Monthly Archives: August 2017

ज़ी जानकारी: मुशर्रफ की Slip Of Tounge, दाउद इब्राहीम को लेकर किया खुलासा!

दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है ये बात भारत पिछले कई वर्षों से लगातार कहता आया है. लेकिन हर बार पाकिस्तान ने हमारी बातों को मानने से इनकार किया. हालांकि, हमारे पड़ोस में जनरल परवेज़ मुशर्रफ जैसे लोग भी हैं जो कभी-कभार ग़लती से सच बोल देते हैं. इस ग़लती को आम बोल-चाल की भाषा में Slip Of Tounge कहा जाता है. पाकिस्तान के एक News Channel को दिए Interview के दौरान जनरल परवेज़ मुशर्रफ से भी यही ग़लती हो गई.

उन्होंने बातों-बातों में ये बात स्वीकार कर ली कि हां….दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है उन्होंने उसकी Location भी बता दी और जब उन्हें अहसास हुआ…कि उनसे ग़लती हो गई है….तो उन्होंने पूरे मामले को U-Turn देने की कोशिश की और ये कहा कि पाकिस्तान दाऊद को पकड़ने में भारत की मदद क्यों करेगा? पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ का ये बयान आपको सुनना चाहिए.

कारगिल युद्ध में पीठ दिखाकर भागने वाले जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ आजकल बहुत परेशान हैं…क्योंकि, पाकिस्तान में उनकी Market Value फिलहाल न्यूनतम स्तर पर है…और वो अक्सर ऐसे बयान देते रहते हैं…जिससे उनकी पब्लिसिटी वाली भूख मिट सके. लेकिन, दाऊद इब्राहिम को लेकर उन्होंने जो कुछ भी कहा है….उससे अब वो पीछे नहीं हट सकते. क्योंकि ये सबकुछ उन्होंने कैमरे पर कहा है.

वैसे मुशर्रफ़ एक दूसरे Interview के दौरान ये भी मान चुके हैं कि पाकिस्तान के पास सिर्फ़ फौज नहीं.. बल्कि दूसरे Source भी हैं.. यहां दूसरे Source का मतलब है आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान एक अरसे से भारत के खिलाफ करता रहा है मुशर्रफ की नज़रों में हाफिज़ सईद जैसे आतंकवादी किसी Hero से कम नहीं हैं.

परवेज़ मुशर्रफ़ की पाकिस्तान में उतनी ही हैसियत है जितनी संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान की हैसियत है और वैसे भी मुशर्रफ के ग्रह इन दिनों अच्छे नहीं चल रहे. दाऊद इब्राहिम को लेकर दिए गए बयान के बाद वो फंस चुके हैं.

उधर पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के मामले में परवेज़ मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है. आपको बता दें, कि जब बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की गई थी…उस वक्त परवेज़ मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे. और इस हत्या के मामले में वो भी एक आरोपी हैं. आज पाकिस्तान की Anti-Terrorism Court ने परवेज मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित करते हुए उनकी संपत्ति को जब्त करने का आदेश भी दिया है.

वैसे सूचना ये भी है, कि Trump प्रशासन ने पाकिस्तान को 255 मिलियन डॉलर की सैन्य आर्थिक मदद दी है. लेकिन ये मदद बहुत कड़ी शर्तों के साथ दी गई है. पाकिस्तान इस सैन्य आर्थिक मदद का इस्तेमाल तभी कर पाएगा, जब वो अफगानिस्तान में जारी आतंक के नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा.

हालांकि, ये भी अपने आप में एक विरोधाभास ही है. क्योंकि कुछ दिन पहले ही Donald Trump ने सीधे-सीधे पाकिस्तान को आतंकवाद और आतंकवादियों का साथ देने वाला देश बताया था और भारत से रिश्ते मज़बूत करने की वकालत की थी.

सवाल ये है कि इतने कम समय में पाकिस्तान ने ऐसा कौन सा तीर मार दिया…कि उसे इतनी बड़ी रकम दी गई है. क्या ये अमेरिका का दोहरा चरित्र नहीं है? जिसमें वो एक तरफ पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने का नाटक करता है और दूसरी तरफ उसे पैसा भी देता है.

