Monthly Archives: October 2017

जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाएंगे तोगड़िया, शुरू करेंगे ‘हिंदू हेल्पलाइन’

‘हिंदू हेल्पलाइन’ का मकसद तीर्थ यात्रा, छुट्टियों, दुर्घटना या किसी आपातकालीन स्थिति अथवा अन्य मामलों पर समुदाय के सदस्यों की मदद करना है.

जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाएंगे तोगड़िया, शुरू करेंगे ‘हिंदू हेल्पलाइन’

तोगड़िया ‘हिंदू हेल्पलाइन’ के प्रमुख सदस्यों की एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक की अध्यक्षता करेंगे. (फाइल फोटो)

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वाई. सी. मोदी ने एनआईए प्रमुख पद संभाला, शरद कुमार की लेंगे जगह

नई दिल्‍ली: भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी वाई.सी. मोदी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का कार्यभार संभाल लिया है. उन्होंने शरद कुमार का स्थान लिया है. मोदी 2002 गुजरात दंगों की जांच करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाई गई जांच टीम का हिस्सा थे. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी ने बताया कि असम-मेघालय कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी योगेश चंद्र मोदी ने एनआईए महानिदेशक का पद संभाल लिया है. उन्होंने हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी शरद कुमार का स्थान लिया है जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है.

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कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के आदेश के अनुसार, मोदी 31 मई 2021 को सेवानिवृत्त होने तक इस पद को संभालेंगे. मोदी ऐसे समय एनआईए की कमान संभाल रहें हैं जब जांच एजेंसी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा जम्मू एवं कश्मीर में अलगाववादियों व पथराव करने वाले लोगों के वित्त पोषण के मामले की जांच कर रही है. मोदी ने इससे पहले 22 सितम्बर को एनआईए में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) का कार्यभार संभाला था.

यहां कार्यभार संभलने से पहले वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में विशेष निदेशक के पद पर नियुक्त थे.  मोदी को वर्ष 2005 में सीबीआई का अतिरिक्त निदेशक बनाया गया था. वह 2002 के गुजरात दंगों की जांच के लिए बने विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्य थे. एसआईटी ने नरेंद्र मोदी (उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री) को दंगे से जुड़े गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड मामले में दोषमुक्त कर दिया था. एनआईए के अनुसार, वाई.सी. मोदी को जांच और संचालन का 33 वर्षो का लंबा अनुभव है.

एनआईए के अनुसार, उन्होंने 2002 से 2010 और 2015 से 2017 तक दो खंडों में सीबीआई के साथ लगभग 10 वर्षो तक काम किया और इस दौरान उन्होंने आतंकवाद रोधी मामलों के अलावा विशेष अपराध और आर्थिक अपराधों के मामलों में भी काम किया. मोदी को वर्ष 2001 में उत्कृष्ट सेवा के पुलिस मेडल और वर्ष 2008 में प्रतिष्ठित सेवा के राष्ट्रपति पुलिस मेडल सम्मान से नवाजा गया. शरद कुमार को 5 अगस्त 2013 को एनआईए प्रमुख बनाया गया था. 

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उनके कार्यकाल में दो बार विस्तार किया गया और पिछले वर्ष अक्टूबर 2013 को अंतिम बार उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था. बयान के अनुसार, शरद कुमार के कार्यकाल में, एनआईए ने कई कठिन आतंकवादी अपराधों और बोधगया मंदिर बम धमाका, पटना में नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान विस्फोट, पठानकोट एयरबेस हमला, आईएसआईएस और जम्मू एवं कश्मीर आतंकवाद वित्तपोषण मामले समेत कई जटिल मामलों को सुलझाने में उल्लेखनीय सफलता पाई.

एजेंसी ने कहा कि एनआईए ने कोलकाता, रायपुर और जम्मू में नई शाखा बना कर पूरे देश में अपनी भौगोलिक स्थिति बढ़ाई है. लखनऊ शाखा के कार्यालय और आवासीय परिसर का भी इस वर्ष अगस्त में उद्घाटन किया गया. 

