Monthly Archives: August 2017

‘दाऊद इब्राहिम को भारत लाने में पाकिस्तान अटका रहा है रोड़े’

केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि पाकिस्तान का ‘‘रवैया’’ अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है और वह दाऊद के मामले में भारत के खिलाफ काम कर रहा है.


भाषा | अंतिम अपडेट: बुधवार अगस्त 30, 2017 – 06:59 PM IST

'दाऊद इब्राहिम को भारत लाने में पाकिस्तान अटका रहा है रोड़े'

दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई विस्फोट मामलों में प्रमुख आरोपी है. (फाइल फोटो)

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‘पति उत्पीड़न का हथियार बन जाएगा वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित करना’

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मंगलवार (29 अगस्त) को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि ‘वैवाहिक दुष्कर्म’ (मैरिटल रेप) को अपराध घोषित करने से विवाह संस्था ढह सकती है और इसके अलावा यह पतियों को परेशान करने का आसान हथियार बन सकता है. केंद्र सरकार की ओर से अदालत में पेश किए गए हलफनामे में कहा गया कि पति और पत्नी के बीच यौन संबंध का कोई विशिष्ट सबूत नहीं हो सकता.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायाधीश सी. हरि शंकर की खंडपीठ के समक्ष पेश अपने हलफनामे में कहा, “इसे पूरी तरह सुनिश्चित करना होगा कि वैवाहिक दुष्कर्म परिघटना न बने, क्योंकि यह पतियों को परेशान करने वाला हथियार बन सकता है और विवाह संस्था को ढहा सकता है.”

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है, “अगर पति द्वारा पत्नी के साथ किए जाने वाले सभी यौन संबंधों को वैवाहिक दुष्कर्म की तरह माना जाने लगेगा तो वैवाहिक दुष्कर्म का फैसला सिर्फ और सिर्फ पत्नी के बयान पर निर्भर होकर रह जाएगा. सवाल यह है कि ऐसी परिस्थिति में अदालत किन सबूतों को आधार बनाएगी, क्योंकि पति और पत्नी के बीच यौन संबंध का कोई अंतिम सबूत नहीं हो सकता.”

केंद्र सरकार ने कहा कि किसी भी कानून में वैवाहिक दुष्कर्म को परिभाषित नहीं किया गया है, जबकि दुष्कर्म भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 में परिभाषित है और वैवाहिक दुष्कर्म को परिभाषित करना समाज में वृहत सहमति की मांग करता है. केंद्र सरकार ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों, खासकर पश्चिमी देशों द्वारा वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित करने का यह मतलब नहीं है कि भारत को अनिवार्य रूप से उनका अंधानुकरण करना चाहिए.

केंद्र सरकार ने कहा है कि वह वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित नहीं कर सकती, क्योंकि अशिक्षा, महिलाओं की अधिकांश आबादी का वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर न होने, समाज की मानसिकता, विभिन्न राज्यों की संस्कृति में अत्यधिक विविधता का होना और गरीबी के कारण भारत की अपनी खास समस्याएं हैं.

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बारिश का कहर : ट्रेन में 12 घंटे फंसी रही गर्भवती पत्रकार, पढ़िए उन्‍हीं की जुबानी

मुंबई : मुंबई में मंगलवार को हई भारी बारिश ने पूरी तरह जनजीवन अस्‍त-व्‍यस्‍त कर दिया. बारिश के कारण तेज रफ्तार वाले इस शहर की रफ्तार थम गई और घरों ने निकले लोग जगह- जगह फंसे रहे. डोंबिवली से मुंबई जाने वाली ट्रेन में दिव्यांगों के लिए आरक्षित कूपे में अनेक दिव्यांगों के साथ ही एक महिला पत्रकार भी 12 घंटे तक फंसी रहीं. यह मामला अधिक जटिल इसलिए था क्योंकि दिव्यांग कूपे में अनेक दिव्यांगों में आठ दृष्टिहीन थे साथ ही उनके साथ यात्रा करने वाली महिला पत्रकार सात माह की गर्भवती थी.

पत्रकार उर्मिला देथे ने बताया कि उन्होंने सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे ट्रेन पकड़ी थी. उन्होंने कहा कहा कि मैं दिव्यांगों के लिये आरक्षित डिब्बे में चढ़ गई, जिसमें करीब 20 लोग सवार थे. इनमें से आठ दृष्टिहीन थे. उर्मिला एक खबर के सिलसिले में बांबे हाईकोर्ट जा रही थीं, लेकिन गंतव्य पर पहुंचने से 20 किमी पहले बारिश ने उन्‍हें रोक दिया. 12 घंटे तक पानी में फंसे रहने के बाद फायर ब्रिगेड की मदद से ट्रेन को निकाला गया.

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उर्मिला ने बताया कि मेरी ट्रेन कुर्ला और सिओन के बीच फंस गई थी. दोपहर तक मैंने मदद की गुहार लगाई. कुछ समय बाद मैं दिव्यांग सहयात्रियों के लिए चिंतित हो उठी और मैंने उनके पास ही रुकने का फैसला किया. अग्निशमन कर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कोई भी रास्ता नहीं निकला. इसके बाद उर्मिला ने फोन के माध्‍यम से अपने पति से संपर्क किया. लेकिन भारी बारिश के कारण वह उनके पास तक नहीं पहुंच सके.