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कैबिनेट मंत्री राजीव रूडी और फग्गन कुलस्ते ने दिया इस्तीफा, उमा ने की इस्तीफे की पेशकश!

नई दिल्ली: मोदी कैबिनेट में कौशल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे राजीव प्रताप रूडी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है इसके साथ ही हेल्थ ऐंड फैमिली वेलफेयर राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि इस्तीफे का कारण अभी तक सामने नहीं आया है. राजीव प्रताप रूडी बिहार के सारण से लोकसभा सांसद हैं और केंद्र सरकार में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे.

मीडिया रिपोर्टस की मानें तो खबरें हैं केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफे की पेशकश की है. 

चर्चा है कि अब जदयू के कुछ सांसदों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में नुमाइंदगी दी जा सकती है. जदयू महासचिव आरसीपी सिंह का नाम भी इस क्रम में चल रहा है. बिहार भाजपा से मोदी कैबिनेट में पांच मंत्री थे अब चार रह गए हैं. राधामोहन सिंह, धर्मेंद्र प्रधान, रविशंकर प्रसाद और गिरिराज सिंह बिहार कोटे से केंद्रीय मंत्री हैं. लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान और रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी मंत्रिमंडल में हैं.

चर्चा है कि रूडी को पार्टी अब संगठन विस्तार की जिम्मेदारी सौंप सकती है.यह भी कहा जा रहा है कि ब्रिक्स देशों की बैठक के लिए चीन जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं.मोदी कैबिनेट में फेरबदल के कयासों के बीच अब यह अटकलें लगने लगी हैं कि जिन मंत्रियों को हटाकर संगठन में लाया जाना है, उनमें राजीव प्रताप रूडी के अलावा गिरिराज सिंह शामिल हैं.

इनके अलावा पंजाब के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय सांपला और यूपी के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री महेंद्र पांडे भी शामिल हैं. कलराज मिश्र को भी उनकी आयु की वजह से इस बार कैबिनेट से संगठन में लाया जा सकता है या फिर राज्यपाल बनाया जा सकता है. पिछले दिनों लगातार रेल हादसों के बाद रेलमंत्री सुरेश प्रभु भी इस्तीफा दे चुके हैं. प्रधानमंत्री ने उन्हें इंतजार करने के लिए कहा है.

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री रूडी के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थे. रूडी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी एक साल के लिए उड्डयन मंत्री रह चुके हैं. बीजेपी सूत्रों का कहना है कि हाल ही में अमित शाह ने उपेंद्र कुशवाहा, राजीव प्रताप रूडी और चौ. बीरेंद्र सिंह को बुलाया था. यह माना जा रहा है कि चौ. बीरेंद्र सिंह को भी कुछ और जिम्मेदारी दी जा सकती है. 

गुरुवार को खुद अरुण जेटली ने भी संकेत दे दिए. मीडिया के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि रक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मेरे पास ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी.
संभावना है कि शनिवार शाम या रविवार सुबह कैबिनेट का विस्तार हो सकता है.

गौरतलब है कि गुरुवार (31 अगस्त) को भाजपा प्रमुख अमित शाह ने मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की थी. फिलहाल मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा जोरों पर हैं.

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भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटकर 5.7 फीसदी, तीन साल के निचले स्तर

नई दिल्ली: चालू वित्त वर्ष की जून में खत्म हुई तिमाही के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी 5.7 फीसदी की वृद्धि दर के साथ 31.10 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के दौरान इसकी वृद्धि दर 6.1 फीसदी थी.

अगर हम जीडीपी की वृद्धि दर की तुलना एक साल पहले की समान तिमाही से करें तो इसमें काफी अधिक गिरावट दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही के दौरान जीडीपी की रफ्तार 7.9 फीसदी थी.चीन ने जनवरी-मार्च और अप्रैल-जून तिमाहियों दोनों तिमाहियों में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. इससे पिछली तिमाही :जनवरी मार्च : में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही थी. 2016-17 की पहली तिमाही की संशोधित वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत थी. इससे पहले जनवरी-मार्च, 2014 में जीडीपी की वृद्धि दर 4.6 प्रतिशत दर्ज हुई थी.

