Monthly Archives: July 2017

Zee जानकारी : भारत से युद्ध लड़ने के लिए चीन को बॉर्डर पर उतारने पड़ेंगे अपने दो तिहाई जवान

-बारा-होती के इलाके को चीन अपनी भाषा में वू ज़ी कहता है।

-बारा-होती के इसी इलाके से मैक महौन रेखा गुज़रती है. ये चीन और भारत की सीमा रेखा है. हालांकि चीन की सरकार इसे विवादित मानती है।

-बारा-होती के इन इलाकों में हर साल जुलाई और अगस्त के महीने में चीन के सैनिक देखे जाते हैं और इस बार भी ऐसा ही हुआ है।

-हालांकि, हमारे जवानों के कड़े विरोध के बाद उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। 

-वर्ष 2007 से 2016 तक बारा-होती के इलाकों में चीनी सैनिकों ने 40 से ज़्यादा बार घुसपैठ की है।

-LAC की लंबाई करीब 4 हज़ार किलोमीटर है. इस वक्त पूरी LAC पर भारतीय सेना की कम से कम 12 से 13 डिवीजन तैनात हैं। 

-युद्ध की भाषा में बात करें तो पहाड़ों पर लड़ाई के लिए हमला करने वाली फौज की संख्या बचाव करने वाली फौज से कम से कम 9 गुनी होनी चाहिए। 

-यानी अगर चीन की फौज को भारत की सेना का मुकाबला करना है तो उन्हें कम से कम 100 से 110 डिवीजन की ज़रूरत है।

-इसे हम आपको और आसान भाषा में समझाते हैं। सेना की एक डिवीजन में करीब 12 से 15 हज़ार जवान होते हैं। इस हिसाब से इस वक्त चीन बॉर्डर पर भारत के कम से कम डेढ़ लाख जवान तैनात हैं। ऐसे में अगर चीन को भारतीय सैनिकों का मुकाबला करना है तो उसे कम से कम साढ़े 13 लाख जवानों की ज़रूरत पड़ेगी। 

-इस वक्त चीन के पास साढ़े 22 लाख सक्रिय सैनिक हैं, और अगर चीन भारत से युद्ध करता है तो उसे अपने दो तिहाई जवान बॉर्डर पर तैनात करने पड़ेंगे। जिसकी संभावना बहुत कम है। 

भारी बारिश और कम पैदावार के चलते टमाटर हुआ ‘लाल’

-पूरे देश में इस वक्त फरवरी से जुलाई के बीच तैयार होने वाली टमाटर की फसल पहुंच रही है।

-देश में टमाटर की सबसे ज्यादा पैदावार कर्नाटक, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में होती है।

-महाराष्ट्र में मौजूद एशिया की सबसे बड़ी टमाटर की मंडी पिंपलगांव में है। और वहां किसानों को एक किलो टमाटर के लिए 30 से 40 रुपये मिल रहे हैं. 

-बेंगलूरु से करीब 60 किलोमीटर दूर कोलार ज़िला, एशिया में टमाटर के उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। कोलार में इस बार पिछले साल के मुकाबले टमाटर की खेती कम हुई है।

-पिछले वर्ष टमाटर की फसल के कम दाम मिलने की वजह से कोलार के किसानों ने इस बार पैदावार आधी कर दी।

-दिल्ली में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से टमाटर आता है लेकिन भारी बारिश की वजह से कई इलाकों से संपर्क टूट गया है जिसकी वजह से दिल्ली की मंडियों में टमाटर कम पहुंच रहा है.

-महाराष्ट्र और गुजरात में भारी बारिश से स्थिति बहुत बिगड़ गई है और नासिक से आने वाले टमाटर के ट्रक दिल्ली और देश के कई दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंच पा रहे हैं.

-देश के ज़्यादातर राज्यों में भारी बारिश की वजह से टमाटर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा है और बारिश का बहाना बनाकर कई बड़े व्यापारियो ने टमाटर की कीमतों को औसतन 100 रुपये किलो तक पहुंचा दिया है. 