इस दौरान स्थानीय मददगार जरूरतमंद यात्रियों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराते रहे. लेकिन शाम होने के साथ ही संकट गहरा गया और बचाव के लिये आये लोगों की संख्या भी घटने लगी. इसी बीच एक व्यक्ति ने एक स्थानीय किशोर को गर्दन तक गहरे पानी से बचाकर बाहर निकाला. वह पटरियों के बीच पानी के गहरे गड्ढे में गिर गया था. इसके बाद मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार को पत्रकार की स्थिति के बारे में पता चला और उन्हें फोन किया.

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उन्होंने कहा शेलार का फोन बहुत आश्वस्त करने वाला था. लेकिन मोबाइल का नेटवर्क काम नहीं करने के कारण चिंता बढ़ने लगी. यह बचाने वालों के लिये भी बड़ी समस्या थी, जो उन्हें खोजने का प्रयास कर रहे थे. आखिरकार, लगभग 11.55 बजे एक छोर पर मुंबई फायर ब्रिगेड की सीढ़ी को देख उन लोगों ने उस समय राहत की सांस ली. बचावकर्मियों ने उन्हें सीढ़ी पर चढ़ने का इशारा किया. उर्मिला ने भावुक होते हुए कहा, ‘उन्होंने मुझे किसी छोटे बच्चे की तरह उठाया और मैं ठीक से उनका धन्यवाद भी नहीं कर सकी.’

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गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में नहीं थम रही मासूमों की मौत, 48 घंटे में 42 बच्चों की मौत

मरने वाले ये बच्चे इंसेफलाइटिस के अलावा न्यूमोनिया, सेप्सिस जैसी कई अन्य बीमारियों से पीड़ित थे.


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: बुधवार अगस्त 30, 2017 – 10:00 AM IST

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में नहीं थम रही मासूमों की मौत, 48 घंटे में 42 बच्चों की मौत

10 से 12 अगस्त के बीच ऑक्सीजन की कमी से हुई थी 36 बच्चों की मौत. (फाइल फोटो)

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ज़ी जानकारी: Zee News ‘स्टिंग ऑपरेशन’ में सामने लाया डॉक्टरों का खौफनाक सच

DNA में एक ऐसा वैचारिक धमाका हुआ है जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देगी. ये लापरवाही का Time Bomb है जो पिछले 70 वर्षों से फटने का इंतज़ार कर रहा था. सिस्टम को जब लापरवाही करने की आदत पड़ जाती है और वो लगातार लोगों की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ करता रहता है और फिर वो लापरवाही एक Time Bomb बन जाती है और जब वक़्त आता है तो लापरवाही के इस Time Bomb में विस्फोट होता है. इस विस्फोट से ‘भ्रष्ट सोच’ की बीमारी से पीड़ित कई लोगों के घायल होने की पूरी संभावना है.

आपको गोरखपुर की घटना याद होगी. 10 अगस्त को BRD मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी की वजह से 60 से ज़्यादा बच्चों की जान चली गई थी. मौत किसी की भी हो, बहुत दुखदायी होती है लेकिन जब बच्चे मरते हैं तो तकलीफ  बढ़ जाती है और सबसे बड़ी बात ये है कि अगर किसी की लापरवाही की वजह से बच्चों की मौत हो जाए, तो उसे सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि नरसंहार कहना उचित होगा.

इसलिए हम गोरखपुर में हो रही बच्चों की मौत को सबसे बड़ा नरसंहार कह रहे हैं.गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में पिछले 48 घंटों में 29 बच्चे मर चुके हैं और इनमें से कम से कम 7 बच्चों की मौत एनसेफेलाइटिस की वजह से हुई है. यानि बच्चे लगातार मर रहे हैं और हम एक महान देश होने के बावजूद कुछ नहीं कर पा रहे. हमारे सिस्टम को ऐसी ख़बरों की आदत पड़ चुकी है और अब उसे ऐसी ख़बरों से कष्ट नहीं होता. बच्चों की मौत उसके लिए सिर्फ एक आंकड़ा है, महज़ एक रिपोर्ट है जो दस्तावेज़ों में दर्ज हो जाएगी.

बच्चों की मौत की वजह सिर्फ बीमारी नहीं है इसके पीछे सिस्टम और डॉक्टरों की लापरवाही भी है. आज हम इस नरसंहार से जुड़ा एक बहुत बड़ा खुलासा करेंगे. क्योंकि, Zee News की टीम ने उत्तर प्रदेश में मौत बांटने वाले लापरवाह Doctors को ढूंढ निकाला है. जिन डॉक्टरों को मरीज़ों की सेवा करनी चाहिए. वो अपनी जेब की सेवा करते हुए पकड़े गए हैं.

आपको याद होगा कि जब गोरखपुर की घटना सामने आई थी उस वक्त गोरखपुर एक तरह से ‘राजनीतिक पर्यटन’ का केंद्र बन गया था. वोट बैंक की राजनीति करने वालों ने गोरखपुर को अपना पसंदीदा Picnic Spot बना दिया. और हमारे देश के Media ने इस घटना की ज़मीनी हकीकत बताने के बजाए, आपको सिर्फ सतही बातें बताईं. लेकिन, सच ये है, कि 60 से ज़्यादा बच्चों की मौत ऑक्सीज़न की कमी से नहीं बल्कि System में ईमानदारी की ऑक्सीजन की कमी से हुई है. मां-बाप बहुत उम्मीदों के साथ अपने बीमार बच्चे को अस्पताल लेकर जाते हैं लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता कि वो अपने बच्चों को मौत के डेरे में लेकर जा रहे हैं.