सालाना आधार पर विनिर्माण क्षेत्र में सकल मूल्य वर्धन भारी गिरावट के साथ 1.2 प्रतिशत रह गया. एक साल पहले समान तिमाही में यह 10.7 प्रतिशत रहा था. इसकी मुख्य वजह यह रही कि एक जुलाई को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने की वजह से कंपनियां उत्पादन के बजाय पुराना स्टॉक निकालने पर ध्यान दे रही थीं.

कार, एफएमसीजी और परिधान कंपनियों का ध्यान अपना स्टॉक निकालने पर
अलग से जारी एक अन्य आधिकारिक आंकड़े के अनुसार जुलाई महीने में आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर घटकर 2.4 प्रतिशत पर आ गई है. मुख्य रूप से कच्चे तेल, रिफाइनरी उत्पादों, उर्वरक और सीमेंट उत्पादन में गिरावट से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर घटी है. नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी को लेकर अनिश्चितता की वजह से कार, एफएमसीजी और परिधान कंपनियों का ध्यान अपना स्टॉक निकालने पर था.

पिछले साल नवंबर में ऊंचे मूल्य के नोटों को बंद किए जाने से जनवरी मार्च तिमाही में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 6.1 प्रतिशत पर आ गई. जून तिमाही में यह और घटकर 5.7 प्रतिशत पर रह गई. मुख्य सांख्यिकीविद टीसीए अनंत ने जीएसटी से पहले स्टॉक घटने को जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट की प्रमुख वजह बताया है. कंपनियों को नई व्यवस्था के अनुरूप अपने मौजूदा स्टॉक की नए सिरे से लेबलिंग करनी पड़ी.

अनंत ने हालांकि कहा कि जीडीपी की वृद्धि दर में गिरावट का नोटबंदी से कोई संबंध नहीं है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़े बाजार की उम्मीदों से कम रहे हैं. बाजार का अनुमान था कि जीडीपी की वृद्धि दर जनवरी मार्च के 6.1 प्रतिशत के आंकड़े से कुछ ऊंची रहेगी. आंकड़ों के अनुसार कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर भी कम रही है. पहली तिमाही में इस क्षेत्र में जीवीए 2.3 प्रतिशत रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2.5 प्रतिशत था.

पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन ने कहा कि पहली तिमाही में जीएसटी की वजह से जीडीपी कमजोर रहने का अनुमान लगाया जा रहा था. सेन ने कहा, ‘‘जहां तक मेरा मानना है, यह मेरे विचार से 0.4 प्रतिशत कम रही है. मैं पूरे साल के लिए इसके 6.3 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद कर रहा हूं.’’ क्रिसिल के डी के जोशी ने जीडीपी आंकड़ों को ‘निराशाजनक‘ बताया. उन्होंने कहा कि उम्मीद की जा रही थी कि वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहेगी.

एंजिल ब्रोकिंग के फंड मैनेजर मयूरेश जोशी ने कहा कि ‘‘आर्थिक वृद्धि दर पर यह दबाव जाहिरा तौर पर नोटबंदी के विलंबित प्रभाव और एक जुलाई को लागू माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से पहले उत्पादन गतिविधायों में गिरावट के चलते रहा क्यों कि विनिर्माताओं की मुख्य चिंता जीएसटी से पहले पुराने माल के निकालने की हो गयी थी.’

जिन आर्थिक गतिविधियों ने सालाना आधार पर सात प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की उनमें व्यापार, होटल, परिवहन और संचार तथा प्रसारण, लोक प्रशासन और रक्षा से संबंधित सेवाओं के अलावा बिजली, गैस, जलापूर्ति तथा अन्य यूटिलिटी सेवाएं शामिल हैं. इस अवधि में कृषि, वन एवं मत्स्यपालन, खनन, विनिर्माण, निर्माण और वित्तीय, बीमा, रीयल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर क्रमश: 2.3 प्रतिशत, -0.7 प्रतिशत, 1.2 प्रतिशत, 2 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत रही.

इस बीच, जुलाई अंत तक देश का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 92.4 प्रतिशत पर पहुंच गया. इसकी वजह विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा खर्च पहले करना है. वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में यह लक्ष्य का 73.7 प्रतिशत रहा था.