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सीमापार आतंकवाद को अब वैश्विक चुनौती मान लिया गया है : सुषमा

नई दिल्ली : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि भारत के खिलाफ संचालित सीमापार आतंकवाद को अब एक बड़े क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौती के तौर पर स्वीकार कर लिया गया है तथा उससे मुकाबला के लिए भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ रहा है.

सुषमा ने एक विचार मंच पर अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि सम्पर्क परियोजनाओं के निर्माण के दौरान संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. माना जा रहा है कि सुषमा का इशारा चीन की महत्वाकांक्षी एक क्षेत्र और रोड पहल की ओर था.

उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर बोलते हुए कहा कि भारत…प्रशांत क्षेत्र में उभरती स्थिति आज के समय में दुनिया के समक्ष उत्पन्न मुख्य चुनौतियों में से एक है.

विदेश मंत्री ने चीन पर साधा निशाना

उन्होंने परोक्ष रूप से दक्षिण चीन सागर की ओर इशारा किया जहां चीन अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है और कहा कि भारत और अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था बरकरार रखने के लिए साथ खड़े हैं जिससे सभी देश लाभान्वित हुए हैं. पाकिस्तान से भारत के बिगड़ते संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की ‘पड़ोस पहले’नीति से एक देश को छोड़कर सभी देशों के साथ परिणाम आये हैं.

आतंकवाद की चुनौती पर सुषमा ने कहा कि भारत और अमेरिका इससे मुकाबले को ‘उच्च प्राथमिकता’देते हैं.

उन्होंने भारत-अमेरिका मंच पर कहा, ‘दोनों देश इस बुराई के सीधे पीड़ित रहे हैं. भारत में हम कई वर्षों से सीमापार आतंकवाद का सामना कर रहे हैं. इसे अब एक बड़े क्षेत्रीय और एक वैश्विक चुनौती के तौर पर स्वीकार कर लिया गया है.’उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ गत महीने हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से ‘स्पष्ट’किया गया कि आतंकवाद को काबू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक संकल्प के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है.

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मोदी के बचपन की चाय दुकान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोई योजना नहीं

नयी दिल्ली : सरकार ने संसद में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने बचपन में जिस चाय की दुकान पर चाय बेची थी, उसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कोई योजना नहीं है. पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि गुजरात के वाडनगर में चाय दुकान का कायाकल्प करने की कोई योजना नहीं है क्योंकि इस उद्देश्य के लिए धन आवंटित नहीं किया गया है.

मंत्री ने इस महीने की शुरूआत में कहा था कि उनका मंत्रालय, रेल मंत्रालय के साथ मिल कर वाडनगर रेलवे स्टेशन को एक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगा.

गौरतलब है कि यह चाय की दुकान स्टेशन के एक प्लेटफार्म पर स्थित है.

 

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नीतीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर की तारीफ, जानें क्या-क्या कहा…

नई दिल्लीः बिहार में महागठबंधन से अलग होने के बाद बीजेपी के साथ सरकार बनाने के फैसले पर अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं के निशाने पर सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को सभी सवालों के जवाब दिए. जहां विपक्ष के कई नेता पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के साथ गठबंधन करने पर उनकी कड़ी आलोचना कर रहे है. वहीं नीतीश ने पीएम मोदी की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने यहा तक कह दिया कि इस समय पूरे देश में ऐसा कोई नहीं है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला कर सके. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कह कि भविष्य के चुनावों में भी देशभर में मोदी का जादू चलेगा. गौरतलब है कि बिहार के सीएम के रूप में छठवीं बार शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार को पीएम मोदी ने तुरंत बधाई दे दी थी.

नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर कहा कि यह पहले से तय नहीं था और उनको मजबूरीवश उसके साथ जाना पड़ा. क्योंकि उनके सामने कोई रास्ता नहीं बचा था. इसके लिए उन्होंने सीधे तौर पर लालू यादव और आरजेडी को जिम्मेदार ठहराया. नीतीश ने विपक्ष को आगाह करते हुए कहा कि पीएम मोदी का मुकाबला करने की किसी में भी क्षमता नहीं है और 2019 में भी दिल्ली की गद्दी पर मोदी के अलावा कोई और नहीं बैठ सकता. नीतीश ने खुद के फैसले का बचाव करते कहा कि बीजेपी के साथ उनका गठबंधन सहयोगी के तौर पर है फॉलोअर के तौर पर नहीं. यानि नीतीश कुमार ने यहां ये स्पष्ट कर दिया कि वे हर मामले में बीजेपी का समर्थन नहीं करेंगे. बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनके पूरी तरह साथ होंगे. 