हमारे देश में डॉक्टर्स को भगवान का दर्जा हासिल है. और जब भी कोई डॉक्टर इस पेशे में आता है तो उसे सबसे पहले Code Of Medical Ethics यानी मेडिकल आचार संहिता की एक Booklet दी जाती है. जिसके तहत सैद्धांतिक तौर पर उन्हें एक शपथ लेनी होती है जिसे Hippocratic Oath कहा जाता है. इसके तहत डॉक्टर्स को अपने पेशे से संबंधित ज़रुरी बातें याद दिलाई जाती हैं. जब भी कोई डॉक्टर Medical Council Of India या State Medical Council में खुद को Register करवाता है तो उसे नैतिक सिद्धांतों वाली यही Booklet पकड़ाई जाती है.

इसके तहत स्पष्ट किया गया है, कि एक डॉक्टर अपने पेशे के सम्मान को बनाए रखेगा चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य मानवता को सेवा प्रदान करना है. इसमें कहा गया है, कि डॉक्टर्स, मरीज़ों के हितों को प्राथमिकता देंगे. इसमें ये बात भी कही गई है, कि एक डॉक्टर अपने निजी आर्थिक हितों के लिए मरीज़ों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकता. इसके अलावा, Code Of Medical Ethics में ये बात साफ तौर पर लिखी हुई है कि कोई भी डॉक्टर ऐसा काम नहीं करेगा जो नैतिक रुप से गलत हो.

लेकिन, ऐसा लगता है, कि उत्तर प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में इस शपथ की शवयात्रा निकल चुकी है. कम से कम उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और कुशीनगर में ऐसा ही हो रहा है. क्योंकि, वहां के डॉक्टर्स एक तरफ सरकारी तनख्वाह लेकर मोटी कमाई करते हैं और दूसरी तरफ Private Hospitals में लोगों से मोटी फीस वसूलते हैं. राज्य सरकार चाहे कितने भी दावे और कार्रवाई करे लेकिन गोरखपुर और कुशीनगर सहित कई इलाकों में डॉक्टर्स आज भी खुलेआम Private Practice कर रहे हैं.

हमने इस खबर को एक Mission की तरह लिया. और इसके लिए हमारे रिपोर्टर राहुल सिन्हा को अपना हुलिया बदलना पड़ा. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुरेश रख लिया और एक मज़दूर बनकर गोरखपुर और कुशीनगर के कई सरकारी डॉक्टर्स से मिले. इस दौरान हमने खुफिया कैमरे का इस्तेमाल किया और एक-एक करके सारे डॉक्टर बेनक़ाब होते चले गए.

इस दौरान हमें ये जानकारी भी मिली कि आमतौर पर डॉक्टर्स सरकारी Hospitals में Join करते वक्त NPA यानी Non Practicing Allowance पर दस्तखत करते है. इसके तहत ये नियम है, कि अगर कोई डॉक्टर NPA पर हस्ताक्षर करता है, तो उसे उसकी तनख्वाह के साथ-साथ 20 फीसदी Non Practicing Allowance भी मिलता है यानि उन्हें एक प्रकार से Private Practice ना करने की शपथ दिलाई जाती है और उसके बदले में मुआवज़े के रूप में पैसा भी दिया जाता है लेकिन, हमारे Sting Operation में ये साबित हो गया, कि कई डॉक्टर्स थोड़ी सी Extra कमाई के लिए, अपने पेशे से समझौता कर लेते हैं. ये एक बहुत बड़ा खुलासा है जिसमें लापरवाही के कई विस्फोट होने वाले हैं. इसलिए अपनी आंखें खुली रखिएगा और ध्यान से इस रिपोर्ट को देखिएगा.

हमारे पहले Sting Operation में आपने डॉक्टर R.K. शाही को एक Private Hospital में इलाज करते हुए देखा हमारे संवाददाता राहुल सिन्हा को भी उन्होंने जल्द से जल्द Hospital में Admit करने की बात कही. लेकिन जब हमारी टीम ने कैमरे पर डॉक्टर शाही से इस अनैतिक व्यवहार को लेकर सवाल पूछा तो वो कुछ भी कहने से बचते रहे. पहले उन्होंने हमारा कैमरा बंद करने की सलाह दी और फिर वो इस बात से साफ मुकर गये कि वो किसी Private Hospital में जाकर Practice करते हैं. लेकिन कैमरा झूठ नहीं बोलता.

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में डॉक्टर होना अमीर बनने की गारंटी माना जाता है और इसकी सबसे बड़ी वजह है, वो अभिशाप जिसे यहां एनसेफेलाइटिस के रूप में जाना जाता है. पिछले 40 वर्षों में ये बीमारी इस इलाक़े की एक जानलेवा बीमारी बन चुकी है. इसकी वजह से हर साल सैकड़ों बच्चे बेमौत मरते हैं. और इस बीमारी की वजह से यहां स्वास्थ्य का उद्योग भी अच्छी तरफ फल फूल रहा है. 

यहां आपके मन में ये सवाल भी आया होगा कि जो बीमारी पिछले 40 वर्षों में पूरे पूर्वांचल में 50 हज़ार से ज्यादा बच्चों की जान ले चुका है, वो असल में है क्या?  एनसेफेलाइटिस  का पहला मामला सबसे पहले वर्ष 1924 में जापान में सामने आया था, इसलिए इसे स्थानीय भाषा में जापानी बुखार भी कहा जाता है. भारत में इस बीमारी का पहला मामला वर्ष 1955 में तमिलनाडु में सामने आया था. और 1973 तक ये बीमारी देश के दक्षिणी हिस्से तक सीमित थी. लेकिन 1978 तक ये बीमारी देश के 18 राज्यों तक फैल गई.

