Monthly Archives: September 2017

…इस मंदिर में होती है रावण की पूजा, दशहरे के दिन नहीं खोले जाते कपाट

बदायूं: आम भारतीयों के मन में वैसे तो रावण एक खलनायक की तरह हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक मंदिर ऐसा भी है जहां लंकेश की विधिवत पूजा की जाती है. दशहरा पर बुराई के प्रतीक को जलाने की तैयारियों की धूम के बीच यह एक दिलचस्प तथ्य है. बदायूं शहर के साहूकार मुहल्ले में रावण का बहुत प्राचीन मंदिर है. हालांकि दशहरे के दिन इस मंदिर के कपाट नहीं खोले जाते. इस मंदिर की स्थापना पंडित बलदेव प्रसाद ने लगभग 100 साल पहले की थी. बलदेव रावण को प्रकाण्ड विद्वान और अद्वितीय शिवभक्त मानकर उसकी पूजा करते थे. उनकी देखादेखी कई और लोगों ने भी मंदिर आकर पूजा शुरू कर दी.

इस मंदिर में रावण की आदमक़द प्रतिमा स्थापित है, जिसके नीचे शिवलिंग प्रतिष्ठापित किया गया है. मंदिर के दायीं तरफ भगवान विष्णु की प्रतिमा है. मंदिर में रावण की प्रतिमा को भगवान शिव की आराधना करते हुए स्थापित किया गया है. इस मंदिर में रावण के अतिरिक्त जितने भी देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, उनका आकार रावण की प्रतिमा से काफी कम है. पूरे उत्तर भारत में सम्भवतः यही एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां रावण की पूजा होती है.

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समाजसेवी डाक्टर विष्णु प्रकाश मिश्र बताते हैं कि मंदिर की स्थापना करने वाले पंडित बलदेव का तर्क था कि रावण बहुत ज्ञानी था. वह जानता था कि माता सीता लक्ष्मी जी का और श्री राम भगवान विष्णु के अवतार हैं, इसलिये वह भक्ति के लिये सीता माता का हरण कर लिया था, ताकि लंका में सुख-समृद्धि सदा कायम रहे.

उन्होंने बताया कि बलदेव मानते थे कि रावण ने इसलिये माता सीता को अपने महल में ना रखकर अशोक वाटिका जैसे पवित्र स्थान पर ठहराया था और उनकी सुरक्षा के लिये केवल स्त्रियों को ही तैनात किया गया था. इसी तर्क को रावण की पूजा करने वाले आज तक मानते चले आ रहे हैं.

मंदिर के पास रहने वाली पुजारिन रश्मि वर्मा ने बताया कि लोग रावण की पूजा अक्सर चोरी-छुपे ही करते हैं. चूंकि भारतीय संस्कृति में रावण को बुराई का प्रतीक माना गया है, शायद इसलिये वे ऐसा करते हैं. उन्होंने बताया कि विजय दशमी के दिन रावण के इस मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहते हैं और रावण को आदर्श मानने वाले लोग इस दिन अपने घर में कोई खुशी भी नहीं मनाते.

रश्मि ने कहा कि भारत एक धर्म प्रधान देश है. देश के अलग-अलग प्रान्तों में कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं. पूजा भले ही अलग-अलग देवी देवताओं की होती हो, लेकिन पूजा दरअसल देवत्व गुणों की ही होती है.

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दिग्विजय सिंह को सता रही ‘लुंगी’ की चिंता, लिख दी CM को चिट्ठी

जबलपुर : नर्मदा नदी की पैदल परिक्रमा शुरू करने के दो दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह छह माह की इस यात्रा के दौरान अपने शौच के स्थान को लेकर परेशान दिखाई दिए. 70 वर्षीय दिग्विजय ने नर्मदा परिक्रमा की 3,300 किलोमीटर यात्रा के दौरान प्रदेश सरकार से उन्हें चलित शौचालय उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था. इस पर सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं करने की खबरों के सवाल पर दिग्विजय ने कहा, ‘स्वच्छ भारत अभियान (एसबीए) के तहत कई तुगलकी फरमान जारी किए गए हैं, जिसमें लुंगी जब्त करने तक के प्रावधान हैं.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि यात्रा के दौरान कोई मेरी या मेरी साथियों की धोती (लुंगी) उठाए. उन्होंने रांची नगर निगम की तरफ से चलाए जा रहे अभियान ‘हल्ला बोल, लुंगी खोल’ के संदर्भ में यह बोला. इस अभियान के तहत वहां गत रविवार खुले में शौच जाने पर सजा के तौर पर लुंगी रख ली गई. बाद में खुले में शौच नहीं करने के वादे के साथ लोगों को उनकी लुंगी लौटाई गईं.

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छह माह तक चलने वाली इस यात्रा के लिये चलित शौचालय की मांग के संबंध में सरकार से पत्राचार किए जाने के संबंध में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखा था. प्रोटोकाल का पालन नहीं करते हुए मुख्य सचिव के अधीनस्थ अधिकारी द्वारा उनके पत्र का जवाब दिया गया जिसमें कहा है कि उनकी मांग संबंधित पत्र को संबंधित विभाग के पास भिजवा दिया गया है. इस तरह से स्वच्छता के मुद्दे पर मेरी मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.

