Monthly Archives: July 2017

नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’: देशवासी संकल्प लें कि आतंकवाद, सांप्रदायिकता को भारत से खदेड़ देंगे

नई दिल्ली: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े गए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ने रविवार (30 जुलाई) को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों से एक बार फिर देश से गंदगी, गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद और सांप्रदायिकता के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया. प्रधानमंत्री ने देशवासियों से यह संकल्प लेने के लिए कहा कि वे 2022 तक इन सभी चीजों को भारत से बाहर भगा देंगे. मोदी ने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन के 75वें साल के अवसर पर महात्मा गांधी को सराहनापूर्वक याद करते हुए कहा कि गंदगी, गरीबी और भ्रष्टाचार रहित ‘न्यू इंडिया’ (नया भारत) के निर्माण के लिए लोगों के लिए अगले पांच साल निर्णायक साबित हो सकते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, “जिस तरह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आखिरी पांच वर्ष (1942 से 1947) बेहद निर्णायक रहे, 2017 के बाद आने वाला पांच साल भारत का भविष्य तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है. आज से पांच साल बाद हम 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे होंगे.” 

मोदी ने कहा, “हमें 2017 को संकल्प का वर्ष बनाना होगा. आने वाले अगस्त के महीने में हम साथ मिलकर संकल्प लेंगे – गंदगी, भारत छोड़ो, गरीबी भारत छोड़ो, भ्रष्टाचार भारत छोड़ो, आतंकवाद भारत छोड़ो, जातिवाद भारत छोड़ो, सांप्रदायिकता भारत छोड़ो.” उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन के दौरान ‘करो या मरो’ का नारा दिया था, लेकिन आज, हमें अपने देश के लिए मरने की नहीं, बल्कि जीवित रहने और इसे प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर नौ अगस्त को हम ‘संकल्प से सिद्धि’ की शुरुआत करेंगे.

प्रधानमंत्री ने 30 जून की आधी रात से देशभर में लागू की गई कर प्रणाली जीएसटी की सराहना करते हुए कहा कि यह मात्र कर सुधार भर नहीं है, बल्कि ‘ईमानदारी की नई संस्कृति’ है. उन्होंने कहा कि जब उन्हें देशवासियों की चिट्ठी मिलती है और देश का एक गरीब व्यक्ति जब यह लिखता है कि कैसे जीएसटी के कारण उसकी दैनिक जरूरत की चीजें सस्ती हो गईं, तो इससे उन्हें बेहद खुशी और संतुष्टि मिलती है. प्रधानमंत्री ने कहा, “जीएसटी भारतवासियों की समग्र शक्ति का बेहतरीन उदाहरण है. यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. और यह सिर्फ कर सुधार भर नहीं है, बल्कि एक नई अर्थव्यवस्था है, जो ईमानदारी की नई संस्कृति को समृद्ध करेगा.”

मोदी ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की भी सराहना की. मोदी ने कहा कि भले ही महिला टीम विश्व कप फाइनल में हारी हो, लेकिन उसने देशवासियों का दिल जीत लिया. प्रधानमंत्री ने बताया कि विश्व कप की समाप्ति के बाद, जब वो महिला खिलाड़ियों से मिले, तो उन्होंने कहा था कि वे अपने दिमाग से असफल होने की बात निकाल दें. भले ही आपने मैच जीता हो या नहीं, आपने निश्चित तौर पर देशवासियों का दिल जीत लिया. मोदी ने कहा, “मैं उनके चेहरे पर तनाव देख सकता था. मैंने कहा, देखिए, यह मीडिया का युग है. इस कारण उम्मीदें इस स्तर पर पहुंच गई हैं कि अगर कोई पहले से तय सफलता हासिल नहीं करता है, तो यह निराशा यहां तक कि असंतोष में तब्दील हो जाती है.” प्रधानमंत्री ने कहा, “यह पहली बार हुआ है कि हमारी बेटियां भले ही विश्व कप जीतने में सफल न रही हों, लेकिन 125 करोड़ भारतीयों ने इस हार के भार को बेटियों के कंधों पर रखने के बजाए अपने कंधों पर ले लिया.”