लालू यादव के लिए ‘सुशासन बाबू’ नीतीश अब हो गए हैं ‘अनैतिक’ कुमार

नीतीश कुमार ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान की सीमा में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक की सराहना करते हुए कहा कि हमने इसकी प्रशंसा की थी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले का भी हमने कई दलों की तरह समर्थन किया. उन्होंने कहा कि हमने एनडीए से अलग होने पर भी कई मामलों में केंद्र का समर्थन किया है.  

मेरा मजाक उड़ाया गया

बीजेपी के साथ गठजोड़ कर सरकार बनाने के बाद विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आए नीतीश कुमार ने कहा कि तेजस्‍वी यादव पर लग रहे आरोपों के बीच मैंने उनसे कहा कि आप मुझे नहीं तो जनता के सामने ही पूरे मामले पर सफाई दें. लेकिन इस पर मेरे बारे में ही मीडिया में गलत खबरें फैलाई गई. इतना ही नहीं मैंने सच्‍चाई जाननी चाही तो मेरा ही मजाक उड़ाया गया.

हो गया था मजबूर

पार्टी की बैठक में काफी विचार- विमर्श के बाद ही यह कदम उठाया गया है. मेरी पार्टी के लोगों ने कहा कि आप अपनी नीति से नहीं हटें. मैं आरजेडी के हर तरह के आरोपों को सहता रहा, अंत में मैंने यह कदम उठाया. उन्‍होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता पर मुझे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. बीजेपी के साथ पिछली सरकार में अल्‍पसंख्‍यकों के कल्‍याण के लिए काफी काम किए थे. 

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लालू यादव के लिए ‘सुशासन बाबू’ नीतीश अब हो गए हैं ‘अनैतिक’ कुमार

नई दिल्लीः बिहार में महागठबंधन से अलग हो बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले जेडीयू नेता नीतीश कुमार पर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव लगातार हमलावर रुख अख्तियार किए हुए है. लालू यादव ने रविवार को अपने ताजा हमले में नीतीश कुमार को ‘अनैतिक’ कुमार तक कह दिया. कल तक नीतीश को अपना छोटा भाई और सुशासन बाबू कहने वाले लालू यादव ने नीतीश को भरोसे का खून करने वाला और जनमत का डकैत करार दिया है.  लालू यादव ने 30 जुलाई को किए अपने ट्वीट में नीतीश का नाम नहीं लिया है. लेकिन ट्वीट की भाषा और संदर्भ बताते हैं कि लालू यादव नीतीश कुमार से बेहद खफा हैं. लालू ने अपने ट्वीट में लिखा 

‘वो नैतिकता, राजनीति, सामाजिक, लोकतांत्रिक भ्रष्टाचार का दुष्ट बॉस है, उसने भरोसे का खून किया है, जनमत का डाला डाला है, वो अनैतिक कुमार कौन है? 

दरअसल 20 माह तक बिहार में महागठबंधन के साथ रहकर सत्ता चलाने वाले नीतीश कुमार की राजनीतिक चाल से स्तब्ध लालू यादव अब अपने इस पुराने सहयोगी के खिलाफ नये राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करना चाहते हैं. लालू यादव को इस आंदोलन के लिए अब नीतीश की ही पार्टी के सहयोगी शरद यादव के साथ की दरकार है. दावा किया जा रहा है कि बिहार के कद्दावर यादव नेता शरद यादव नीतीश-मोदी की इस दोस्ती से ज्यादा खुश नहीं है और पार्टी में बगावत कर सकते हैं.

इसी फेहरिस्त में आज शरद यादव ने इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ी. शरद यादव में बिहार में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के नीतीश कुमार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि वो इससे समहत नहीं थे. उन्होंने कहा कि बिहार में जनादेश इसके लिए नहीं था.