दिग्विजय अपने आध्यात्मिक गुरु द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आशीर्वाद के बाद दशहरे से नरसिंहपुर में नर्मदा नदी के किनारे बरमान घाट से नर्मदा परिक्रमा शुरू करेंगे. वहीं, मध्य प्रदेश सरकार इस पद यात्रा के दौरान दिग्वजय को सुरक्षा मुहैया कराएगी. उनके साथ एक पुलिस अधिकारी भी रहेगा.

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गौरतलब है कि अगले साल के अंत में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में दिग्विजय की ये परिक्रमा मध्य प्रदेश की कुल 230 विधानसभा क्षेत्रों में से 110 से गुजरेगी. इसके अलावा, दिग्विजय की यह नर्मदा परिक्रमा गुजरात विधानसभा के 20 क्षेत्रों से भी गुजरेगी और गुजरात में भी इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं.  इसलिए लोगों द्वारा दिग्विजय की इस यात्रा को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है.

दिग्विजय पूर्व राघौगढ़ राजघराने के वारिस हैं और राघौगढ़ के किले में पिछले तीन शताब्दियों से इस घराने के लोग दशहरा पर्व को भव्य तरीके से मनाते आ रहे हैं. दशहरे के दिन से अपनी इस नर्मदा परिक्रमा की यात्रा शुरू करने के चलते दिग्विजय पहली बार इस किले में आयोजित की जाने वाली इस समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे.

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सर्जिकल स्‍ट्राइक: अमावस की उस रात जब सेना ने LoC पार बोला धावा

पिछले साल सितंबर में आतंकियों ने जम्‍मू-कश्‍मीर के उड़ी सैन्‍य शिविर में हमला कर दिया. हमले के बाद 28-29 सितंबर की रात भारत ने जम्मू-कश्मीर में Line of Control यानी नियंत्रण रेखा के आसपास के इलाक़ों में पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर यानी PoK में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को अंजाम दिया. सर्जिकल स्‍ट्राइक एक ऐसा सैन्‍य हमला होता है, जिसमें किसी खास लक्ष्य को निशाना बनाया जाता है. उस ऑपरेशन में आतंकी कैंपों को तबाह किया गया. 

ये कैंप LoC पर 500 मीटर से लेकर 2 किलोमीटर तक की रेंज में चल रहे थे. ये ऑपरेशन रात 12.30 बजे शुरू हुआ था और कम से कम सुबह 4.30 बजे तक चला. इसके बाद हमारे सैनिक सही सलामत वापस लौट आए. 

ऐसे ऑपरेशन्स में सुरक्षा बलों के दो दोस्त होते हैं, एक घुप्प अंधेरा और दूसरा खराब मौसम. सेना ने इसका भरपूर लाभ मिला क्‍योंकि अमावस्‍या होने की वजह से उस रात बहुत अंधेरा था.

सीमापार ऑपरेशन
1. वर्ष 1960 में इज़रायल ने अर्जेंटीना में सीमापार ऑपरेशन करके युद्ध अपराध के दोषी जर्मन नाज़ी अधिकारी एडोल्फ आइशमैन को गिरफ्तार किया था. इसके बाद वर्ष 1962 में इजरायल ने एडोल्फ आइशमैन को यहूदी लोगों की हत्या करने के अपराध में फांसी दे दी थी. 

2. इज़रायल ने ही वर्ष 2006 में Cross Border Operation के तहत लेबनान में आतंकवादी संगठन हिजबुल्ला के ठिकानों को तबाह कर दिया था. इस दौरान जब हिजबुल्ला के आतंकवादियों ने इज़रायल के दो सैनिकों को बंधक बना लिया तो इज़रायल ने बेरुत के हवाई अड्डे और बंदरगाह पर बमबारी कर दी थी.

3. वर्ष 2002 में अमेरिका ने Cross Border Operation के तहत मानवरहित ड्रोन विमान के ज़रिये यमन में अलकायदा के पांच आतंकवादियों को मार डाला था…इन आतंकवादियों ने वर्ष 2002 में यमन के अदन बंदरगाह पर अमेरिका के Naval vessel पर हमला करके 19 अमेरिकी नौसैनिकों को मार डाला था.

4. वर्ष 2003 में अमेरिका ने इराक पर हमले किए थे. जिनमें सरकारी इमारतों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था. इसे एक बेहतरीन और सुनियोजित तरीके से किया गया सर्जिकल स्‍ट्राइक माना जाता है. 

5. इसके बाद वर्ष 2011 में अमेरिका के सील कमांडोज़ ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में छिपे ओसामा बिन लादेन को भी सीमापार ऑपरेशन करके ही मारा था. 