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डॉ. कलाम की प्रतिमा के आगे गीता रखने पर हुआ विवाद

रामेश्वरम (तमिलनाडु) : पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई को पीकारुंबू में कलाम की वीणा बजाते हुए लकड़ी से बनी एक प्रतिमा का अनावरण किया था. बाद में कलाम की इस प्रतिमा के आगे गीता रखी गयी थी लेकिन विवाद खड़ा होने पर प्रतिमा के साथ कुरान और बाइबल भी रख दी गयी. 

दरअसल 27 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उनके गृहनगर पीकारुंबू में कलाम की वीणा बजाते हुए लकड़ी से बनी एक प्रतिमा का अनावरण किया था. साथ ही उन्होंने रामेश्वरम में एक स्मारक का उद्घाटन भी किया था, पीएम ने पूर्व राष्ट्रपति के गृह नगर में उस जगह पर बने स्मारक को देशवासियों को समर्पित किया जहां मिसाइल मैन के पार्थिव शरीर को दफनाया गया था.

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के स्मारक के उद्घाटन के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुये पीएम ने कहा कि रामेश्वरम की धरती को छूना एक महान सम्मान है जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उन्होंने कहा कि रामेश्वरम एक गहन धार्मिक केंद्र भी है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इस धरती पर कलाम जैसी शख्सियत ने जन्म लिया जो एक ‘विचारक और युवाओं के लिये प्रेरणास्रोत थे।’

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इस्तीफा देने से पहले नीतीश ने लालू को फोन कर कहा- ‘मुझे माफ कर दीजिए’

नई दिल्लीः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होने से पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से फोन पर बात की थी. मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक नीतीश ने लालू यादव को अपने फैसले से अवगत करा दिया था. महागठबंधन की सरकार में आरजेडी सबसे बड़ा दल था इसलिए नीतीश ने सबसे लालू यादव को अपना फैसला बताया था. लालू ने नीतीश से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए भी कहा था. हालांकि इसके विपरीत मीडिया को दिए बयान में लालू ने कहा था कि नीतीश ने अचानक फैसला ले लिया और इसमें नीतीश की बीजेपी के साथ फिक्सिंग थी. हम आपको बताते हैं कि 26 जुलाई बुधवार की शाम को इस्तीफा देने से पहले नीतीश कुमार ने लालू यादव से क्या कहा.  

नीतीश के बीजेपी के साथ जाने के फैसले पर शरद यादव ने तोड़ी चुप्पी

सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार ने महागठबंधन के सीएम के रूप में इस्तीफा देने से पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को फोन लगाया और कहा “लालू जी, मुझे माफ कर दीजिए लेकिन 20 माह तक सरकार चलाने के बाद मैं इसे अब और नहीं चला सकता. मैं अपना पद छोड़ने जा रहा हूं.” हालांकि लालू ने उन्हें अपने फैसले पर विचार करने के लिए कहा था. लगभग आधा घंटे के बाद सभी न्यूज चैनलों पर यह खबर प्रसारित हो गई कि नीतीश कुमार ने लालू और कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है. बाद में तस्वीर सामने आई कि जेडीयू, बीजेपी के सहयोग से सरकार बनाने जा रही है.

‘भोग’ का मतलब नीतीश से ज्यादा कौन समझता है, जो 12 साल में छह बार सीएम बना: लालू यादव

अगले दिन 27 जुलाई को नीतीश कुमार ने बीजेपी के समर्थन से छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और 28 जुलाई शुक्रवार को बिहार विधानसभा में बहुमत भी साबित कर दिया. इस दौरान दोनों ही पक्षों से बयानों के तीर चले और एक-दूसरे पर आरोपों का सिलसिला आज तक जारी है. लालू यादव के बेटे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने तो नीतीश कुमार पर सीधा हमला करते हुए उन्हें चुनौती तक दे दी थी कि अगर नीतीश कुमार में हिम्मत होती तो मुझे सीधे बर्खास्त करते. नीतीश कुमार ने महागठबंधन को धोखा देने का काम किया है.