लालू के अलावा सीपीआई नेता डी.राजा ने भी शरद यादव से मुलाकात की थी. भाकपा नेता ने रविवार को शरद यादव से मुलाकात पर कहा, यादव बिहार के घटनाक्रम को लेकर ‘‘निराश और परेशान’’ हैं. भाकपा नेता ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि उन्हें :यादव: फैसले से दूर रखा गया.’’ राजा ने कहा कि यादव ने उन्हें कल फोन किया था जब वह चेन्नई में थे. इसके बाद उन्होंने यादव से मुलाकात की.

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बिहार में महागठबंधन तोड़ने के आरोपों का अमित शाह ने दिया यह जवाब

लखनऊ : बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने पहली बार मीडिया के सामने अपनी बात रखी. गौरतलब है कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीजेपी और जेडीयू की सरकार बन गई है. इस पर विपक्षी पार्टियों ने बिहार में आरजेडी- कांग्रेस और जेडीयू गठबंधन में फूट के लिए बीजेपी पर आरोप लगाए थे. सोमवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में अमित शाह ने संवाददाताओं की तरफ से पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि महागठबंधन तोड़ने का हमारे पर आरोप लगाना गलत है, नीतीश कुमार ने खुद इस्‍तीफा दिया है.

दूसरी तरफ सीएम नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के फैसले पर आज पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में आरजेडी द्वारा दायर की गई याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि विधानसभा में बहुमत परीक्षण हो चुका है.

लखनऊ में मोदी सरकार की उपलब्धियों पर अमित शाह ने बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सात करोड़ 64 लाख युवाओं को लोन देकर रोजगार मुहैया कराया है. सरकार के कामों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने चार करोड़ गरीबों के घरों में शौचालय बनवाए हैं. मोदी सरकार ने 19 हजार गांवों में बिजली पहुंचाई है.

उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने यूपी को 4 हजार 77 करोड़ रुपए ज्यादा दिया है. पनामा लीक पर पूछे गए सवाल पर शाह ने कहा कि इसमें बीजेपी का कोई नेता शामिल नहीं है और जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं. पाकिस्‍तान से सीमा पर होने वाले व्‍यापार पर बात करते हुए बीजेपी अध्‍यक्ष ने कहा कि पाकिस्‍तान से व्‍यापार करने के मामले में सभी दल मिलकर बातचीत करेंगे.

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माउंटबेटन की बेटी ने कहा, ‘मां और नेहरू में नहीं था जिस्मानी रिश्ता’

नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन एक-दूसरे से प्यार करते थे और सम्मान करते थे लेकिन उनका संबंध कभी जिस्मानी नहीं रहा क्योंकि वे कभी अकेले नहीं मिले. भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड लूईस माउंटबेटन की बेटी ने यह बात कही. माउंटबेटन जब भारत के अंतिम वायसराय नियुक्त होकर आए थे, उस वक्त पामेला हिक्स नी माउंटबेटन की उम्र करीब 17 साल थी. पामेला ने अपनी मां एडविना एश्ले और नेहरू के बीच ‘‘गहरे संबंध’’ विकसित होते हुए देखा. पामेला का कहना है, ‘‘उन्हें पंडितजी में वह साथी, आत्मिक समानता और बुद्धिमतता मिली, जिसे वह हमेशा से चाहती थीं.’’ पामेला इस संबंध के बारे में और जानने को इच्छुक थीं. 

पामेला की किताब में नेहरू-एडविना के रिश्तों का 

लेकिन अपनी मां को लिखे नेहरू के पत्र पढ़ने के बाद पामेला को एहसास हुआ कि ‘‘वह और मेरी मां किस कदर एक-दूसरे से प्रेम करते थे और सम्मान करते थे.’’ ‘डॉटर ऑफ एंपायर : लाइफ एज ए माउंटबेटन’ किताब में पामेला लिखती हैं, ‘‘इस तथ्य से बिलकुल परे कि मेरी मां या पंडितजी के पास यौन संबंधों के लिए समय नहीं था, दोनों बिरले ही अकेले होते थे. उनके आसपास हमेशा कर्मचारी, पुलिस और अन्य लोग मौजूद होते थे.’’ ब्रिटेन में पहली बार 2012 में प्रकाशित इस पुस्तक को हशेत पेपरबैक की शक्ल में भारत लेकर आया है. 