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भाजपा के मंत्री बोले- अब ताे विरोधी भी कहने लगे हैं कि राम मंदिर बनना चाहिए

इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने आज भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में होगा और 2019 से पहले वहां एक भव्य राम मंदिर बनेगा. मुस्लिम समुदाय से भी भाई बहन सामने आकर कहेंगे कि वे राम मंदिर चाहते हैं और यह बदलाव वह देख रहे हैं.यहां विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय परिसर में स्वामी ब्रह्मयोगानंद की पुस्तक “संपूर्ण भारत, परम वैभव भारत” का विमोचन करने आए चिकित्सा मंत्री ने कहा, मेरे विचार से राम मंदिर पहले से वहां है, हमें एक भव्य राम मंदिर बनाना है. इसलिए राम मंदिर वहां है या नहीं, यह प्रश्न ही नहीं उठता. वह वहां है और रहेगा.

उन्होंने कहा, यदि कोई हमसे हमारे तीन एजेंडा के बारे में पूछे तो एक है तीन तलाक, दूसरा है राम मंदिर और तीसरा है अनुच्छेद 370. हमारे देश में परिस्थितियां कैसे बदल रही हैं यह देखें. जो लोग तीन तलाक को जायज ठहराया करते थे अब वे लोग उच्चतम न्यायालय के सामने खड़े होकर कह रहे हैं कि तीन तलाक गलत है और यह खत्म होना चाहिए. मंत्री ने दावा करते हुए कहा, जो लोग राम मंदिर को लेकर राजी नहीं थे, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं थे, आज उनमें से 90 फीसद लोग कह रहे हैं कि जमीन लो और एक भव्य राम मंदिर का निर्माण करो. परिस्थितियां बदल रही हैं.

उन्होंने कहा, स्वामी जी (स्वामी ब्रह्मयोगानंद) के आशीर्वाद से स्वतंत्रता के बाद पहली बार आज जम्मू कश्मीर में भाजपा की सरकार है. अनुच्छेद 370 भी हटेगा, परिस्थितियों की वजह से यह होगा. यह आपकी मेहनत, आपके आशीर्वाद से होगा. सिंह ने कहा, धर्मनिरपेक्षवाद का अर्थ है कि हर किसी को अपने धर्म का पालन करने और आस्था का अधिकार हो.

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सिद्धार्थ नाथ ने कहा, देश को कुछ खास संकेत और नारे एकता के सूत्र में बांधते हैं. मैं वंदे मातरम को इनमें से एक मानता हूं, राष्ट्रीय ध्वज को एक मानता हूं, राष्ट्रगान को इनमें से एक मानता हूं. लेकिन आज जो लोग इस देश में धर्मनिरपेक्षवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, उन्होंने इसे तोड़ मरोड़ दिया है और इसे बदल दिया है. उन्होंने इसे ऐसा बना दिया है, जो वंदे मातरम गाता है, वह धर्मनिरपेक्ष नहीं है. जब राष्ट्रगान गाया जा रहा हो और आप खड़े हो जाते हैं तब आप धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं. जब हिंदू की बात करते हैं तब आप धर्मनिरपेक्ष नहीं होते. लेकिन आज देश एकजुट है और इन चीजों का विरोध करने वालों को कह रहा है कि आप छद्म धर्मनिरपेक्ष हैं और हम आपको नहीं चाहते.

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दिल्ली की लड़की के साथ राजस्थान में 23 युवकों ने किया गैंगरेप

राजस्थान के बीकानेर में एक लड़की के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी गईं. दिल्ली से राजस्थान पहुंची युवती के साथ 23 लोगों ने गैंगरेप किया.


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: Sep 29, 2017, 08:35 AM IST

दिल्ली की लड़की के साथ राजस्थान में 23 युवकों ने किया गैंगरेप

दिल्ली की युवती के साथ राजस्थान में गैंगरेप (फोटो-एएनआई)

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Zee जानकारी: भगत सिंह आज अगर ज़िंदा होते तो वो बेहद दुखी होते क्योंकि…

23 साल की उम्र… ज़िंदगी का वो पड़ाव होता है जब लोग सिर्फ.. अपने बारे में सोचते हैं और सिर्फ अपने भविष्य की चिंता करते हैं. लेकिन भगत सिंह 23 वर्ष की उम्र में इसलिए फांसी पर चढ़ गए क्योंकि उन्हें हमारे देश के भविष्य की चिंता थी. और यही बात उन्हें सबसे अलग बनाती है.

आज भगत सिंह का जन्मदिन है… भगत सिंह के जन्म की तारीख को लेकर इतिहासकारों में विवाद है . कई किताबों में उनकी जन्मतिथि को 27 सितंबर 1907 बताया जाता है और बहुत से एक्सपर्ट, 28 सितंबर 1907 को उनकी जन्मतिथि मानते हैं . लेकिन भगत सिंह की शख्सियत के सामने ये विवाद मायने नहीं रखता. इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि उनका जन्म किस तारीख को हुआ ? महत्वपूर्ण बात ये है उन्होंने इतनी कम उम्र में देश के लिए कितना बड़ा बलिदान दिया? यही वजह है कि भगत सिंह के जन्म से ज़्यादा उनकी शहादत की चर्चा होती है. 