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‘जेटली को उम्मीद उन्हें दो-दो मंत्रालयों का भार अब नहीं संभालना पड़ेगा’

अटकलें हैं कि मंत्रिमडल का फेर बदल नजदीक है और उसमें ऐसे मंत्रियों का भार हलका किया जा सकता है.


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: गुरुवार अगस्त 31, 2017 – 05:06 PM IST

'जेटली को उम्मीद उन्हें दो-दो मंत्रालयों का भार अब नहीं संभालना पड़ेगा'

जेटली के पास इस समय वित्त मंत्रालय के साथ-साथ रक्षा विभाग भी है. (फाइल फोटो)

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जेल के बैरक से चिल्लाता राम रहीम, ‘मैं कि कित्ता ए, साड्डा कि कसूर ए…’

नई दिल्लीः खुद को भगवान बताने वाला बलात्कारी राम रहीम अब जेल की सलाखों के पीछे जोर जोर से चिल्लाता. लेकिन यहां उसकी सुनने वाली वो भीड़ नहीं है, जिसे वो संगत कहा करता था. राम रहीम को अब सच में भगवान याद आ रहे हैं. जेल के बैरक में न तो वो कुछ खा रहा है न ही किसी से बात कर रहा है. राम रहीम जेल में रोते-बिलखते चिल्ला-चिल्ला कर पुकार रहा है कि ‘मैं कि कित्ता ए, साड्डा कि कसूर ए…’ शाही जिंदगी जीने वाले राम रहीम के आसपास जेल में केवल दो नंबरदार ही हैं. मखमली बिस्तरों में सोने के आदी को जब कैदी बनाया गया तो जेल प्रशासन की तरफ से उसे एक चटाई और दो कंबल नसीब हुए. उसका गुनाह बेहद घिनौना है, लेकिन उसे चीखें मारकर रोते-बिलखते देख जेल के कई कैदी भी हक्के-बक्के रह गए.

राम रहीम पहले दिन तो जेल देखकर पूरी तरह घबरा-सा गया और अंदर जाने को राजी ही नहीं हुआ. जैसे-तैसे जेल प्रशासन उसे अप्रूवल ब्लॉक वाली जगह पर लेकर आया. सजा निर्धारित होने के बाद जब उसे 12 चक्की वाले अप्रूवल ब्लॉक में लाया गया तो उसका चेहरा काफी उतरा हुआ था, अंदर जाने से वह डर रहा था. राम रहीम की वजह से सभी 12 चक्कियों में रहने वाले दूसरे कैदियों को स्पेशल सेल तथा हाई सिक्योरिटी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया. राम रहीम के ब्लॉक में केवल दो नंबरदारों को ही उसके साथ वाली बैरक में रहने की इजाजत दी गई है.

यह भी पढ़ेंः दामाद का सनसनीखेज खुलासा, राम रहीम के मुंहबोली बेटी से थे संबंध

राम रहीम के आने से छिन गई है कैदियों की आजादी
हिंदी अखबार अमर उजाला ने जेल से नौ महीने की सजा काट कर 29 अगस्त को रिहा हुए दलित नेता डॉ. स्वदेश किराड के बयान के आधार पर लिखा है कि कैदी नंबर 8647 राम रहीम जब से जेल में कैदी बनकर आया है, दूसरे कैदियों की जेल के भीतर मिलने वाली ‘आजादी’ छिन गई है.सामान्य दिनों में कैदी जहां दिन के समय खुली हवा में हरे-भरे वातावरण के बीच सुविधानुसार हल्की-फुल्की खेल एवं अन्य मनोरंजन गतिविधियां कर लेते थे, राम रहीम के आने से सुरक्षा के मद्देनजर तमाम चीजों पर पाबंदियां लग गई. 28 अगस्त को फैसले वाले दिन सुरक्षा की दृष्टि से सभी कैदी एक तरह से नजर बंद कर दिए गए थे. जेल की पाठशाला में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट बनाई गई थी.