उत्तर प्रदेश में इस बीमारी का पहला मामला 1978 में सामने आया और तब लेकर अब तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में 50 हज़ार से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है.आज हाल ये है कि 1998 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में 8 हज़ार 590 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर बच्चे हैं.अकेले गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में पिछले 12 वर्षों में 6 हज़ार 746 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई. ये बुखार भी मच्छरों की वजह से फैलता है.ये एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसमें दिमाग में सूजन आने लगती है. ये एक जानलेवा बीमारी है, इसलिए तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है. वैसे तो इस बीमारी का शिकार कोई भी हो सकता है, लेकिन इसके सबसे ज्यादा शिकार बच्चे और बूढ़े होते हैं.

ये रोग आमतौर पर ग्रामीण और खेती से जुड़े इलाकों में ज़्यादा होता है और इसके मामले खासतौर पर उन इलाकों में ज़्यादा होते हैं जहां चावल की खेती होती है.इस बुखार का शिकार होने वालों को अस्पताल में भर्ती करने के साथ साथ उन्हें ऑक्सीज़न देना बहुत ज़रूरी होता है. यही वजह है कि जब BRD मेडिकल कॉलेज में भर्ती बच्चों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाई, तो उनमें से ज्यादातर की मौत हो गई.

अब हम आपको गोरखपुर के पड़ोसी ज़िले कुशीनगर का हाल दिखाने जा रहे हैं. हमारे कैमरे में कुशीनगर के डिप्टी CMO डॉक्टर ताहिर अली का गोरखधंधा रिकॉर्ड हुआ है. ये एक बड़े सरकारी डॉक्टर होने के बाद भी खुलेआम अपना Private Clinic चला रहे हैं. और इनका एकमात्र मकसद है अपनी जेब भरना.

हम ये देखना चाहते कि जो सरकारी डॉक्टर खुलेआम Private Practice कर रहे हैं, पकड़े जाने के बाद वो क्या कहते हैं. इसीलिए हमने इन तमाम डॉक्टरों से इस Sting Operation के बाद अलग से बात की. जिन डॉक्टर ताहिर अली को अभी आपने हमारे Sting Operation में Private Practice करते हुए देखा, उनसे जब हमने सवाल पूछा, तो वो सकपका गए. पहले तो वो इस बात ही इनकार करने लगे कि वो  Private Practice करते हैं, लेकिन जब हमने उन्हें सबूत दिखाए तो वो मुकर नहीं पाए. आप सुनिए इस अनैतिक काम को लेकर वो क्या कह रहे हैं?

आपकी तरह हम भी हैरान हैं, कि पिछले 40 वर्षों से एक बीमारी हज़ारों बच्चों की जान ले रही है, और पूरा सिस्टम बेबस है. इसीलिए हमें लगता है कि अब ज़िम्मेदारी तय करने का वक्त आ गया है. योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले सांसद थे. और वो इसी गोरखपुर से 19 वर्षों तक यानी 6 हज़ार 949 दिनों तक लोकसभा सांसद रहे. ये बहुत लंबा वक्त होता है. उनके 19 वर्षों के कार्यकाल में पूरे उत्तर प्रदेश में 8 हज़ार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई, जिनमें से ज्यादातर बच्चे थे और पूर्वांचल के ही थे. हालांकि ऐसा नहीं है कि उन्होंने इस बीमारी का ज़िक्र नहीं किया.

योगी आदित्यनाथ अक्सर एनसेफेलाइटिस की वजह से मरने वाले बच्चों का ज़िक्र लोकसभा में करते रहे हैं. हो सकता है कि एक सांसद के तौर पर उनके हाथ बंधे रहे हों, लेकिन अब ऐसा नहीं है. वो पिछले 164 दिनों से पूरे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. उनके पास पूरे अधिकार हैं. इसके बाद भी मार्च 2017 से लेकर अब तक कम से कम 200 बच्चों की मौत हो चुकी है. इसलिए अब उन्हें इस समस्या का इलाज जल्द से जल्द करना होगा. कुछ दिन पहले योगी आदित्यनाथ ने सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों से प्राइवेट प्रैक्टिस बंद करने का आदेश दिया था. ये रिपोर्ट देखकर आपको समझ में आ गया होगा कि उनके आदेश का कितना असर हुआ है.

जब ज़िम्मेदारी की Chain तय होगी तो योगी आदित्यनाथ के साथ साथ उनके स्वास्थ्य मंत्री का नाम भी आएगा. सिद्धार्थनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं और उन्हें भी स्वास्थ्य मंत्री बने हुए 164 दिन हो चुके हैं. इसीलिए अब वक्त आ गया है कि वो भी Encephalitis को लेकर गंभीर हो जाएं. क्योंकि आज़ादी के 70 वर्षों के बाद भारत जैसा देश एक बीमारी के सामने Surrender नहीं कर सकता.