23 मार्च 1931 को भगत सिंह शहीद हो गए थे. इस ऐतिहासिक घटना ने पूरे भारत को क्रांति वाली बिजली के ऐसे झटके दिए थे कि पूरा हिंदुस्तान एक साथ खड़ा हो गया. भगत सिंह की शहादत की वजह से अंग्रेज़ों पर दबाव बहुत बढ़ गया था. भगत सिंह चाहते तो अंग्रेज़ी हुकूमत के सामने झुक सकते थे और एक आरामदायक ज़िंदगी जी सकते थे, जो कि आज का हर युवा चाहता है. लेकिन उन्होंने बलिदान का रास्ता चुना . आज के दौर में किसी 23 वर्ष के युवा से आप ऐसी कुर्बानी की उम्मीद नहीं कर सकते. 

आजकल इस उम्र के युवाओं को इस बात की फिक्र होती है कि सोशल मीडिया पर उन्हें कितने Likes और Retweets मिले
इस हफ़्ते उनके Followers की संख्या कितनी बढ़ी

इस हफ़्ते पार्टी कहां है? और 
Latest स्मार्टफोन कैसे हासिल किया जाए?

यानी हमारे देश के युवा.. पार्टी करना चाहते हैं . मौजमस्ती करना चाहते हैं..महंगे मोबाइल फोन लेना चाहते हैं.. . और महंगी गाड़ियों में घूमना चाहते हैं. उन्हें Free के Data और Happy Hours में दिलचस्पी है.. और ये सब कुछ वो बिना परिश्रम किए हासिल करना चाहते हैं. ज़ाहिर है इन युवाओं की List में देश कहीं नहीं होता… और उन्हें देश के लिए बलिदान देने में कोई दिलचस्पी भी नहीं होती. 

लेकिन भगत सिंह ने सिर्फ 23 साल की उम्र में.. शहीद होकर पूरे देश में क्रांति की मशाल जला दी थी. 
अक्सर हमारे देश में ये कहा जाता है कि भगत सिंह अपने घर में नहीं.. पड़ोसी के घर में पैदा होने चाहिएं. क्योंकि कोई खुद इतना बड़ा बलिदान देने की कल्पना भी नहीं कर सकता. आज आपको ये सोचना चाहिए कि भगत सिंह की उस कुर्बानी के बदले आज आप उन्हें क्या दे सकते हैं ?

भगत सिंह ने देश की आज़ादी के लिए अपनी जान दी थी. लेकिन हमारे देश में कुछ ऐसे युवा भी हैं. जो विश्वविद्यालयों में भारत से आज़ादी के नारे लगाते हैं. और देश विरोधी एजेंडे को हवा देते हैं. अगर आज भगत सिंह ज़िंदा होते.. तो वो बहुत दुखी होते.. और उन्हें एक क्रांति ऐसे युवाओं के खिलाफ भी करनी पड़ती. आज़ादी से पहले तो देश के दुश्मन.. बाहर के लोग थे.. लेकिन आज दुश्मन, हमारे देश के अंदर मौजूद है

आज भगत सिंह के जन्मदिन के मौके पर हम उनके जीवन के आखिरी दिन यानी…. 23 मार्च 1931 की एक घटना का ज़िक्र करना चाहते हैं. ये वो तारीख थी जब शहीद भगत सिंह.. सुखदेव और राजगुरू को फांसी दी गई. फांसी से 2 घंटे पहले यानी शाम के करीब साढ़े पांच बजे, लाहौर जेल में भगत सिंह के वकील को उनसे मिलने की इजाज़त मिल गई. वकील ने भगत सिंह से पूछा कि आज तुम कैसे हो ? भगत सिंह ने कहा- हमेशा की तरह खुश हूं. वकील ने फिर पूछा कि तुम्हें किस चीज़ की इच्छा है . इसके जवाब में भगत सिंह ने कहा कि मैं इस देश में दोबारा पैदा होना चाहता हूं.
ज़रा सोचिए – सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में… ऐसे ऊंचे आदर्श और विचार आज कहां देखने को मिलते हैं?

ऐसे महानायक सदियों में एक बार ही जन्म लेते हैं. लेकिन उनका संघर्ष, उनके विचार, उनका अमर बलिदान हमेशा ज़िंदा रहता है.  आज हम उस चिट्ठी का ज़िक्र भी करना चाहते हैं जो शहीद भगत सिंह ने जेल के अंदर से.. देश को संबोधित करते हुए लिखी थी. हो सकता है, कि बहुत सारे युवाओं को भगत सिंह के विचार जानने का मौका ही ना मिला हो. इस चिट्ठी में भगत सिंह ने जो लिखा था, वो देश के हर युवा को ध्यान से देखना और सुनना चाहिए.  आप इस चिठ्ठी को ये मानकर भी पढ़ सकते हैं.. जैसे ये चिठ्ठी भगत सिंह ने आपके लिए ही लिखी थी. भगत सिंह के जीवन के बारे में ऐसी बहुत सी बातें होंगी जो शायद आप नहीं जानते होंगे इसीलिए आज हमने आपके लिए एक वीडियो विश्लेषण तैयार किया है ताकि आप भगत सिंह के शौर्य और उनके विचारों से प्रेरणा ले सकें. 