लालू ने शरद यादव को अपने पाले में करने के लिए याद दिलाए ‘संघर्ष के दिन’ 

इस पर नीतीश कुमार ने पलटवार करते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार को ढकने के लिए नहीं किया था गठबंधन. सेक्युलरिज्म को भ्रष्टाचारा की ढाल नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कहा कि उनका फैसला बिहार के हित में है और समय आने पर वह अन्य सवालों का भी जवाब देंगे. इसके बाद सदन में हुई वोटिंग में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन को बहुमत के 122 के आंकड़े से ज्यादा 131 विधायकों का समर्थन मिला. जबकि विपक्ष को 108 वोट मिले.  

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पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में बाढ़ प्रभावित किसानों का किया जिक्र

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘मन की बात’ अपने भाषण की शुरुआत बारिश से बेहाल क्षेत्रों का जिक्र करते हुए की. पीएम मोदी ने कहा कि कभी-कभी प्राकृतिक आपदाएं देश के लिए ज्यादा नुकसान दायक साबित होती है. पीएम मोदी ने देश में बाढ़ प्रभावित राज्यों गुजरात, पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि सेना और एनडीआरएफ के जवान आपदा पीड़ितों की सेवा के लिए जुटे है. उन्होंने कहा कि बाढ़ से जो किसानों को जो नुकसान होता है उसके लिए इंशोरेंस कंपनियों से भी बात की है. ताकि किसानों का नुकसान थोड़ा कम हो.  

पीएम ने कहा कि पानी के पास विनाश की भी ताकत है. पर्यावरण में आ रहे बदलाव से बहुत कुछ बदल रहा है. प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार सब देख रही है. मदद का भरसक प्रयास कर रही है.  लोगसेवा भाव से आगे आ रहे हैं.भारत सरकार की ओर से सेना, एनडीआरएफ के जवान सेवा में लगे हैं. बाढ़ में किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है. सरकार ने इंश्योरेंस कंपनी को एक्टिव करने की योजना बनाई है. ताकि किसानों को समय पर क्लेम मिले है. 

इसके बाद पीएम मोदी ने अपने भाषण में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) पर बात की. पीएम ने जीएसटी से जुड़े सवाल पर एक पर जनता के सवाल से जुड़ा फोन भी सुनाया. पीएम मोदी ने जीएसटी से फायदे बताए. पीएम मोदी ने बताया कि जीएससीट लागू होने से देश में व्यापार आसान हुआ है. 

पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी को लेकर लोगों  में उत्साह है. कई लोगों में जिज्ञासा है. उन्होंने बताया कि गुड़गांव की नीतू ने कहा कि जीएसटी के लागू  होने का असर बताएं. पीएम ने कहा कि जीएसटी को लागू हुए एक महीना हो रहा है. इससे फायदा हुआ है. चीजें सस्ती हुई हैं. पीएम ने कहा कि उत्तर पूर्व से लोगों ने कहा कि अब काम आसान हो गया है. ट्रांसपोर्ट पर इसका अच्छा असर पड़ा है. सामान की आवाजाह बढ़ी है. लोगों का सामान जल्द पहुंच रहा है. सुविधा हो रही है. पहले इस सेक्टर का काफी समय पेपर वर्क पर लगता था. 

पीएम ने कहा कि जीएसटी ने अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है. पीएम ने कहा कि इसने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है. दुनिया की यूनिवर्सिटी के लिए एक विषय बनेगा. इतने बड़े देश में सफलतापूर्वक लागू करना और आगे बढ़ना एक सफलता है. जीएसटी लागू करने में सभी राज्यों की भागीदारी है और सभी की जिम्मेदारी है. सभी राज्यों ने सर्वसम्मति से लागू किया है. 