किताब में कई घटनाओं का जिक्र

लॉर्ड माउंटबेटन के एडीसी फ्रेडी बर्नबाई एत्किन्स ने बाद में पामेला को बताया था कि नेहरू और उनकी मां का जीवन इतना सार्वजनिक था कि दोनों के लिए यौन संबंध रखना संभव ही नहीं था. पामेला यह भी लिखती हैं कि भारत से जाते हुए एडविना अपनी पन्ने की अंगूठी नेहरू को भेंट करना चाहती थीं. किताब के मुताबिक, ‘‘लेकिन उन्हें पता था कि वह स्वीकार नहीं करेंगे. इसलिए उन्होंने अंगूठी उनकी बेटी इंदिरा को दी और कहा, यदि वह कभी भी वित्तीय संकट में पड़ते हैं, तो उनके लिए इसे बेच दें.  क्योंकि वह अपना सारा धन बांटने के लिए प्रसिद्ध हैं.’’ माउंटबेटन परिवार के विदाई समारोह में नेहरू ने सीधे एडविना को संबोधित करके कहा था, आप जहां भी गई हैं, आपने उम्मीद जगाई है.

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अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, बीजेपी में है आंतरिक लोकतंत्र

लखनऊ: लोकतांत्रिक देश के लिए राजनीतिक पार्टी में ‘आंतरिक लोकतंत्र’ को महत्वपूर्ण मानते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आज कहा कि देश की गिनी चुनी पार्टियों में ही आंतरिक लोकतंत्र बचा है और बीजेपी उनमें से एक है. शाह ने यहां प्रबुद्धजनों के समागम कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘लोकतांत्रिक देश और जनता के लिए पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र महत्वपूर्ण है… गिनी चुनी पार्टियों में ही आंतरिक लोकतंत्र बचा है और उनमें से एक बीजेपी है. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं बचा, वो लोकतंत्र की सेवा नहीं कर सकती. वो ​पार्टियां घरानों, परिवारों और जातियों के आधार पर चलने लगती हैं. वहां प्रतिभा का महत्व नहीं होता. प्रतिभाशाली लोग किनारे कर दिये जाते हैं.

कांग्रेस पर साधा निशाना

शाह ने कांग्रेस ​पर निशाना साधते हुए कहा कि सबको मालूम है कि सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी होंगे, लेकिन मेरे बाद बीजेपी का अध्यक्ष कौन बनेगा, यह तय ही नहीं हो सकता क्योंकि बीजेपी में आंतरिक लोकतंत्र है. उन्होंने कहा कि जिसमें दमखम है, जनता के लिए संवेदना है, प्रतिभा है और जिसका निर्मल चरित्र होगा, वही अध्यक्ष बनेगा. किसी भी राजनीतिक दल के तीन मानक बताते हुए शाह ने आंतरिक लोकतंत्र के अलावा ‘सिद्धांत’ और ‘विकास’ को गिनाया.

सिद्धांत पर चलने का उल्लेख किया

उन्होंने कहा कि यह भी महत्वपूर्ण है कि पार्टी किन सिद्धांतों के आधार पर चल रही है. अगर पार्टी सिद्धांतों पर नहीं चल रही है तो अंत में परिवारवाद और जातिवाद के आधार पर चलने वाली पार्टी बन जाती है. शाह ने इस कड़ी में बीजेपी द्वारा ‘सांस्कृति​क राष्ट्रवाद’ और ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत पर चलने का उल्लेख किया. शाह ने कहा कि बीजेपी की सरकारें जहां नहीं होतीं वहां, परिवारवाद होता है, घोटाले होते हैं, भ्रष्टाचार होता है, संपत्ति के लिए झगड़े होते हैं. वहां पार्टी नाम की चीज नदारद होती है. लेकिन बीजेपी की सरकारें जहां जहां बनीं, सब जगह विकास हो रहा है. बीजेपी शासन में आती है तो ‘विकास’ सबसे आगे होता है.