राम रहीम ने खाना-पीना छोड़ा
राम रहीम को जेल में घरेलू कपड़े पहने ही देखा गया. जिस दिन जेल में आया तो वह कुर्ता-सलवार और कमर पर चौड़ी काली पट्टी बांधे हुए था, लेकिन बाद में वह गहरे रंग की कैपरी और हलके रंग की टीशर्ट में नजर आया. नंबरदार जब उससे चाय-पानी और खाने-पीने के लिए पूछते हैं तो चुप्पी साधे रखता है. ज्यादा पूछने पर भी ठीक से जवाब नहीं देता. उसे समझा-बुझाकर खाना खिलाना पड़ता है. आलीशान महल और इंपोर्टेड वस्तुओं का इस्तेमाल करने वाले राम रहीम को जिस बैरक में रखा गया है, वहां टॉयलेट के लिए लोहे की इंडियन सीट है और पानी के लिए एक टूंटी लगी हुई है. नहाने और कपड़े आदि भी धोने की व्यवस्था चक्की में ही है.

यह भी पढ़ेंः राम रहीम की रहस्‍यमयी और आलीशान गुफा, यहीं लगा था यौन शोषण का आरोप

राम रहीम को सामान्य कैदियों जितनी सुविधा
मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए जेल की कैंटीन से क्वायल जरूर वह खरीद सकता है. जब स्वदेश किराड़ से यह पूछा गया कि क्या राम रहीम को किसी तरह का वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाता था तो उसने कहा कि जो सुविधाएं अन्य कैदियों को जेल प्रशासन की तरफ से उपलब्ध करवाई जाती हैं, उसको भी वही सब दी गई है.

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पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने का आखिरी दिन आज, ऐसे करें लिंक

 पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने का गुरूवार को आखिरी दिन है. पैन कार्ड को आधार से लिंक करना जरूरी है क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो आपका पैन कार्ड रिजेक्ट हो जाएगा. 


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: गुरुवार अगस्त 31, 2017 – 11:13 AM IST

पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने का आखिरी दिन आज, ऐसे करें लिंक

पैन कार्ड को आधार से लिंक करना जरूरी है क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो आपका पैन कार्ड रिजेक्ट हो जाएगा. (प्रतीकात्मक फोटो)

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नौवहन उपग्रह IRNSS-1H आज होगा लॉन्च, IRNSS-1A की जगह लेगा

आईआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगा, जिसकी तीन रूबीडियम परमाणु घड़ियों (एटॉमिक क्लॉक) ने काम करना बंद कर दिया था. आईआरएनएसएस-1ए ‘नाविक’ श्रृंखला के सात उपग्रहों में शामिल है. 


भाषा | अंतिम अपडेट: गुरुवार अगस्त 31, 2017 – 07:59 AM IST

नौवहन उपग्रह IRNSS-1H आज होगा लॉन्च, IRNSS-1A की जगह लेगा

आईआरएनएसएस-1एच के अभियान की 29 घंटे लंबी उल्टी गिनती बुधवार को दोपहर दो बजे शुरू हो चुकी है. (फाइल – फोटो साभार डीएनए)

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ज़ी जानकारी: Seat Belt लगाना है क्यों जरुरी ये विश्लेषण देखकर समझ जायेंगे

अगर आप गाड़ी चलाते वक्त Seat Belt नहीं लगाते है और अगर आपके बच्चे या परिवार का कोई सदस्य गाड़ी की पीछे की Seat पर बैठने की वजह से Seat Belt लगाना उचित नहीं समझता तो ये बहुत ख़तरनाक हो सकता है. हमारे पास एक Shocking Video है. ये Video देखते वक्त आपको अपनी ग़लती का अहसास भी होगा और तेज़ झ़टके भी लगेंगे.ये Video चीन का है और आपने देखा, कि जैसे ही दो गाड़ियां आपस में टकराती हैं तो उनमें से एक गाड़ी का पीछे वाला हिस्सा अचानक खुल जाता है.

और Seat के पीछे बैठे दोनों बच्चे हवा में उछलते हुए बीच सड़क पर गिर जाते हैं. इस दुर्घटना के वक्त इन दोनों ही बच्चों ने Seat Belt नहीं लगाई थी..और वो पीछे की Seat पर बैठकर खेल रहे थे. हालांकि, राहत की बात ये है, कि इन दोनों ही बच्चों को मामूली चोटें लगी हैं. लेकिन, ये मामला और ज़्यादा गंभीर भी हो सकता था…और इन बच्चों की जान भी जा सकती थी.