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महात्‍मा गांधी की हत्‍या: पड़पोते तुषार गांधी मामले की जांच के खिलाफ, SC पहुंचे

नई दिल्‍ली: महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी 70 वर्ष पहले हुई महात्मा गांधी की हत्या के मामले को फिर से खोलने की मांग करने वाली याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एमएम शांतानागौदर की पीठ ने यह जानना चाहा कि तुषार किस हैसियत से इस याचिका का विरोध कर रहे हैं? तुषार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अगर अदालत इस मामले पर आगे बढ़ती है और नोटिस जारी करती है तो वह स्थिति के बारे में समझा सकेंगी. पीठ ने कहा कि इस मामले में कई सारे किंतु-परंतु हैं और अदालत न्यायमित्र अमरेंद्र शरण की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहेगी.

अमरेंद्र शरण ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार से दस्तावेज अभी नहीं मिले हैं. जयसिंह ने कहा कि वह महात्मा गांधी की हत्या के 70 वर्ष पुराने मामले को फिर से खोले जाने का विरोध कर रही हैं और याचिकाकर्ता के याचिका दायर करने के अधिकार पर भी सवाल उठा रही हैं.

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याचिका
याचिकाकर्ता मुंबई के रहने वाले पंकज फड़नीस हैं. वह अभिनव भारत के न्यासी और शोधकर्ता हैं. इस मामले को पीठ ने चार सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध किया. शीर्ष अदालत ने इस मामले में सहयोग के लिए छह अक्‍टूबर को वरिष्ठ अधिवक्ता शरण को न्यायमित्र नियुक्त किया था. इस दौरान पीठ ने कई सवाल उठाए मसलन मामले में आगे की जांच के आदेश के लिए अब साक्ष्य किस तरह जुटाए जा सकेंगे. गौरतलब है कि मामले में दोषी करार दिए गए नाथूराम विनायक गोडसे और नारायण आप्टे को 15 नवंबर 1949 को फांसी दे दी गई थी. महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में गोडसे ने बेहद नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी.

तीन गोलियों वाली थ्योरी
फडनीस ने कई आधारों पर जांच को फिर से शुरू करने की मांग की थी, उन्होंने दावा किया था कि यह इतिहास का सबसे बड़ा कवर-अप (लीपापोती) है. उन्होंने ‘तीन गोलियों वाली थ्योरी’ पर भी सवाल उठाया. इसी थ्योरी के आधार पर विभिन्न अदालतों ने आरोपी गोडसे और आप्टे को दोषी करार दिया था. उन्हें फांसी दे दी गई थी. जबकि विनायक दामोदर सावरकर को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ दिया गया था.

फडनीस ने दावा किया कि दो दोषी व्यक्तियों के अलावा कोई तीसरा हमलावर भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका की खुफिया एजेंसी और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की पूर्ववर्ती ऑफिस ऑफ स्ट्रेटेजिक सर्विसेस (ओएसएस) ने महात्मा गांधी को बचाने की कोशिश की थी या नहीं.

बांबे हाई कोर्ट का फैसला
उन्होंने बांबे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें छह जून 2016 को दो आधारों पर उनकी जनहित याचिका रद्द कर दी गई थी. पहला यह कि तथ्यों की जांच-पड़ताल एक सक्षम अदालत ने की है और इसकी पुष्टि शीर्ष अदालत तक हुई है. दूसरा यह कि कपूर आयोग ने अपनी रिपोर्ट जांच-पड़ताल पूरी करके वर्ष 1969 में सौंपी थी जबकि वर्तमान याचिका 46 वर्ष बाद दायर की गई.

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संस्कार और भजन-कीर्तन से दूर हो सकता है Depression, JNU अध्ययन का दावा

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का संस्कृत अध्ययन संस्थान के एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि बच्चों को दिए गए संस्कार और भजन-कीर्तन डिप्रेशन सहित दिमाग से संबंधित अन्य समस्याओं को दूर कर सकते हैं. ये विकल्प दवाइयों से बेहतर है, क्योंकि मनोचिकित्सा और दवाएं मरीजों की स्थिति को और बिगाड़ रही हैं. छोटी उम्र से ही भजन-कीर्तन सुनना स्ट्रेस बस्टर के रूप में काम करेगा. DNA में प्रकाशित खबर के मुताबिक, जेएनयू में वैदिक शास्त्र के प्रोफेसर सुधीर कुमार आर्य ने कहा कि इस तरह का शोध कार्य पहली बार किया गया है. उन्होंने कहा कि, भागवत पुराण और अग्नि पुराण पर आधारित अध्ययन में सामने आया कि प्रारंभिक अवस्था में सिखाए गए नैतिक मूल्यों से  चिंता, तनाव, अवसाद या अन्य मानसिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा.