जीएसटी के पहले जिसका दाम जो था वह एक मोबाइल पर उपलब्ध है. वन नेशन वन टैक्स के इस प्रावधान पर तहसील तक के स्तर के अधिकारियों ने काफी मेहनत की है. इससे दुकानदार और उपभोक्ता में विश्वास बढ़ा है.

रात 8 बजे दोबार सुन सकेंगें

हिंदी प्रसारण के तुरंत बाद क्षेत्रीय भाषाओं में भी इसका प्रसारण आकाशवाणी से किया जाएगा. रात 8 बजे इस कार्यक्रम को क्षेत्रीय भाषाओं में दोबारा सुना जा सकता है

 

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बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए असम जाएंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम में आई बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए एक अगस्त को राज्य का दौरा करेंगे. असम में बाढ़ से अब तक 79 लोगों की मौत हुई है. वहीं राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश का पानी घुस गया जबकि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन हुआ . पश्चिम बंगाल में तीन और लोगों की मौत हुई. वहीं गुजरात में आई बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने और इससे हुए नुकसान का आकलन करने के लिए आज तीन केंद्रीय मंत्रियों ने राज्य का दौरा किया.

छह जिले अब भी बाढ़ की चपेट में

असम के बाढ़ का पानी घटा है लेकिन छह जिले अब भी चपेट में हैं. अब भी विभिन्न राहत शिविरों में दो हजार से ज्यादा लोग है. प्रधानमंत्री मोदी एक अगस्त को असम की यात्रा करके हाल में आई बाढ़ से संबंधित मामलों की समीक्षा करेंगे. राज्य में बाढ़ की वजह से 79 लोगों की मौत हुई है. राजभवन ने कहा कि असम के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए अपनी एक महीने की तनख्वाह मुख्यमंत्री राहत कोष में दी है.

वहीं राष्ट्रीय राजधानी में आसमान साफ रहा और अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया जो मौसम के औसत तापमान से एक डिग्री ज्यादा था. मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि न्यूनतम तापमान 27.3 डिग्री दर्ज किया गया. शहर में सुबह साढ़े आठ बजे तक 4.9 मिमि बारिश दर्ज की गई है.

राजस्थान में भारी बारिश

अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में भारी बारिश और जवाई बांध से छोड़ा गया पानी जालोर और आसपास के इलाकों में घुस गया. शनिवार की शाम बांध से 70,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. यह बांध पश्चिमी राजस्थान में सबसे बड़ा है. भारी बारिश की वजह से पाल और सिरोही जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ जहां कई गांव हाई अलर्ट पर है और राहत और बचाव कार्य चल रहा है. जालोर के कलेक्टर ने कहा कि जालोर में कई गांवों में बाढ़ आ गई है और कुछ सड़कें बह गईं. राहत कार्य चल रहा है.

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महबूबा ने की LoC के आर-पार ट्रेडिंग की पैरवी, कहा- PoK सदस्य भी J&K विस में चुने जाएं

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार (29 जुलाई) को कहा कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नियंत्रण रेखा के आर-पार होने वाले व्यापार पर रोक लगाने की मंजूरी नहीं देगी तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के साथ नियंत्रण रेखा के आर-पार और रास्ते खोलने की दिशा में काम करती रहेगी. उन्होंने यहां पार्टी के 18वें स्थापना दिवस पर एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ से सदस्यों को विधानसभा में नामांकित करने का भी आह्वान किया ताकि साल में एक बार संयुक्त बैठक किए जा सके.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘वाघा सीमा के जरिये काफी मुश्किलें आती हैं, वहां से चरस और गांजा आता है, लेकिन कोई उसे बंद करने की बात नहीं कर रहा. श्रीनगर-मुजफ्फराबाद रोड पर केवल एक गलती होने के कारण, हमें उसे बंद करने की बात नहीं करनी चाहिए. हमें ऐसा नहीं होने देना चाहिए.’ गत 21 जुलाई को पुलिस ने पीओके से आयी एक ट्रक से 66.5 किलोग्राम हेरोइन और ब्राउन शुगर जब्त किया था जिसकी कीमत 300 करोड़ रुपये है. ऐसी भी खबरें हैं कि कश्मीर में आतंकवाद के वित्तपोषण की जांच कर रही एनआईए नियंत्रण रेखा के आर-पार के मार्गों पर व्यापार बंद करने की सिफारिश कर सकती है.