(इनपुट एजेंसी से भी)

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‘झंडे वाली टिप्पणी’ पर कांग्रेस ने मांगा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का इस्तीफा

जम्मू: कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से झंडे संबंधी उनकी टिप्पणी को लेकर रविवार को इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि किसी को भी तिरंगे का अपमान करने की इजाजत नहीं है. कांग्रेस ने कहा कि महबूबा ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है. कांग्रेस ने बीजेपी से कहा है कि वह समझाए कि जम्मू कश्मीर सरकार में उसकी सहयोगी पार्टी पीडीपी और मुख्यमंत्री किस तरह की आजादी की बात कर रही हैं.

प्रदेश कांग्रेस इकाई के मुख्य प्रवक्ता रवींद्र शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की टिप्प्णी पर कड़ी आपत्ति जताई है. किसी को भी तिरंगे का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि इससे महान बलिदान और देश का सम्मान जुड़ा हुआ है.

(इनपुट एजेंसी से भी)

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संजय गांधी की मां ने इमरजेंसी लगाई, नेहरू की बेटी ने हटाई: जयराम रमेश

नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि संजय गांधी की मां ने आपातकाल लगाया और जवाहरलाल नेहरू की बेटी ने उसे हटाया था. जयराम ने जागरण वार्तालाप श्रंखला की पहली कड़ी में रेडिसन ब्लू होटल में आयोजित कार्यक्रम में अपनी नई किताब ‘इंदिरा गांधी: अ लाइफ इन नेचर’ पर वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय से बातचीत की. जयराम रमेश ने कहा कि इंदिरा ने छोटे बेटे संजय गांधी की सलाह मानकर देश में आपातकाल लगाया था और जवाहरलाल नेहरू की बेटी को जब अपनी गलती का अहसास हुआ, तब उसे वापस ले लिया था.

इंदिरा गांधी का जन्म शताब्दी वर्ष 

उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कहा करती थीं कि हमारे देश के लोग प्रकृति की पूजा करते करते हैं, पर्यावरण संरक्षण हमारे जीवन में है और सिर्फ भारतीय संस्कृति में है, बाकी किसी देश और सभ्यता में कुदरत के प्रति इतना लगाव नहीं है. जयराम ने कहा कि यह साल इंदिरा गांधी का जन्म शताब्दी वर्ष है और मेरी यह किताब इसी उपलक्ष में है. उन्होंने कहा कि हम इंदिरा को या तो दुर्गा के रूप में जानते हैं और या फिर इमर्जेसी के लिए याद करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इंदिरा पर्यावरण के प्रति भी बहुत संवेदनशील थीं. मेरी यह किताब कुदरत के प्रति उनके लगाव को उजागर करती है.

पिता को लिखे 250 पत्र 

जयराम ने कहा कि साल 2009 से लेकर 2011 के 26 महीने मैं पर्यावरण मंत्री पद पर रहा. इस दौरान पुराने पत्र देखने के बाद मुझे पता चला कि इंदिरा गांधी कुदरत के प्रति काफी संवेदनशील थीं. 1925 से 1940 के बीच इंदिरा ने अपने पिता पंडित नेहरू को लगभग 250 पत्र लिखे थे और इन पत्रों में ज्यादातर उन्होंने पेड़, पक्षी, नदी, जंगल वगैरह का जिक्र किया है.

पर्यावरण संरक्षण के लिए लड़ती रहीं

उन्होंने आगे बताया कि इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के रूप में 16 वर्षों के अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्रियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए लड़ती रहीं. यह बात दस्तवेजों से पता चलता है. उत्तरखंड के चिपको आंदोलन का उन पर बहुत प्रभाव पड़ा था और टिहरी बांध परियोजना को उन्होंने पांच वर्षो तक रोका था. यह परियोजना उनकी शहादत के बाद शुरू हुई थी. एक सवाल के जवाब में जयराम रमेश ने कहा कि वह इंदिरा के दो फैसलों से असहमत थे- एक, मथुरा रिफाइनरी और दूसरा, ओडिशा में चिल्का झील पर नेवी ट्रेनिंग सेंटर बनाने को मंजूरी.

(इनपुट एजेंसी से भी)

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