दुनियाभर में 80 फीसदी Children Saftey Seats का निर्माण चीन में होता है.लेकिन खुद चीन में 1 प्रतिशत से भी कम लोग इसका इस्तेमाल करते हैं.वर्ष 2016 में हुए एक सर्वे के मुताबिक, चीन में 20 फीसदी से भी कम माता-पिता अपनी कार में Child Safety Seats का इस्तेमाल करते हैं.आंकड़ों के मुताबिक, चीन में प्रति वर्ष 14 साल या उससे कम उम्र के साढ़े 18 हज़ार बच्चे सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं.

वैसे हमारे देश में भी कई लोग ऐसे हैं, जो Seat Belts को ना बांधकर.. गर्व महसूस करते हैं.. और ये समझते हैं कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता.ऐसे सभी लोगों को ये बात पता होनी चाहिए, कि अगर आप गाड़ी चलाते वक्त Seat Belt नहीं पहनते हैं, तो सड़क दुर्घटना के वक्त झटके की वजह से आप गाड़ी के बाहर गिर सकते हैं. और इसकी आशंका Seat Belt लगाने वालों के मुक़ाबले 30 गुना ज़्यादा होती है.WHO के मुताबिक, Front Seat पर बैठने वाले लोग अगर Seat Belt पहन लें, तो दुर्घटना की स्थिति में उनकी मौत का ख़तरा 40 से 50 फीसदी तक कम हो जाता है.

पीछे की Seat पर बैठने वाले लोगों के लिए ये ख़तरा 25 से 75 फीसदी कम हो सकता है. लेकिन इसके लिए उन्हें सीट बेल्ट लगानी होगी. हमारे देश में Speed Limits, Helmets और Seat Belts पहनने को लेकर कड़े क़ानून तो हैं, लेकिन कोई उसका पालन नहीं करता. WHO के मुताबिक Speed Limits के पालन को लेकर भारत को 10 में से 3 नंबर मिले हैं.Helmet और Seat Belt पहनने के मामले में भारत को 10 में से 4 नंबर दिए गए हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016 में प्रतिदिन 28 लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हुई, क्योंकि उन्होंने Helmet नहीं पहना था. जबकि इसी दौरान Seat Belt ना पहनने की वजह से प्रतिदिन 15 लोगों की मौत हुई थी. सड़क दुर्घटनाओं के शिकार युवाओं में Helmet न पहनने वाले और कार में Seat Belt ना बांधने वाले युवाओं की संख्या ज़्यादा है.

इसलिए, हम आपसे अपील करेंगे कि अपने जीवन की क़ीमत को समझें. और Bike चलाते वक्त Helmet ज़रूर पहनें और Car चलाते वक्त Seat Belt का इस्तेमाल ज़रुर करें आप जीवित और सुरक्षित रहेंगे तो अपने लिए और देश के लिए बहुत कुछ कर पाएंगे. इसलिए आज से ही अपनी आदतें बदल लीजिए और समझदार बन जाइए. आपकी जान बचाने की ज़िम्मेदारी सरकार की नहीं आपकी खुद की है.

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ज़ी जानकारी: गोरखपुर के अस्पताल में ICU में उड़ाई जा रहीं हैं नियमों की धज़्जियां

अगर आप सच्चे मन से कोई काम करेंगे तो उसका नतीजा भी अच्छा ही होता है. और हमें खुशी है, कि आपके हित में जो खुलासा हमने कल किया था आज उसका एक बड़ा असर हुआ है.गोरखपुर में अपने निजी स्वार्थ को ऊपर रखकर Private Practice करने वाले Doctors से राज्य सरकार ने 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा है. इसके लिए आज सुबह क़रीब 10 बजे गोरखपुर प्रशासनिक मंडल के कमिश्नर ने Zee News से उस Sting Operation का Video Footage मांगा और शाम 4 बजे उन चारों Doctors से जवाब मांग लिया गया.

यानी आप समझ सकते हैं कि Zee News के Operation के बाद अब राज्य सरकार Action Mode में आ गई है. और ये सब इसलिए हुआ है, क्योंकि कल रात 9 बजे Sting Operation दिखाए जाने के बाद पूरे देश ने हमारा साथ दिया. गोरखपुर में रहने वाले कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने Sting Operation में पकड़े गए कुछ Doctors का नाम लेते हुए हमें ये लिखा…कि वो भी उन Doctors का शिकार बन चुके हैं.