हम ये बात बार बार कह रहे हैं कि ये समस्या किसी एक सरकार की नहीं है. लेकिन ये बात भी सच है कि इस समस्या को अब तक की सभी सरकारों ने नज़रअंदाज़ किया है. फिर चाहे वो उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार हो या फिर केन्द्र सरकार. इसी तरह से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP नड्डा भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते. J.P. नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री बने हुए 2 वर्ष 9 महीने और 19 दिन हो चुके हैं. अगर किसी काम को करने की ठान ली जाए तो पौने तीन साल का वक़्त.. एक लंबा वक्त होता है. Encephalitis की वजह से हर वर्ष 500 से 600 बच्चों की मौत हो रही है. इसके बावजूद हमारा पूरा सिस्टम सहनशील बना हुआ है.

यानि जिस समस्या को लेकर Zero Tolerance होना चाहिए था, उस पर हमारा सिस्टम Super Tolerant है यानी हम ज़रूरत से ज़्यादा सहनशील हो गये हैं. आज हम नैतिकता के हथौड़े से इसी सोच पर चोट कर रहे हैं और इस कड़ी में अब हम एक और डॉक्टर की चोरी पकड़ेंगे. कहने को तो ये डॉक्टर एक Child Specialist हैं..और इनकी ज़िम्मेदारी सरकारी हॉस्पिटल में बच्चों का इलाज करना है. लेकिन, ये डॉक्टर कुशीनगर ज़िला अस्पताल के हिस्से के समय से.. वक्त चुराकर…एक Private Clinic में अपनी सेवाएं देते हैं और बच्चों के इलाज के लिए मोटी रकम वसूलते हैं.

हमारे Sting Operation में डॉक्टर सतीश सिंह बिना किसी हिचक के ये कहते हुए पकड़े गए कि बच्चे को लेकर आईए फीस लेकर देख लेंगे और फिर दवा लिखकर आपको बता देंगे कि क्या करना है? इसी सवाल के साथ हम एक बार फिर डॉक्टर सतीश के पास पहुंचे लेकिन दूसरे डॉक्टर्स की तरह उनकी ज़ुबान पर भी झूठ का ताला लग चुका था.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा अगर चाहे तो हम स्टिंग ऑपरेशन में दिखाए गये सभी डॉक्टर्स के Prescriptions दिखा सकते हैं. हमारे पास सारे सबूत मौजूद हैं. हमारा सिस्टम लापरवाह और ढीला होने के साथ साथ संवेदनहीन भी है. उत्तर प्रदेश में पहले से ही डॉक्टरों की बहुत ज़्यादा कमी है और जो डॉक्टर यहां मौजूद हैं.. वो अनैतिक तरीके से Private Practice करके पैसा कमाने में व्यस्त हैं.

जनसंख्या के हिसाब से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है. उत्तर प्रदेश की जनसंख्या करीब 20 करोड़ की है. अगर उत्तर प्रदेश कोई देश होता तो जनसंख्या के हिसाब से वो दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश होता.लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इतने बड़े राज्य में सिर्फ 65 हज़ार 343 Registered Doctors हैं.स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर बनी एक संसदीय समिति के मुताबिक इनमें से भी सिर्फ 80% डॉक्टर ही Duty पर होते हैं. यानि इस हिसाब से उत्तर प्रदेश में 3 हज़ार 812 लोगों पर एक डॉक्टर है.जो WHO के Standard से तीन गुना कम है.

अगर उत्तर प्रदेश को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदंडों को पूरा करना है, तो राज्य में 1 लाख 46 हज़ार 726 डॉक्टरों की और ज़रूरत है.यानि आप समझ सकते हैं कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे खुद ICU में भर्ती हो चुकी है. गोरखपुर में तो और भी बुरा हाल है. गोरखपुर के ज़िला अस्पताल में 49 डॉक्टरों की ज़रूरत है, लेकिन अभी वहां सिर्फ 29 डॉक्टर हैं, यानी करीब 20 डॉक्टरों की कमी है. इस अस्पताल में 39 Staff Nurses की ज़रूरत है, लेकिन वहां सिर्फ 25 Staff Nurses हैं.

गोरखपुर में एक और डॉक्टर की अवैध Private Practice हमारे कैमरे में रिकॉर्ड हुई है. इनका नाम है डॉक्टर ज्ञान चंद्रा. ये डॉक्टर मरीजों की सेवा में नहीं बल्कि अपनी जेब की सेवा करने में व्यस्त हैं. यहां हम एक बात स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमारे Sting Operation में हमने Private Practice की अनैतिक सोच पर प्रहार किया है. क्योंकि, थोड़ी सी Extra कमाई के लिए अपनी ज़िम्मेदारी ना निभाना एक तरह से भ्रष्टाचार है.

हम ये नहीं कह रहे कि गोरखपुर में बच्चों की मौत के लिए सीधे तौर पर ये Doctors ही ज़िम्मेदार हैं. लेकिन, आप इस मामले की गहराई में जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि Doctors के लालच की वजह से इन बच्चों को अपनी जान देनी पड़ी. वैसे आपको बता दें, कि गोरखपुर में बच्चों की मौत के मामले में आज उत्तर प्रदेश की Special Task Force ने कुछ डॉक्टर्स को गिरफ़्तार भी किया है. लेकिन ये समस्या सिर्फ डॉक्टर्स की गिरफ्तारी से नहीं सुलझेगी.