अपने तमाम सपनों की भीड़ में भगत सिंह ने देश की आज़ादी के सपने को सबसे ऊपर रखा और इस सपने के लिए वो अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटे. लेकिन आज अगर भगत सिंह ज़िन्दा होते, तो उन्हें देश के युवाओं की तस्वीर देखकर काफी तकलीफ पहुंचती. 

हमारे देश में 18 से 35 वर्ष की उम्र के 42 करोड़ लोग हैं. शहीद भगत सिंह के सपनों वाला भारत बनाने की राह में बेरोजगारी बड़ी समस्या है..सरकारी आंकड़ों के मुताबिक..देश में 31 दिसम्बर 2015 तक, 15 से 29 वर्ष के 2 करोड़ 86 लाख युवा ऐसे थे, जो काम करने के लायक होने के बावजूद बेरोज़गार थे.

शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा था कि अशिक्षा मानवता की दुश्मन है..अभी हालात ये हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा अनपढ़ वयस्क..भारत में हैं…संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अनपढ़ वयस्कों की आबादी करीब 28 करोड़ 70 लाख है…

अलग-अलग Reports के मुताबिक क़रीब 7 करोड़ 32 लाख युवा शराब और ड्रग्स का सेवन करते हैं.

इनमें से ज़्यादातर युवाओं की उम्र सिर्फ 18 वर्ष है.

Postgraduate Institute of Medical Education and Research की रिपोर्ट कहती है, कि भारत में 16 से 25 वर्ष की उम्र के युवाओं में ड्रग्स लेने की प्रवृति बढ़ती जा रही है. भगत सिंह ने आज़ाद भारत में भ्रष्टाचार की कल्पना नहीं की होगी, लेकिन हकीकत में भारत आज पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार के मामले में 79वें स्थान पर है.

भारत का युवा देश की तरक्की में नहीं, महंगे-महंगे Gadgets के इस्तेमाल में व्यस्त है. 25 देशों के युवाओं पर किए गए एक Online Survey में ये बात भी सामने आई थी, कि भारत के 95 फीसदी युवा Gadgets को अपनी ज़िन्दगी का सबसे अहम हिस्सा मानते हैं. और ज़्यादातर युवा इन्हीं Gadgets की Virtual दुनिया में खोए रहते हैं. उनमें देश के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा नहीं होती. इसी सोच की वजह से आज के युवा समाज से कटे हुए हैं

आज के युवाओं में से बहुत से युवा नशे में डूब चुके हैं. वो दोस्तों के साथ पार्टी करना चाहते हैं. कम से कम मेहनत करके… ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाना चाहते हैं और हमेशा Shortcuts की तलाश में रहते है. आज का युवा Gym जाकर अपनी Body बनाना शान की बात समझता है. लेकिन जब सड़क पर किसी लड़की या महिला से छेड़छाड़ की घटना होती है, तो वो चुपचाप तमाशा देखता रहता है. क्योंकि वो Body देश की रक्षा के लिए नहीं मॉडलिंग के लिए बनाई जाती है . कई युवा ऐसे भी हैं, जो लड़कियों पर तेज़ाब फेंकने में अपनी बहादुरी समझते हैं. इन भटके हुए युवाओं में वो लोग भी शामिल हैं, जो देशविरोधी नारे लगाते हैं. और जबतक भारत इन समस्याओं की बेड़ियों से आज़ाद नहीं हो जाता..तब तक भारत को शहीद भगत सिंह के सपनों का भारत नहीं कहा जा सकता. शहीद भगत सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकेगी, जब भारत का युवा अपनी सोच बदलेगा.

भगत सिंह आज अगर ज़िंदा होते तो वो बहुत दुखी होते.. क्योंकि हमारे देश में आजकल देशभक्ति और राष्ट्रवाद को एक गाली की तरह समझा जाता है. अगर आप किसी से ये कहें कि आप देशभक्त हैं या राष्ट्रवादी हैं… तो एजेंडा चलाने वाले कुछ लोग आपको तुरंत एक ख़ास विचारधारा से जोड़ देते हैं.. और आपको मुख्यधारा से काट देते हैं. भगत सिंह ने ये दौर देखा होता… तो उन्हें एक नई क्रांति की शुरुआत करनी पड़ती

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Zee जानकारी: जल चढ़ाने से महाकाल के ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंच रहा है

भारत के सभी शिव भक्तों को समर्पित है. ये ऐसी ख़बर है जो भगवान शिव के भक्तों को थोड़ा चिंतित कर देगी. आप में से बहुत लोगों ने उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग के दर्शन जरूर किए होंगे. बहुत से लोग ऐसे भी होंगे जो महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन जाने की Planning कर रहे होंगे. और बहुत से लोग मन में ये सोचते होंगे कि जीवन में कभी ना कभी महाकाल ज्योतिर्लिंग के दर्शन जरूर करें. ऐसे सभी लोगों को हम ये सूचना देना चाहते हैं कि महाकाल पर अशुद्ध जल कभी ना चढ़ाएं.