महबूबा ने कहा, ‘हम और मार्ग खोलने के पक्ष में हैं. (सीमा प्रवेश स्थलों) पर बैंकिंग जैसी सुविधाएं होनी चाहिए. (ट्रकों के लिए) वहां (फुल) बॉडी स्कैनर होने चाहिए ताकि हमें पता चले कि वहां से क्या आ-जा रहा है.’ उन्होंने अविभाजित जम्मू-कश्मीर के लिए एक संयुक्त विधायिका के विचार पर चर्चा करते हुए कहा, ‘हमारे विधानसभा में उस तरफ के कश्मीर के लिए सीटें आरक्षित हैं. हमें उन सीटों के लिए नामांकन करने को लेकर मिलकर फैसला लेना चाहिए. हमें फैसला करना चाहिए कि इस विधानसभा की हर साल एक बार इस कश्मीर और एक बार उस कश्मीर में बैठक हो ताकि हम पर्यटन, यात्रा और शारदा पीठ खोलने के बारे में बात कर सकें.’ 

पीडीपी अध्यक्ष ने छात्रों के आदान प्रदान के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, ‘मैं दूसरी तरफ के कश्मीर के लोगों से अपील करता हूं. आप यहां 15 दिन के दौरे पर अपने बच्चों को भेजें तथा हम भी अपने बच्चों को वहां भेजेंगे. वे देखेंगे कि हम यहां कैसे रहते हैं और हमारे बच्चे देखेंगे कि वे वहां कैसे रहते हैं.’ मुख्यमंत्री ने अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा, विपक्षी दलों नेशनल कांफ्रेंस तथा कांग्रेस सहित मुख्यधारा की सभी पार्टियों से एक साथ आने और कश्मीर में रक्तपात के अंत का रास्ता तलाशने की अपील की.

महबूबा के झंडा वाले बयान से भाजपा नाखुश, कहा- आर्टिकल 35 ए ‘पवित्र गाय नहीं जिसे छुआ नहीं जा सकता’

अपनी सहयोगी और जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की झंडा टिप्पणी पर हैरानी प्रकट करते हुए भाजपा ने शनिवार (29 जुलाई) को जोर दिया कि राज्य को खास दर्जा प्रदान करने वाला संविधान का अनुच्छेद 35 ए ‘पवित्र गाय नहीं है जिसे छुआ नहीं जा सकता.’ भाजपा की राज्य इकाई ने कहा कि पार्टी पीडीपी के साथ गठबंधन के एजेंडा के पक्ष में खड़ी है और मौजूदा संवैधानिक रुख के बदलाव की मांग नहीं करती, साथ ही यह भी सत्य है कि अनुच्छेद 35-ए कानून के किसी अन्य प्रावधान से ज्यादा राज्य के लिए नुकसानदेह है. पार्टी ने कहा कि राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती कश्मीरी संस्कृति के सूफी मूल्यों की रक्षा करना है जो कि घाटी में अलगावाद और इस्लामिक कट्टरपंथियों से हमला झेल रही है.

पीएम मोदी की सराहना करते हुए सीएम महबूबा ने कहा, मेरे लिए ‘भारत का मतलब इंदिरा गांधी’

जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (28 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की, लेकिन कहा कि उनके लिए ‘भारत का मतलब इंदिरा गांधी’ हैं. राष्ट्रीय राजधानी में कश्मीर से संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि टेलीविजन के प्राइम-टाइम में जिस तरह के भारत को दिखाया जा रहा है उससे वह निराश हैं, क्योंकि यह भारत तथा कश्मीर के बीच की खाई को गहरा करता है. उन्होंने कहा कि वह उस भारत को नहीं जानती, जिसे ‘उत्तेजित’ टेलीविजन चर्चाओं में दिखाया जाता है.

मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे यह कहते हुए दुख होता है कि टेलीविजन एंकर भारत की जिस छवि को पेश करते हैं, वह भारत के बारे में नहीं है, जिस भारत को मैं जानती हूं उसके बारे में नहीं है.” नेहरू-गांधी परिवार को नापसंद करने वाले संघ परिवार की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे लिए, भारत का मतलब इंदिरा गांधी हैं. जब मैं बड़ी हो रही थी, उन्होंने मेरे लिए भारत का प्रतिनिधित्व किया. हो सकता है कि कुछ लोगों को वह पसंद ना हों, लेकिन वही भारत थीं.”

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अब्दुल बासित ने की भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता की वकालत

अब्दुल बासित ने की भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता की वकालत

बासित ने कहा, ‘वार्ता जरूरी है. बातचीत हमारी समस्याओं को सुलझाने के लिए एक पूर्वापेक्षा और एक जरूरत है.’ (फाइल फोटो)

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उमर अब्दुल्ला ने कहा, पाकिस्तान ने नहीं पैदा की कश्मीर घाटी में समस्या

नई दिल्ली: जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार (29 जुलाई) को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में किसी भी समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, लेकिन पाकिस्तान ने कश्मीर घाटी में हिंसक अस्थिरता पैदा नहीं की है. यहां कश्मीर पर आयोजित एक संगोष्ठी में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अब्दुल्ला ने कहा कि वह इस बात से वाकिफ हैं कि घाटी में किसी भी समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है. अब्दुल्ला ने कहा, “हमें पता है कि हर समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, लेकिन हमें यह भी पता है कि वे 2008, 2010 और 2016 में उपजे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के पीछे नहीं थे.”

पूर्व विदेश राज्यमंत्री अब्दुल्ला बीते तीन दशकों के दौरान कश्मीर घाटी में पनपे तीन हिंसक विरोध प्रदर्शनों का संदर्भ दे रहे थे. नई दिल्ली कश्मीर घाटी में पनपे इन हिंसक विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप इस्लामाबाद पर लगाता रहा है, जिससे पाकिस्तान हमेशा इंकार करता रहा है. अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में मुख्यधारा की राजनीति का प्रभाव सिकुड़ने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार सहित हम सभी को लेनी होगी.

उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने और केंद्र सरकार तथा अलगाववादियों के बीच बातचीत की पहल जैसे चुनावी वादे पूरे कर पाने में असफलता के चलते राज्य में मुख्यधारा के राजनीतिज्ञों की विश्वसनीयता घटी है. अब्दुल्ला ने कहा कि पीडीपी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि वे केंद्र सरकार और हुर्रियत के बीच बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत शुरू करवाएंगे. लेकिन पीडीपी-भाजपा गठबंधन अपने वादे पूरे नहीं कर सका.

महबूबा ने की LoC के आर-पार ट्रेडिंग की पैरवी, कहा- PoK सदस्य भी J&K विस में चुने जाएं

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार (29 जुलाई) को कहा कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नियंत्रण रेखा के आर-पार होने वाले व्यापार पर रोक लगाने की मंजूरी नहीं देगी तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के साथ नियंत्रण रेखा के आर-पार और रास्ते खोलने की दिशा में काम करती रहेगी. उन्होंने यहां पार्टी के 18वें स्थापना दिवस पर एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ से सदस्यों को विधानसभा में नामांकित करने का भी आह्वान किया ताकि साल में एक बार संयुक्त बैठक किए जा सके.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘वाघा सीमा के जरिये काफी मुश्किलें आती हैं, वहां से चरस और गांजा आता है, लेकिन कोई उसे बंद करने की बात नहीं कर रहा. श्रीनगर-मुजफ्फराबाद रोड पर केवल एक गलती होने के कारण, हमें उसे बंद करने की बात नहीं करनी चाहिए. हमें ऐसा नहीं होने देना चाहिए.’ गत 21 जुलाई को पुलिस ने पीओके से आयी एक ट्रक से 66.5 किलोग्राम हेरोइन और ब्राउन शुगर जब्त किया था जिसकी कीमत 300 करोड़ रुपये है. ऐसी भी खबरें हैं कि कश्मीर में आतंकवाद के वित्तपोषण की जांच कर रही एनआईए नियंत्रण रेखा के आर-पार के मार्गों पर व्यापार बंद करने की सिफारिश कर सकती है.