योग भी इस समस्या से जूझने में काफी मददगार साबित होता है. रिसर्च में कहा गया कि न्यूक्लियर फैमिली और परिवार में एक ही बच्चा होने जैसी अवधारणाएं भी युवाओं में अवसाद और तनाव का कारण बन रहे हैं. इन समस्याओं के लिए उपलब्ध चिकित्सा उपचार केवल शारीरिक समस्याओं का इलाज कर सकते हैं लेकिन मानसिक समस्याओं का नहीं.

अवसाद खत्म करने वाली दवाएं बन सकती हैं जान की दुश्मन

रिसर्च करने वाली नंदिनी दास ने कहा, कि इस तरह की समस्याएं पुराने जमाने से ज्यादा आधुनिक युग में देखने को मिल रही हैं. हम आमतौर पर दिमाग से जुड़ी समस्याओं को विदेशी अवधारणा मानते हैं, लेकिन हमारे पुराणों और वेदों तक में इसका जिक्र मिलता है.

अच्छी सेहत के लिए आध्यात्मिक कार्यों की महत्ता पर बात करते हुए नंदिनी ने कहा कि, रिसर्च करते हुए हमने पाया कि भजन और कीर्तन सुनने से स्ट्रेस जैसी समस्याएं नहीं होती. इसे छोटी उम्र में ही हमारी जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

तनाव और अवसाद को रोकने में मददगार हैं ये फूड्स!

प्रोफेसर सुधीर कुमार आर्य ने कहा कि, हमारे समाज में मानसिक समस्याओं को पागलपन से जोड़ा जाता है. ऐसे में उन्हें मनोचिकित्सक के यहां ले जाया जाता है. लेकिन इलाज के रूप में वे सिर्फ दवाइयां देते हैं, जो नुकसनादेह है. न्यूक्लियर फैमिली के बढ़ते चलन पर प्रोफेसर आर्य ने कहा कि, इसके कारण युवाओं में अवसाद जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं, क्योंकि उनमें अनुशासित जीवन जीने की आदत नहीं होती, जिससे वे अपने नैतिक भावना पर नियंत्रण खो देते हैं.

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भारत लौटकर भी नहीं बदले सीएम शिवराज के सुर, कहा- वाशिंगटन की 92 फीसदी सड़कें खराब

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका में दिए अपने बयान को एक बार फिर दोहराया है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को भोपाल में कहा कि अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन की 92 प्रतिशत सड़कें खराब हालत में हैं. अमेरिका में शिवराज ने कहा था कि मध्य प्रदेश की कई सड़कें वाशिंगटन डीसी की सड़कों से अच्छी हालत में है. अमेरिका की एक सप्ताह की यात्रा से वापस लौटने के बाद यहां हवाईअड्डे पर चौहान ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं यह बात पूरी गंभीरता से कहना चाहता हूं कि मैं मध्यप्रदेश की ब्रांडिंग करने अमेरिका गया था. मैंने यह (सड़कों के बारे में) तब महसूस किया जब मैं वाशिंगटन हवाईअड्डे से शहर की ओर सड़क से जा रहा था. मैं कोई स्थानीय गलियों की सड़कों के बारे में बात नहीं कर रहा था.’ 

चौहान ने कहा, ‘मैं आपको उदाहरण देना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में जब आप इन्दौर हवाई अड्डे से सुपर कॉरीडोर सड़क से शहर की ओर जायेगें तो आप एक विश्वस्तरीय सड़क पायेंगे. जब अमेरिका में मैंने सड़क के बारे में कहा था तो मेरे दिमाग में यही अहसास था. मैं वहां अपने प्रदेश की ब्रांडिग करने गया था, न कि यहां की स्थानीय सड़कों की ख्रराब हालत बताने. लेकिन हमारे कांग्रेसी मित्रों को हर चीज में राजनीति दिखती है.’ इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश के इन्दौर-भोपाल और इन्दौर-मंदसौर जैसे विश्वस्तरीय राजमार्गो का भी उदाहरण दिया.

सीएम शिवराज ने कहा, ‘मैं वहां अपने प्रदेश और देश के अच्छे और सकारात्मक पक्ष बताने गया था. मैंने एक रिपोर्ट में पढ़ा कि वाशिंगटन की 92 फीसद सड़कें खराब हालत में हैं.’ 