 ज्यादातर लोग ये मानते हैं कि जलाभिषेक यानी शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव बहुत प्रसन्न होते हैं. लेकिन Archaeological Survey of India और Geological Survey of India ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि जल चढ़ाने से महाकाल के ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंच रहा है… और ज्योतिर्लिंग की सतह घिस रही है.. जिससे इसका आकार छोटा होने का खतरा है.

आपने ऐसी कई पौराणिक कहानियां सुनी होंगी जिनमें ये कहा जाता है कि भगवान शिव को भस्म का लेप लगाना बहुत अच्छा लगता है. उज्जैन के महाकाल मंदिर में तो भस्म से ही ज्योतिर्लिंग की आरती की जाती है. लेकिन ASI और GSI की रिपोर्ट में कहा गया है कि गाय के गोबर से बनी भस्म के लेप से भी महाकाल के ज्योतिर्लिंग की परत को नुकसान पहुंच रहा है.
ASI और GSI की रिपोर्ट में ऐसी और भी कई बातें हैं जिन्हें सुनकर आप दंग रह जाएंगे… 

रिपोर्ट में कहा गया है कि महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर लगातार दूध, दही, घी और फलों को चढ़ाया जाता है
लेकिन ज्योतिर्लिंग की सतह नियमित रूप से साफ नहीं हो पा रही है.
जिसकी वजह से ज्योतिर्लिंग पर कई तरह के बैक्टीरिया का जमाव हो रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि दूध और दूध के उत्पादों में Lacto-bacillus बैक्टीरिया होता है.
ये बैक्टीरिया पानी के साथ मिलकर Glactose और Glucose बनाता है.
और इसी Glactose से Lactic Acid बनता है जो ज्योतिर्लिंग की परत को नुकसान पहुंचा रहा है.

गुलाल से भी ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि आजकल गुलाल में Chemicals की मात्रा बहुत ज्यादा है. तेल के दीपक और धूपबत्ती के इस्तेमाल से भी मंदिर पर कार्बन की परत जम रही है. 

यहां सबसे दिलचस्प बात ये है कि महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर भांग के लेप से कोई नुकसान नहीं हो रहा.. बल्कि इससे ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा हो रही है. भांग में Alcaloids होते हैं .  Alcaloids को हिंदी में उप-क्षार कहते हैं और ये Acid के असर को खत्म करता है. इसलिए भांग से ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा हो रही है

ASI ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिए हैं कि 

अगर भस्म आरती बहुत जरूरी है तो सिर्फ़ प्रतीकात्मक भस्म आरती ही की जाए. यानी ज्योतिर्लिंग पर रगड़ रगड़ कर भस्म का लेप नहीं किया जाना चाहिए. ज्योतिर्लिंग पर दूध, दही और घी चढ़ाने पर भी रोक लगाई जाए. ज्योतिर्लिंग पर शहद, चीनी, गुड़ और फल चढ़ाना प्रतिबंधित किया जाए. मंदिर के बाहर जो पानी मिल रहा है वो अशुद्ध और प्रदूषित है. इसलिए ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा को भी कम किया जाए.

उज्जैन को महातीर्थ माना जाता है ये तो आप सभी लोग जानते हैं लेकिन उज्जैन के बारे में तीन ख़ास बातें आपको जरूर पता होनी चाहिए.

विश्वनाथ की नगरी काशी को जिस तरह उत्तर भारत की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है. ठीक उसी तरह महाकाल की नगरी उज्जैन को मध्य भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है.

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म तो मथुरा में हुआ था, लेकिन उनकी शिक्षा उज्जैन में संदीपनी मुनि के आश्रम में हुई थी. और विक्रम सम्वत की शुरुआत भी उज्जैन से ही हुई थी.

जिस तरह उज्जैन का इतिहास बहुत पुराना है ठीक उसी तरह उज्जैन के महाकाल मंदिर का इतिहास भी बहुत पुराना और रोचक है. इसीलिए हमने आपके लिए एक वीडियो विश्लेषण भी तैयार किया है… जिसे देखकर आप ये समझ पाएंगे कि हमारे पूर्वजों ने महाकाल की देखभाल किस तरह की थी और आज कलियुग में हम किस तरह महाकाल मंदिर की देखभाल कर रहे हैं. पीढ़ियों का ये फर्क.. आपको समझना चाहिए. 

इस ख़बर का सार ये है कि मिलावट से भगवान शिव भी नहीं बच पाए.. और ये बात हमारे समाज के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाती है. हमारे देश में लोग भगवान की पूजा करते हैं.. लेकिन उनके आचरण में इतनी मिलावट है कि महाकाल का शिवलिंग भी अब घिसने लगा है. इस मिलावट वाले चरित्र को हमें बदलना होगा. आस्था और मिलावट का वास एक जगह नहीं हो सकता.