ये नैतिकता के पतन का मामला है इसके इलाज के लिए पूरे सिस्टम की भ्रष्ट दीवारों को तोड़कर एक नया सिस्टम बनाना होगा. अगर पूरी इच्छाशक्ति से काम किया जाए.. तो अस्पतालों को मौत का डेरा बनने से रोका जा सकता है. परेशानी की बात ये है कि हमें ऐसी ख़बरों को सुनने और पढ़ने के आदत हो गई है ऐसी ख़बरों से हमें कोई दुख नहीं होता कोई दर्द नहीं होता हम बच्चों की मौत को लेकर भी सहनशील हो गये हैं. हमारी कोशिश है कि देश के लोगों की और सिस्टम की य़े संवेदनहीनता खत्म हो.

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ज़ी जानकारी: शंघाई बनने का सपना पाले मुंबई पानी में डूबी नज़र आ रही है

आपने अकसर सुना होगा कि भारत एक सुपरपावर बन सकता है. ये भी कहा जाता है कि जिस गति से हमारी अर्थव्यवस्था विकास कर रही है, उससे लगता है कि भारत जल्द ही दुनिया की बड़ी महाशक्ति बन जाएगा. लेकिन जिस देश में 3 घंटे की बारिश मुंबई जैसे महानगर को बंधक बना दे, वो देश सुपरपावर कैसे बनेगा? और यही बात हमारे अगले विश्लेषण का केंद्र बिंदु है..सबसे पहले आप मुंबई की हालत देखिए ये आज की तस्वीरें हैं.

पूरी मुंबई पानी में डूबी हुई नज़र आ रही है. ये वो शहर है जिसे हम शंघाई बनाने का सपना देख रहे हैं.बारिश से संघर्ष करती मुंबई की ये तस्वीरें कोई नयी नहीं हैं…हम आपको पिछले 10 वर्षों की तस्वीरें दिखाते हैं, इन तस्वीरों में सिर्फ तारीख का फर्क है बाकी सबकुछ लगभग एक जैसा है पिछले 10 वर्षों कुछ नहीं बदला, इन तस्वीरों में सड़कों पर भरे पानी से संघर्ष करते लोग नज़र आ रहे हैं लम्बे-लम्बे ट्रैफिक Jams हों या पानी में डूबी हुए रेलवे Tracks हर तस्वीर अपने आप में मुंबई की बदसूरती को दुनिया के सामने रख रही हैं.

ये सब देखकर लगता है कि पिछले 10 वर्षों में BMC ने कोई सबक नहीं लिया मुंबई की बारिश के सामने municipal corporation हर वर्ष सरेंडर कर देती है, कहने को तो ये शहर World Class City बनने के सपने देख रहा है लेकिन इन तस्वीरों को देखने के बाद मुंबई में World Class जैसा कुछ नहीं दिखता क्योंकि बारिश के मौसम में मुसीबतों का समंदर सड़कों पर दिखाई देने लगता है मुंबई में पिछले 3 दिनों से बारिश हो रही है लेकिन आज सुबह साढ़े 8 बजे शुरू हुई भारी बारिश ने सिर्फ़ 3 घंटे में इस महानगर को घुटनों तक डुबो दिया.

BMC की तरफ से लोगों को सलाह दी गई है कि अगर बहुत जरूरी हो तभी घरों से बाहर निकलें भारी बारिश की वजह से मुंबई के ज़्यादातर स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है और सड़कों पर पानी भरने की वजह से लोग.. कई घंटों तक Traffic Jams में फंसे रहे..रेल की पटरियों में पानी भरने की वजह से मुंबई लोकल की रफ़्तार बहुत कम हो गयी..मुंबई से चलने वाली सेंट्रल रेलवे की ज़्यादातर trains लेट हो गईं मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे मुंबई पर भारी पड़ने वाले हैं.

कुल मिलाकर बारिश की वजह से मुंबई में हर वर्ष आपातकाल आ जाता हैं ये बात बहुत चिंताजनक है और शर्मनाक भी बारिश के मामले में अकसर कहा जाता है कि मुंबई की किस्मत ख़राब है जबकि सच ये है कि मुंबई का सिस्टम ख़राब है वर्ष 2016-17 में मुंबई के लोगों ने 2 लाख 48 हज़ार करोड़ रूपये का Direct Tax दिया लेकिन मुंबई की हालत देखकर लगता है कि बदले में सिस्टम ने.. लोगों को कुछ नहीं दिया.

यहां आपको बता दें कि BMC देश का सबसे अमीर municipal corporation है BMC का बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा के कुल बजट से भी ज़्यादा है BMC का ये बजट 25 हज़ार करोड़ रूपये से ज़्यादा है. वर्ष 2015-16 में BMC ने सड़कों से बारिश का पानी निकालने के लिए 401 करोड़ रुपये खर्च किये थे. जबकि इस वर्ष Drainage System को दुरुस्त करने के लिए 475 करोड़ रूपये का बजट बनाया गया था इसमें से BMC  206 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त क्या है ये आप देख ही रहे हैं.

मुंबई में बरसात के मौसम में होने वाले जलभराव की एक बहुत बड़ी वजह है मुंबई की Town Planning और पुराना Drainage System मुंबई के Drainage सिस्टम का ज़्यादातर हिस्सा..अंग्रेजों के जमाने का है और जितनी तेज़ी से मुंबई की आबादी बढ़ी है उतनी तेज़ी से Drainage सिस्टम की क्षमता नहीं बढ़ी है मुंबई में 50 से 60 वर्ष पुराने Drainage Pipes हैं.. और इनमें से सिर्फ 30 फीसदी को ही अबतक बदला गया है.