लेकिन अब अनैतिक काम करने वाले ऐसे सभी Doctors को सावधान हो जाना चाहिए. क्योंकि, हमारी नज़र लगातार ऐसे लापरवाह डॉक्टरों पर बनी हुई है. अपने पेशे से समझौता करके भ्रष्ट कमाई करने वाले डॉक्टरों की दुकान अब ज़्यादा दिन तक चल नहीं पाएगी. इस दुनिया में जान से ज़्यादा कीमती कोई और चीज़ नहीं है . दुनिया का बड़े से बड़ा ख़ज़ाना लुटाकर भी हम किसी मरे हुए इंसान को ज़िंदा नहीं कर सकते. इस दुनिया में जितने भी वैज्ञानिक हैं अगर वो सब मिलकर भी दिमाग लगाएं तो भी किसी मरे हुए इंसान को जिंदा नहीं किया जा सकता.

ये सुनकर आपको एहसास हो रहा होगा कि किसी भी इंसान की जान, कितनी कीमती होती है ? लेकिन विडंबना ये है कि हमारे देश में किसी इंसान की जान की कोई कीमत नहीं है . इसका एक उदाहरण आपने जोधपुर से आई ख़बर में देख लिया.. और अब हम आपको इसका दूसरा उदाहरण दिखाएंगे.आज हम आपको कुशीनगर के ज़िला अस्पताल के ICU की तस्वीरें दिखाएंगे और वहां के हालात का वीडियो विश्लेषण करेंगे. लापरवाही की ये तस्वीरें देखकर आपको एहसास हो जाएगा कि हमारे देश का Medical System किस तरह काम करता है.

ICU का मतलब होता है Intensive Care Unit हिंदी में Intensive Care Unit का मतलब होता है गहन चिकित्सा केंद्र . ICU किसी अस्पताल का वो Special Department  होता है.. जहां किसी मरीज को बहुत नाज़ुक हालात में लाया जाता है. अगर कोई मरीज़ ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा हो.. तो उसे Advance Medical Support System के ज़रिए ज़िंदा रखने की कोशिश की जाती है और ये पूरी प्रक्रिया ICU में होती है.

लेकिन हमारे देश के बहुत सारे अस्पतालों में ICU की हालत ख़राब है . ख़ासतौर पर सरकारी अस्पतालों के ICU… किसी व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले बाज़ार की तरह नज़र आते हैं. वहां मरीज़ों से ज़्यादा परिवारवाले दिखाई देते हैं . सबसे बड़ी शर्म की बात ये है कि डॉक्टर, अस्पताल के कर्मचारी और आम लोग ICU की Guidelines का पालन नहीं कर रहे हैं . हर अस्पताल में ICU की कुछ Guidelines होती हैं जिनका पालन करना ज़रूरी होता है.

ICU में सिर्फ़ वही डॉक्टर जा सकते हैं जिनकी वहां पर ड्यूटी लगी हो.ICU में जाने से पहले Doctors और Nurses को इस बात का ख़ास ध्यान रखना होता है वहां Infection नहीं फैले.ICU में जाने से पहले डॉक्टर और नर्स के लिए Shoe Cover पहनना जरूरी होता है. ICU में परिवार वालों को मरीज़ से मिलने के लिए एक निश्चित समय दिया जाता है. ICU में मरीज से दूरी बनाकर खड़े होने का निर्देश होता है ताकि Infection ना फैले,ICU के बाहर Hand sanitizer का इस्तेमाल करना भी ज़रूरी होता है. ताकि बाहर के कीटाणु ICU के अंदर ना जाएं.

लेकिन देश के बहुत सारे अस्पतालों में इन छोटी- छोटी Guidelines का पालन भी नहीं किया जा रहा है. हमने कुशीनगर के ज़िला अस्पताल और गोरखपुर के BRD Medical College की तस्वीरों के आधार पर एक वीडियो विश्लेषण तैयार किया है. इसे देखने के बाद आप ये समझ पाएंगे कि हमारे देश का Medical System खुद ICU में भर्ती है.. और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में लगातार बच्चों की मौत क्यों हो रही है?  जिन अस्पतालों को बच्चों का इलाज करना चाहिए… वो खुद बीमार हैं.. और अब तुरंत उनका इलाज करने की ज़रूरत है.