आग से खेलने जैसा है जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे पर बहस: उमर

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य को मिले विशेष दर्जे पर बहस की मांग कर रहे लोग ‘आग से खेल रहे हैं’ क्योंकि यह मुद्दा राज्य के भारत में विलय से संबंधित है. उनका यह बयान उस वक्त आया है जब एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय से कहा कि राजग सरकार अनुच्छेद 356 पर ‘व्यापक बहस’ चाहती है.

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बेंगलुरु के इस ऑलीशान रिसॉर्ट में ठहरे हैं कांग्रेस के 44 MLA, देखें INSIDE PICS

बेंगलुरु : गुजरात के 44 कांग्रेस विधायक शनिवार सुबह अहमदाबाद से आने के बाद बेंगलुरु के पास के एक रिसार्ट में डेरा जमाए हुए हैं. पार्टी की राज्य इकाई के एक पदाधिकारी ने पहचान नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि गुजरात के हमारे सभी विधायकों ने मुंबई से होते हुए अहमदाबाद से दो समूहों में शहर की उड़ान ली और वे मैसूर रोड पर बिदादी में इग्लेटन गोल्फ रिसार्ट में ठहरे हुए हैं.

यह रिसार्ट बेंगलुरु ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र में स्थित है, जिसका प्रतिनिधित्व कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार के छोटे भाई डीके सुरेश करते हैं. पदाधिकारी ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने हमें शुक्रवार रात राज्य में इन लोगों के रुकने के दौरान उनकी देखभाल करने के निर्देश दिए. विधायकों को दूसरी जगह इसलिए भेज दिया गया ताकि गुजरात में आठ अगस्त को राज्यसभा के लिए होने वाले चुनाव के मद्देनजर पार्टी की प्रतिद्वंदी भाजपा उन्हें अपने जाल में नहीं फंसा सके.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल पांचवें कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. पदाधिकारी ने बताया कि उसके पास यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि वे कितने दिनों तक रुकेंगे, उसे बस उन लोगों की देखभाल करने के निर्देश दिए गए हैं. गौरतलब है कि गुरुवार को गुजरात में कांग्रेस छह विधायकों ने पार्टी छोड़ दी. इसके बाद पार्टी ने 44 विधायकों को दूसरी जगह भेजने का फैसला किया.

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गुजरात विधानसभा में 182 सीटें हैं. वरिष्ठ कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार रात रवाना होने से पहले अहमदाबाद हवाईअड्डे पर संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने (भाजपा नेताओं ने) जो गोवा, मणिपुर और बिहार में किया, वहीं वे गुजरात में भी करने की कोशिश कर रहे हैं. हमारे विधायकों को धमकाया जा रहा है या उन्हें पैसे का लालच दिया जा रहा है.

ये भी पढ़ें : रातोंरात अपने 46 विधायकों को गुजरात से बेंगलुरु ले गई कांग्रेस

एक आईपीएस अधिकारी के जैसे लोग, जो फर्जी मुठभेड़ मामले में 8-9 सालों से सलाखों के पीछे था, उसका इस्तेमाल हमारे विधायकों को अगवा करने, पैसे का लालच देने और उन्हें धमकाने के लिए किया जा रहा है. असुरक्षा और आतंक का माहौल है, इसलिए हमारे विधायकों को सुरक्षित जगह ले जाया जा रहा है. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने 26 जुलाई को राज्यसभा चुनाव के लिए अहमदाबाद में अपना नामांकन दाखिल किया था. उन्हें फिर से निर्वाचित होने के लिए पहले दौर में 47 मतों की जरूरत है.