महाकाल का ज्योतिर्लिंग बलुआ पत्थर यानी Sandstone से बना है इसलिए ज्योतिर्लिंग के घिसने का खतरा बढ़ जाता है. ASI और GSI की रिपोर्ट के बाद मंदिर में बड़े फूलों की मालाओं को ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन बाकी सुझावों पर अब भी अमल नहीं किया जा रहा है लेकिन अगर आप महाकाल मंदिर के दर्शन के लिए उज्जैन जा रहे हैं तो आपको कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए

सबसे पहली बात तो मंदिर में अनुशासन का पालन करना चाहिए. गर्भगृह में भीड़ नहीं होनी चाहिए. लाइन में लगकर  ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने चाहिए. अगर महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाना हो तो एकदम शुद्ध जल का ही इस्तेमाल करें. मंदिर के गर्भगृह में सफाई का बहुत ध्यान रखें. और सबसे जरूरी बात ये है कि महाकाल मंदिर में अपनी शुद्ध भावनाओं का अर्पण करें क्योंकि भगवान को आपकी भावनाएं ही सबसे ज़्यादा प्रिय हैं.

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जेटली का सिन्हा पर जवाबी हमला, कहा- 80 साल की उम्र में नौकरी चाहते हैं

नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को भाजपा नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए जवाबी हमला बोला. एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में जेटली ने सिन्हा ने 80 साल की उम्र में नौकरी चाहने वाला करार देते हुए कहा कि वह वित्त मंत्री के रूप में अपने रिकॉर्ड को भूल गए हैं. जेटली ने कहा कि सिन्हा नीतियों के बजाय व्यक्तियों पर टिप्पणी कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सिन्हा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पीछे-पीछे चल रहे हैं. वह भूल चुके हैं कि कैसे कभी दोनों एक दूसरे के खिलाफ कड़वे बोल का इस्तेमाल करते थे.

हालांकि, जेटली ने सीधे-सीधे सिन्हा का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि उनके पास पूर्व वित्त मंत्री होने का सौभाग्य नहीं है, न ही उनके पास ऐसा पूर्व वित्त मंत्री होने का सौभाग्य है जो आज स्तंभकार बन चुका है. इसमें जेटली का पहला उल्लेख सिन्हा के लिए और दूसरा चिदंबरम के लिए था.

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उन्होंने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री होने पर मैं आसानी से संप्रग दो में नीतिगत शिथिलता को भूल जाता. मैं आसानी से 1998 से 2002 के एनपीए को भूल जाता. उस समय सिन्हा वित्त मंत्री थे. मैं आसानी से 1991 में बचे चार अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को भूल जाता. मैं पाला बदलकर इसकी व्याख्या बदल देता.

जेटली ने सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा कि वह इस तरह की टिप्पणियों के जरिये नौकरी ढूंढ रहे हैं. सिर्फ पीछे-पीछे चलने से तथ्य नहीं बदल जाएंगे.

वित्त मंत्री जेटली ने ‘India @70 Modi @3.5 पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि इस किताब के लिए उपयुक्त शीर्षक ‘India @70, Modi @3.5 and a job applicant @ 80, होना चाहिए था. पूर्व वित्त मंत्री सिन्हा (84) ने एक अखबार में अपने लेख ‘आई नीड टु स्पीक अप नाउ’ में जेटली की जोरदार आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने अर्थव्यवस्था की दुगर्ति कर दी है. इसके साथ ही सिन्हा ने नोटबंदी और जीएसटी के क्रियान्वयन के लिए सरकार पर भी हमला बोला था.

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सिन्हा ने लिखा, “प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने नजदीक से गरीबी देखी है. दूसरी तरफ उनके वित्त मंत्री दिन रात यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि सभी भारतीय भी इतने ही नजदीक से गरीबी देख लें.” इस मौके पर जेटली ने 1999 में संसद में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा उन्हें दी गई सलाह का भी जिक्र किया. उस समय जेटली बोफोर्स मुद्दे पर बोल रहे थे और आडवाणी ने उन्हें सलाह दी थी कि वह व्यक्तिगत टिप्पणियां न करें.’’ जेटली ने कहा कि कई विशिष्ट हस्तियां भी पहले वित्त मंत्री रह चुकी हैं. इनमें प्रणब मुखर्जी (पूर्व राष्ट्रपति) और पूर्व प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) शामिल हैं. इनके अलावा और भी पूववर्तियों ने ‘‘सामंजस्य बिठाते हुये’’ काम किया.

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वित्त मंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति पर बोलना और मुद्दे को नजरंदाज करना काफी आसान है. जेटली अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पूर्व में सिन्हा और चिदंबरम ने एक-दूसरे को क्या बोला है उस पर उन्होंने कुछ शोध किया है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, एक ने दूसरे के बारे में कहा था, “चिदंबरम को वित्त मंत्री के रूप में मेरे जैसा प्रदर्शन करने के लिए फिर जन्म लेना होगा. इसके बाद उन्होंने वित्त मंत्री चिदंबरम को ऐसा अक्षम चिकित्सक से जोड़ा था जो देश के राजकोषीय घाटे को काबू में नहीं रख पा रहा है. इसके बाद सिन्हा ने कहा था कि मैं उनपर अर्थव्यवस्था को जमीन पर लाने का आरोप लगाता हूं.” जेटली ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री ने चिदंबरम को सबसे अधिक अहंकारी व्यक्ति बताया था जो उनके फोन सुनते रहे.