हमें खुशी है कि गोरखपुर और कुशीनगर में हमारे खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में Action लिया है… हमें उम्मीद है कि नियम तोड़ने वाले लापरवाह डॉक्टरों को उनके किए की सज़ा मिलेगी.ज़्यादातर सरकारें ऐसी ख़बरों के बाद Denial Mode में चली जाती हैं यानी वो सच्चाई को स्वीकार नहीं करतीं.. लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ऐसा नहीं किया.

गोरखपुर के सांसद के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने कई बार लोकसभा में एनसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का मुद्दा उठाया था. अब वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं.. और उनके पास.. स्थितियों को सुधारने का बहुत अच्छा मौका है. योगी आदित्यनाथ.. अगर चाहें तो उत्तर प्रदेश के बच्चों को बचा सकते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि योगी आदित्यनाथ.. उत्तर प्रदेश के लोगों की उम्मीदों को पूरा करेंगे.

इस विश्लेषण के अंत में हम उन दर्शकों को धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने हमारा समर्थन किया हमारी हिम्मत बढ़ाई और हमें अपना Feedback दिया.

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रॉबर्ट वाड्रा की दिक्कतें बढ़ीं, सीबीआई ने वाड्रा से जुड़ी फर्म सहित अन्य कंपनियों के 18 भूमि सौदों की जांच शुरू की

नयी दिल्ली : केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी एक कंपनी सहित अन्य कंपनियों द्वारा बीकानेर में भूमि सौदों में कथित अनियमितताओं के लिए राजस्थान सरकार द्वारा उसे भेजे गये 18 मामलों की जांच शुरू की.सीबीआई सूत्रों ने कहा कि एजेंसी ने इन भूमि सौदों के संबंध में 18 प्राथमिकी फिर से दर्ज की हैं. इससे पहले इनकी राजस्थान पुलिस ने जांच की थी.सीबीआई के एक प्रवक्ता ने यहां आज शाम मामले दर्ज होने के बाद कहा कि मामले सेना द्वारा प्रयुक्त महाजन फील्ड फायरिंग रेंज बीकानेर के लिए अधिग्रहीत भूमि के बदले धोखाधड़ी एवं फर्जी दावे और आवंटन से जुड़े हैं.

एजेंसी सूत्रों ने कहा कि एजेंसी द्वारा अगस्त से सितंबर 2014 के बीच दर्ज 18 प्राथमिकी में से 16 गजनेर थाने में दर्ज हुईं जबकि दो बीकानेर के कोलायत थाने में दर्ज हुईं.राजस्थान सरकार के आग्रह पर केन्द्र द्वारा सीबीआई को ये मामले भेजे गये.

राजस्थान सरकार ने सीबीआई को पत्र लिखा था
राजस्थान सरकार ने बीकानेर में कथित भूमि घोटालों की जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिखा था. इन घोटालों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी एक कंपनी भी कथित रूप से शामिल है.कांग्रेस ने राज्य सरकार पर विधानसभा चुनावों से पहले सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था.

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राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने 22 अगस्त को यह मामला सीबीआई को भेजने के बाद कहा था, ‘‘करीब 18 प्राथमिकी दर्ज हुई हैं. इनमें से चार वाड्रा की कंपनी के खिलाफ हैं जो कथित रूप से करीब 275 बीघा जमीन की अवैध खरीद से जुड़ी है. सभी 18 प्राथमिकी फर्जी नामों से करीब 1400 बीघा जमीन की खरीद से संबंधित हैं.’’उन्होंने आरोप लगाया था कि वाड्रा की कंपनी 2010 में 275 बीघा जमीन खरीदने के लिए तीसरा पक्ष थी और फिर इसने 2012 में एक चौथे पक्ष को इसे बेच दिया.

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कटारिया ने कहा था कि जब मामला प्रकाश में आया तो 18 प्राथमिकी दर्ज हुईं थीं. चार वाड्रा की कंपनी से जुड़ी हैं और अब राज्य सरकार ने सीबीआई को पत्र लिखकर उनकी एक साथ जांच करने को कहा है. 2014 में राज्य विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा था.

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