इसके अलावा मुंबई में एक समस्या और है.. मुंबई शहर समुद्र से घिरा है..ऐसे में बरसात का पानी Under Ground Drainage सिस्टम के जरिये समुद्र में जाता है..लेकिन High Tide आने पर समुद्र के पास ड्रेनेज सिस्टम के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं..जिसकी वजह से मुंबई में चारों तरफ पानी भर जाता है.

यानि मुंबई को अब बेहतर Town Planning की ज़रूरत है और जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक हर वर्ष मुंबई बरसात के पानी में डुबकी लगाती रहेगी. मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी कहा जाता है. लेकिन जो तस्वीरें हमारे सामने आई हैं उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि इस शहर को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता.

प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का बस नहीं चलता है और ना ही प्राकृतिक आपदाओं को रोका जा सकता है लेकिन इन आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम ज़रूर किया जा सकता है…हम आपको बताते हैं कि दुनिया के दूसरे देशों ने बाढ़ और बारिश से होने वाले जलभराव जैसी समस्याओं को कैसे नियंत्रित किया है.

बाढ़ और जलभराव से निपटने की सबसे बड़ी शिक्षा सिंगापुर से ली जा सकती है सिंगापुर ने अपने Drainage सिस्टम को सुधारने के लिए पिछले 30 वर्षों में  करीब 9 हज़ार 300 करोड़ रुपये ख़र्च किए इसकी वजह से पूरे सिंगापुर में बाढ़ प्रभावित इलाके में करीब 98 फीसदी की कमी आई जो अपने आप में हैरान करने वाला आंकड़ा है. सिंगापुर में Drainage सिस्टम को सुधारा गया, इमारतों के Platform की न्यूनतम सीमा तय की गई.

इसके अलावा सिंगापुर के निचले इलाकों में बाढ़ की वजह से सड़कें डूब जाती थीं ऐसे इलाक़ों में Drainage सिस्टम को सुधारने के साथ-साथ सड़कों के Level को ऊंचा किया गया.दूसरी शिक्षा हम अमेरिका से ले सकते हैं जहां समुद्री तूफानों का आना सामान्य बात है लेकिन अमेरिका के पास इन तूफानों और उसके बाद आने वाली बाढ़ से निपटने का मज़बूत सिस्टम मौजूद है. इसके लिए Technology की भरपूर मदद ली जाती है.

अमेरिका में हर तूफान का अलर्ट होता है और प्रभावित इलाकों को खाली कराने का Plan..पहले से ही तैयार होता है. अमेरिका ने समुद्र के अंदर ऐसे यंत्र लगाए हुए हैं जिनके ज़रिये सुनामी के खतरे को.. वक्त रहते पहचाना जा सकता है अपने सेटेलाइट नेटवर्क के जरिये अमेरिका अपने आसमान में तूफानों से संबंधित हर Data को रिकॉर्ड करता है. अमेरिका के पास बारिश के Pattern का अनुमान लगाकर बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने का भी सिस्टम है. एक वक्त था जब Netherlands का 66 फीसदी इलाका बाढ़ से प्रभावित होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है.

क्योंकि Netherlands ने बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए एक अलग सोच अपनाई..और वो सोच ये कहती है कि live with water, don’t fight it यानि पानी के साथ जीना सीखो उससे लड़ो मत Netherlands ने आज से 400 वर्ष पहले ही Drainage सिस्टम बना लिया था वहां जगह जगह Pumping स्टेशन बने हैं जो बारिश और बाढ़ के पानी को बाहर निकालते हैं यहां Drainage के लिए नहरों का एक सिस्टम है और वक्त-वक्त पर यहां पर नदियों की गहराई भी बढ़ाई जाती है.

भारत में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि हमने कभी भी अपने शहरों के drainage सिस्टम को सुधारने पर ध्यान नहीं दिया इसीलिए ज़रा सी बारिश होने पर दिल्ली और मुंबई जैसे देश के बड़े बड़े शहर परेशान हो जाते हैं.

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लारा दत्ता ने पानी रोकने के लिए ग्रैंड स्‍लैम के टॉवल का इस्‍तेमाल किया, भड़के भूपति

लारा दत्ता ने  अपने घर को बारिश के पानी से बचाने केलिए अपने पति टेनिस स्टार महेश भूपति के अलग-अलग ग्रैंड स्‍लैम के तौलियों का उपयोग किया. 


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: बुधवार अगस्त 30, 2017 – 12:36 AM IST

लारा दत्ता ने पानी रोकने के लिए ग्रैंड स्‍लैम के टॉवल का इस्‍तेमाल किया, भड़के भूपति

लारा द्वारा तौलियों का यह सदुपयोग शायद उनके पति को कुछ खास पसंद नहीं आया. (फाइल फोटो)

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आईआईटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी में होंगे देशभक्तिपूर्ण रॉक शो, विपक्ष ने उठाए सवाल

नई दिल्‍ली : केंद्र सरकार एक बार फि‍र से देश भक्‍ति के मुद्दे पर सवालों के घेरे में है.  दरअसल केंद्रीय मानव संसाधन  विकास मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि देश के आईआईटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी में जल्द ही देशभक्ति के रॉक बैंड शुरू होंगे. छात्रों को बहुत जल्द कैंपस में देशभक्ति से भरे गीत संगीत पर झूमने का मौका मिलेगा. मंत्रालय ने इन संस्थानों से म्यूजिक बैंड्स की मेजबानी करने को कहा है, जो वहां देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रम ऑर्गेनाइज करेंगे. ‘यह इंडिया का टाइम है’ नाम के कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर सरकार ने कुछ खास बैंड निर्धारित किए हैं, जो देशभर के कैंपस में जाकर देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. 