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उल्लेखनीय है कि चौहान ने गत सप्ताह अमेरिका की राजधानी में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री और यूएस-इंडिया स्ट्रेजिक पार्टनरशीप फोरम के एक कार्यक्रम में कहा था, ‘जब मैं वाशिंगटन हवाई अड्डे पर उतरकर शहर की ओर आ रहा था तो मैंने महसूस किया कि मध्यप्रदेश की सड़कें अमेरिका से अच्छी हैं. मैं यह केवल कहने के लिये नहीं कह रहा हूं.’ चौहान ने दावा किया की इसके अलावा मध्यप्रदेश महिला सशक्तीकरण, सिंचाई और मीडिया की निष्पक्षता जैसे मामलों में अमेरिका से कहीं आगे है. 

उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में एक महिला राष्ट्रपति बनते बनते रह गयीं जबकि भारत में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री जैसे उच्च पदों सहित पंचायत से संसद तक सभी स्तरों पर महिलाएं आसीन रह चुकी हैं. इस प्रकार जहां तक महिला सशक्तीकरण का सवाल है हम कहीं आगे हैं.’ उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में पिछले कुछ वर्षो में लगभग 1.5 लाख किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण हुआ है.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और मध्यप्रदेश में मीडिया निष्पक्ष है जबकि अमेरिकी मीडिया निष्पक्ष नहीं है. हमारा मीडिया तटस्थ रहता है जबकि अमेरिकी मीडिया पक्ष लेता है. वह दृढ़ता से एक पक्ष के साथ खड़ा होता है, जबकि हमारा मीडिया सभी को निशाने पर लेता है.

अपनी अमेरिका यात्रा की उपलब्धियों की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी वहां निवेशकों से काफी सार्थक चर्चा हुयी. निवेशकों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रानिक, और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रूचि दिखाई है.

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश से ताल्लुक रखने वाले अमेरिका के 400 डॉक्टर ‘फ्रेन्डस आफ मध्यप्रदेश’ संगठन के तहत इकठ्ठे हुए हैं और उन्होंने यहां के डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने की पेशकश की है. इसके साथ ही हमें शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग करने के प्रस्ताव मिले हैं.

चौहान ने बताया कि फ्रेन्डस आफ मध्यप्रदेश की एक बैठक अगले साल 4-5 जनवरी को इन्दौर में रखी गयी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर वह पंडित जी के ‘एकात्म मानववाद’ की अवधारणा पर व्याख्यान देने के लिये आमंत्रण पर वहां गये थे. विश्व में साम्यवाद, समाजवाद और पूंजीवाद की असफलता के बाद एकात्म मानववाद की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है.

उन्होंने दावा किया कि भारत और अमेरिका भी बीच बेहतर संबंधों का यह स्वर्णकाल है. उन्होंने कहा, ‘बराक ओबामा (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति) के बाद डोनाल्ड ट्रम्प भी भारत के साथ अमेरिका के मजबूत संबंधों के समर्थन में हैं. अमेरिका में भारतीयों को काफी सम्मान के साथ देखा जाता है.’

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उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया ‘ताज’ को भारत की सांस्कृतिक धरोहर

रावत ने मेरठ के एक इंटर कॉलेज में आयोजित एक समारोह में कहा कि आने वाले समय में उत्तराखंड के गांवों का विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से पलायन को रोका जाएगा.

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया 'ताज' को भारत की सांस्कृतिक धरोहर

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को कहा कि ‘‘ताजमहल भारत की सांस्कृतिक धरोहर है.’’ (फाइल फोटो)

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अहमद पटेल ने राजनाथ को लिखी चिट्ठी, ‘ISIS से मेरे रिश्ते के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो’

अहमदाबाद: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखी है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक इस चिट्ठी में अहमद पटेल ने मांग की है कि गिरफ्तार इस्लामिक स्टेट (ISIS) के सदस्य के साथ कथित तौर पर अहमद पटेल के रिश्ते के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए. अहमद पटेल ने कहा है कि जांच में बेवजह उनका नाम नहीं घसीटा जाए. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव पटेल सूरत से इस्लामिक स्टेट के दो संदिग्ध सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुए राजनीतिक घमासान के केंद्र में हैं. इनमें से एक संदिग्ध कासिम टिंबरवाला भरुच जिले में सरदार पटेल अस्पताल में काम करता था जहां पटेल एक ट्रस्टी थे.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में पटेल ने कहा कि भाजपा इस मामले में उनका नाम घसीटकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है. अहमद पटेल ने पत्र में लिखा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इस मामले पर संज्ञान लें और भारत का गृह मंत्री होने के नाते संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तरीके से इस जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने का निर्देश दें.

