाव पेश करने को कहा
रोहतगी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री और राज्य की मुख्यमंत्री के बीच बैठक हुयी थी जिसमें मौजूदा हालात पर चर्चा हुयी थी. पीठ ने बार एसोसिएशन से कहा कि पत्थरबाजी और कश्मीर घाटी में सड़कों पर हिंसक आन्दोलन सहित इस संकट को हल करने के बारे में वह अपने सुझाव पेश करे.

शीर्ष अदालत ने बार से यह भी स्पष्ट किया कि उसे इसके सभी पक्षकारों से बातचीत के बाद अपने सुझाव देने होंगे और वह यह कह कर नहीं बच सकती कि वह कश्मीर में सभी का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही है. न्यायालय ने कहा कि एक सकारात्मक पहल शुरू करने की आवश्यकता है और बार जैसी संस्था घाटी में स्थिति सामान्य करने के लिये एक योजना पेश करके इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है. पीठ ने केन्द्र को भी स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय इस मामले में खुद को तभी शामिल करेगा जब ऐसा लगता हो कि वह एक भूमिका निभा सकता है और इसमें अधिकार क्षेत्र का कोई मुद्दा नहीं हो.

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अलगाववादियों से वार्ता नहीं
न्यायालय ने अटार्नी जनरल से कहा, ‘यदि आपको लगता है कि न्यायालय की कोई भूमिका नहीं है या आपको लगता है कि यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है तो हम इसी क्षण इस फाइल को बंद कर देंगे. पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब सुनवाई के अंतिम क्षणों में अटार्नी जनरल ने बार द्वारा दिये गये कुछ सुझावों पर आपत्ति की. इसमें अलगाववादियों को नजरअंदाज किया जाना भी शामिल है.

 

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पीठ ने माना कश्मीर में स्थिति नाजुक
पीठ ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को संयुक्त कदम उठाना चाहिए परंतु पहला कदम तो वकीलों की संस्था की ओर से ही आना चाहिए जो शीर्ष न्यायालय आयी है. पीठ ने इस मामले की सुनवाई नौ मई के लिये स्थगित करते हुये यह भी कहा कि वह इस तथ्य से परिचित है कि कश्मीर घाटी में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. शीर्ष अदालत जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की अपील पर सुनवाई कर रही थी. बार एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुये घाटी में पत्थरबाजों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का अनुरोध किया है.

मामले की 9 मई को होगी सुनवाई

पीठ ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को संयुक्त कदम उठाना चाहिए परंतु पहला कदम तो वकीलों की संस्था की ओर से ही आना चाहिए जो शीर्ष न्यायालय आयी है. पीठ ने इस मामले की सुनवाई नौ मई के लिये स्थगित करते हुये यह भी कहा कि वह इस तथ्य से परिचित है कि कश्मीर घाटी में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. शीर्ष अदालत जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की अपील पर सुनवाई कर रही थी. बार एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुये घाटी में पत्थरबाजों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का अनुरोध किया है.

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सुषमा की पहल पर बच गयी खातून

National Hindi News: एजेंट्स की धोखाधड़ी की शिकार हैदराबाद की निवासी सलमा बेगम को भारतीय अथॉरिटीज ने बचा लिया है और वह जल्द ही भारत लौटेंगी। सलमा बेगम एजेंट्स की धोखाधड़ी का शिकार हो गई थीं। सलमा बेगम को कथित रूप से सऊदी अरब में 3 लाख रुपये में बेच दिया गया था। सलमा बेगम को बचाए जाने की जानकारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट करके दी है।

सुषमा स्वराज ने ट्वीट में लिखा है, ‘भारतीय नागिरक सलमा बेगम को बचा लिया गया है। वह 28 अप्रैल को सुबह 04.15 बजे फ्लाइट जी9406 से मुंबई पहुंचेंगी।’

विदेश मंत्री ने सलमा बेगम की तेजी से मदद करने के लिए सऊदी में स्थित भारतीय दूतावास की तारीफ की है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है, ‘सिर्फ 72 घंटे में मामले को हल करने के लिए मैं रियाद स्थित भारतीय दूतावास के प्रयासों की तारीफ करती हूं।’

सलमा बेगम ने अपनी बेटी को भेजे एक ऑडियो मेसेज में कहा था कि जिस एजेंट ने उनके वीजे का प्रबंध किया था, उस एजेंट ने सलमा को 3 लाख रुपये में सऊदी के एक कफील को बेच दिया था। इसके बाद कफील सलमा पर शादी के लिए दबाव बनाने लगा। जब सलमा ने शादी से इनकार कर दिया तो कफील ने उनको मानसिक और शारीरिक यातनाएं देनी शुरू कर दी। सलमा ने मेसेज में भारत सरकार से खुद को भारत वापस लाने की अपील की थी।

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