यह प्रस्तुति खासकर बॉलीवुड के गानों पर होगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया ‘एक निजी मनोरंजन संस्था को यह काम दिया गया है, जिसने एक दर्जन के करीब रॉक बैंड की पहचान की है. वहीं इन कार्यक्रमों को अगले महीने कई संस्थानों में प्रस्तुत करने की योजना बनाई गई है.’ ये कार्यक्रम भारत की स्वतंत्रता के 70 साल और भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरा होने के जश्न में आयोजित किए जाएंगे.

यह भी पढ़ें : देश के सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अब हर दिन 207 फीट ऊंचा तिरंगा फहराना अनिवार्य, JNU से होगी शुरुआत

 

ससे पहले इस महीने की शुरुआत में 70वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सरकार ने सभी यूनिवर्सिटी और शैक्षणिक संस्थानों से कहा था कि वह छात्रों को स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारक दिखाएं और शहीदों के घर लेकर जाएं. विश्वविद्यालयों और स्कूलों ने एक शपथ ग्रहण समारोह का भी आयोजन किया था, जिसमें शिक्षकों, छात्रों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने देश को ‘आतंकवाद-मुक्त, जाति-मुक्त, भ्रष्टाचार-मुक्त, अस्वच्छता-मुक्त और गरीबी-मुक्त समाज’ बनाने की प्रतिज्ञा ली थी.

औवेसी ने उठाए सवाल 
विपक्ष ने इस इवेंट पर सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम के चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि, ‘रॉक बैंड को आईआईटी में भेजने के पीछे सरकार का क्या मकसद है? मोदी सरकार अब तक लोगों का कुछ भला नहीं कर सकी है. यह स्टूडेंट्स को विभाजित करने की रणनीति है. आईआईटी इनोवेशन के लिए है ना की बैंड पार्टी के लिए. बता दें कि इसी महीने सरकार ने स्वतंत्रता दिवस पर युनिवर्सिटी और शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्रता सेनानी और शहीद स्मारक ले जाने के निर्देश दिए थे.

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कैलाश सत्यार्थी की घोषणा, ‘भारत यात्रा 21 सितंबर को पहुंचेगी हैदराबाद’

हैदराबाद: नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने घोषणा की कि बाल यौन शोषण और तस्करी से लड़ने के लिए भारत यात्रा 21 सितंबर 2017 को हैदराबाद पहुंचेगी भारत यात्रा 11 सितंबर को कन्याकुमारी से रवाना होगी और 16 अक्टूबर को नई दिल्ली में होगी, यह यात्रा हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित भारत बनाने की दिशा में काम करने के लिए शुरू की है, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी का पूरा समर्थन प्राप्त हुआ.

श्री सत्यार्थी ने प्रेस क्लब हैदराबाद में मीटिंग आयोजित कर इस बारे में जानकारी दी उन्होंने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों में बाल यौन शोषण और तस्करी की बड़ी समस्याओं के बारे में बताया और हाल के कई मामलों में गहरा अफसोस जताया जो हाल ही में प्रकाश में आये हैं.

वह हैदराबाद में सभी धर्म के नेताओं और विद्वानों से मुलाकात के बाद बाल तस्करी और बाल यौन उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने के लिए सामूहिक कार्रवाई के लिए बैठक कर रहे थे. श्री सत्यार्थी ने हाल ही में दिल्ली और अजमेर में इस खतरे से लड़ने के लिए सभी धर्मों के लोगों से समर्थन की मांग की थी.

2015 एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार 99% अपराधी यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों को अपने शिकार के लिए जाना जाता है, जिससे अपराध को रोकने और पता लगाने में मुश्किल होती है. रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 3,19,108 लड़कियां और 3,21,073 लड़के कानूनी उम्र से पहले शादीशुदा हैं.

इसके अतिरिक्त, 2013-2015 के बीच लापता बच्चों की संख्या 17,560 थी ये संख्या इन राज्यों पर होने वाली बाल तस्करी की मात्रा का केवल संकेत मात्र है और ये बच्चे कई बार बेचे जाते हैं और शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीड़न सहन करने के लिए लगातार मजबूर होते हैं.

श्री सत्यार्थी ने पीड़ितों या उनके परिवारों को बोलने से रोकने के लिए समाज में मौजूद भय के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की यह भय अपराधियों को स्वतंत्र रूप से घूमने और अधिक घृणित अपराध करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे कई जीवन नष्ट हो जाते है.

ये यात्रा बाल-बलात्कार और बाल यौन दुर्व्यवहार के खिलाफ तीन साल की अभियान की शुरूआत है, जिसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाने और मामलों की रिपोर्टिंग, चिकित्सा स्वास्थ्य और क्षतिपूर्ति सहित अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया को मजबूत करना है.

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खेल दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने मेजर ध्यानचंद को किया नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान हाकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रृद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर तमाम खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों को बधाई दी .


अंतिम अपडेट: मंगलवार अगस्त 29, 2017 – 03:57 PM IST

खेल दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने मेजर ध्यानचंद को किया नमन

खेल दिवस पर पीएम मोदी ने किया मेजर ध्यान चंद को नमन (फाइल फोटो)

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