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महबूबा की चेतावनी, ‘अगर ऐसा हुआ तो कश्मीर में किसी के हाथ में नहीं होगा तिरंगा’

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने चेतावनी दी है कि अगर जम्मू कश्मीर के लोगों को मिले विशेषाधिकारों में किसी तरह का बदलाव किया गया तो राज्य में तिरंगा को थामने वाला कोई नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि एक तरफ ‘हम संविधान के दायरे में कश्मीर मुद्दे का समाधान करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम इसपर हमला करते हैं.’ 

‘कौन यह कर रहा है और क्यों’

उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, ‘कौन यह कर रहा है. क्यों वे ऐसा कर रहे हैं (अनुच्छेद 35 एक को चुनौती दे रहे हैं). मुझे आपको बताने दें कि मेरी पार्टी और अन्य पार्टियां जो तमाम जोखिमों के बावजूद (जम्मू कश्मीर में) राष्ट्रीय ध्वज हाथों में रखती हैं—— मुझे यह कहने में तनिक भी संदेह नहीं है कि (अगर इसमें कोई बदलाव) किया गया तो कोई भी इसे (राष्ट्रीय ध्वज) को थामने वाला नहीं होगा.’ 

‘आप उन शक्तियों को कमजोर कर रहे हैं जो भारत पर यकीन करते हैं’

उन्होंने कहा, ‘मुझे साफ तौर पर कहने दें. यह सब करके (अनुच्छेद 35 ए) को चुनौती देकर, आप अलगाववादियों को निशाना नहीं बना रहे हैं. उनका (अलगाववादियों का) एजेंडा अलग है और यह बिल्कुल अलगाववादी है.’ उन्होंने कहा, ‘बल्कि, आप उन शक्तियों को कमजोर कर रहे हैं जो भारतीय हैं और भारत पर विश्वास करते हैं और चुनावों में हिस्सा लेते हैं और जो जम्मू कश्मीर में सम्मान के साथ जीने के लिये लड़ते हैं. यह समस्याओं में से एक है.’ बता दें साल 2014 में एक एनजीओ ने रिट याचिका दायर करके अनुच्छेद 35 ए को निरस्त करने की मांग की थी. मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है.

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‘कश्मीर भारत की परिकल्पना है’

महबूबा ने कहा कि कश्मीर भारत की परिकल्पना है. उन्होंने कहा,’बुनियादी सवाल है कि भारत का विचार कश्मीर के विचार को कितना समायोजित करने को तैयार है.  यह बुनियादी निचोड़ है.’ उन्होंने याद किया कि कैसे विभाजन के दौरान मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद कश्मीर ने दो राष्ट्रों के सिद्धांत और धर्म के आधार पर विभाजनकारी बंटवारे का उल्लंघन किया और भारत के साथ रहा.

‘भारत के संविधान में जम्मू कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान हैं’

उन्होंने कहा, ‘भारत के संविधान में जम्मू कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान हैं. दुर्भाग्य से समय बीतने के साथ कहीं कुछ हुआ कि दोनों पक्षों ने बेईमानी शुरू कर दी.’ उन्होंने केंद्र और राज्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि दोनों पक्ष हो सकता है अधिक लालची हो गए हों और पिछले 70 वर्षों में राज्य को भुगतना पड़ा. उन्होंने कहा, ‘समस्या का निवारण करने की बजाय हमने सरकार को बर्खास्त करने या साजिश, राजद्रोह के आरोप लगाने जैसे प्रशासनिक कदम उठाए.’ उन्होंने कहा, ‘इन प्रशासनिक कदमों ने कश्मीर के विचार का समाधान करने में हमारी मदद नहीं की है——।’

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