जेटली ने सिन्हा का हवाला देते हुए कहा, “आज मैं पूर्ण जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि जब मैंने एयरसेल-मैक्सिस सौदे का मुद्दा उठाया तो चिदंबरम ने मेरे फोन टैप करने का आदेश दिया.” यही नहीं चिदंबरम ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान सिन्हा के कार्यकाल को उदारीकरण के बाद के सबसे खराब साल बताया था. जेटली ने हमले को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उस समय चिदंबरम ने कहा था कि श्री सिन्हा को ज्यादा लोग याद नहीं रखते हैं. चिदंबरम ने कहा था कि 2000 से 2001 और 2002-2003 वृद्धि के मामले में उदारीकरण के बाद के सबसे खराब वर्ष हैं. इसी वजह से प्रधानमंत्री वाजपेयी को उन्हें हटाना पड़ा था.

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बीएचयू तनाव: लाठीचार्ज मामले में बैकफुट पर प्रशासन, प्रो. रोयाना सिंह नई चीफ प्रॉक्टर

बीएचयू में छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ और पुलिस के लाठीचार्ज की घटना के बाद मचे बवाल के बीच संस्थान के चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओंकार नाथ सिंह ने घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.


ज़ी न्यूज़ डेस्क | अंतिम अपडेट: Sep 28, 2017, 07:19 PM IST

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शनिवार (23 सितंबर) देर रात छेड़खानी के विरोध में धरने पर बैठी छात्राओं को हटाने के लिए वाराणसी पुलिस ने बल प्रयोग किया था. (फाइल फोटो)

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यशवंत सिन्हा को गलत साबित करके दिखाए भाजपा : शिवसेना

मुंबईः केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि वह देश की अर्थव्यवस्था की हालत पर यशवंत सिन्हा की टिप्पणियों को गलत साबित करके दिखाए. यशवंत सिन्हा ने बुधवार को देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ और ‘दोपहर का सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम जैसे अर्थशास्त्री कह रहे थे कि तो उन्हें पागल कहा गया और जब शिवसेना और अन्य ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए तो उन्हें देशद्रोही कहा गया.

सामना के संपादकीय के मुताबिक, “भाजपा के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इन झूठे विचारों की बखिया उधेड़ी है. उन्होंने कई बयान दिए हैं और अब आप साक्ष्य देकर उन्हें गलत साबित करो.” संपादकीय में हवाला दिया गया कि रूस के तानाशाह जोसेफ स्टालिन के शासन में उनकी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को रातों रात गायब कर दिया गया या उन्हें यातनागृह शिविरों में भेज दिया गया. शिवसेना ने कहा, “सिन्हा ने सच बोला है. उन्होंने कई मुद्दों पर रोशनी डाली है, जिन्होंने तबाही मचाई है. इसमें नोटबंदी और देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत भी शामिल है. हमने यह देखना है कि उन्हें क्या सजा मिलेगी.”

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यशवंत सिन्हा को देश का वित्त मंत्री बनाया था और उनके विचारों को सोशल मीडिया नेटवर्को पर प्रचारकों द्वारा आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता. इन दिनों भाजपा सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं. मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं बेहतहाशा खर्च के बावजूद फ्लॉप रही हैं लेकिन इन्हें विज्ञापनों के जरिए सफल बताया जा रहा है.

शिवसेना ने कहा, “गुजरात में कहा जा रहा है कि ‘विकास गड़बड़झाला हो गया है’. सिन्हा ने सरकार के उन खोखले दावों को बेनकाब कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश की जीडीपी दर 5.7 फीसदी है लेकिन असल में यह 3.7 फीसदी है. जब कांग्रेस के मनमोहन सिंह और चिदंबरम ने भी यही बातें कही थी तो उन्हें भाजपा ने पागल की संज्ञा दी थी.”

संपादकीय में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उन बयानों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें कहा गया था कि किस तरह कुछ लोग विकास का बखान करते हैं लेकिन कुछ लोग अभी भी इस भ्रम है कि यदि वे ईवीएम में छेड़छाड़ कर चुनाव जीत गए तो यह विकास है. शिवसेना ने लेख में अर्थव्यस्था को लेकर सरकार के कई बड़े-बड़े दावों पर सवाल उठाते यशवंत सिन्हा के बयानों का जिक्र किया है कि किस तरह नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई, उत्पादन गिरा, महंगाई के बढ़ने, गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि, नौकरियों में कटौती, निवेश में तेज गिरावट, बैकिंग क्षेत्र की स्थिति बिगड़ी है. संपादकीय के मुताबिक, “हमने यह बातें एक साल पहले कही थी और भाजपा ने हमें देशद्रोही करार दे दिया था. अब यशवंत सिन्हा की बारी है.”

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