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उन्होंने लिखा, ‘जो भी दोषी हो, उसे उसके धर्म या उसकी किसी संबद्धता पर ध्यान दिए बिना सजा देनी चाहिए. इस मामले में आपकी सरकार को मेरा पूर्ण समर्थन है.’ पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों को ‘राजनीति का बंधक’ नहीं बना सकते और मामूली चुनावी फायदे के लिए राजनीतिक विरोधियों की छवि धूमिल नहीं करनी चाहिए.

पत्र में लिखा गया है, ‘यह आतंकवाद के खिलाफ चल रही हमारी लड़ाई के साथ बड़ा अन्याय होगा. इसलिए मुझे यह काफी चिंताजनक लगता है कि गुजरात में सत्तारूढ़ पार्टी चुनावों के मद्देनजर बेबुनियादी और अप्रमाणित आरोप लगाकर एक गंभीर जांच को नुकसान पहुंचा रही है.’ पटेल ने कहा कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो सभी को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठना चाहिए.

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कांग्रेस नेता ने कहा, ‘कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका को आतंकवाद के आरोप तय करने चाहिए, ना कि पार्टी मुख्यालय से संवाददाता सम्मेलन में नेताओं को.’ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने शुक्रवार को पटेल के इस्तीफे की मांग की थी और उनसे कासिम की भर्ती करने के पीछे मौजूद रही परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए कहा था.

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अब तक पता नहीं चला नोटबंदी से अमीर प्रभावित हुए या नहीं: योजना आयोग के एक पूर्व सदस्य

भंग हो चुके योजना आयोग के पूर्व सदस्य अरूण मायरा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी के कदम से गरीब प्रभावित हुए, लेकिन उन्होंने उनको माफ कर दिया, क्योंकि उनका मानना था कि वह उनके साथ हैं और यह कदम धनी लोगों के खिलाफ था. 

अब तक पता नहीं चला नोटबंदी से अमीर प्रभावित हुए या नहीं: योजना आयोग के एक पूर्व सदस्य

प्रतीकात्मक तस्वीर

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राहुल गांधी ने ट्वीट किया कुत्ते को बिस्किट खिलाने वाला वीडियो, पुराने सहयोगी ने लपेटे में लिया

नई दिल्ली: कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी कुत्ते को बिस्किट खिलाने वाला वीडियो ट्विटर पर ट्वीट कर अपने एक पुराने सहयोगी के निशाने पर आ गए हैं. पिछले साल असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छेाड़ बीजेपी में गए हेमंत बिस्व शर्मा (Himanta Biswa SarmaVerified account) ने राहुल गांधी के कुत्ते वाला वाले वीडियो को रिट्वीट करते हुए उसपर रिप्लाई किया है, ‘राहुल सर, मुझसे बेहतर कौन समझ सकता है. मुझे अच्छे से याद है जब मैं आपसे असम के मुद्दों पर बात कर रहा था तो आप बिस्किट खिलाने में मशगूल थे.’ हेमंत बिस्व शर्मा लंबे समय तक कांग्रेसी रहे, लेकिन फिलहाल वह बीजेपी के नेता के साथ मौजूद सर्वानंद सोनोवाल सरकार में मंत्री भी हैं. कांग्रेस छोड़ने के दौरान भी हेमंत ने राहुल गांधी पर यही आरोप लगाया था.

राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक ट्विटर पेज @OfficeOfRG से एक वीडियो शेयर किया है. देखकर ऐसा लगता है कि इसे शायद राहुल गांधी ने खुद शूट किया है. वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी अपने पालतू कुत्ते को दो पैरों के बल पर खड़े होकर नमस्ते करने के लिए कहते हैं. कुत्ता आदेश का पालन करते हुए ठीक वैसे ही करता है. इसके बाद राहुल कुत्ते की नाक के पास एक बिस्किट रखते हैं. उसके बाद चुटकी बजाते हैं. कुत्ता झट से बिस्किुट को खा जाता है.

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इस वीडियो के जरिए राहुल गांधी ने संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपना ट्विटर अकाउंट खुद हैंडल करते हैं, वहीं विरोधी ऐसा नहीं करते हैं.

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मालूम हो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सोशल नेटवर्किंग प्लेफॉर्म ट्विटर पर आए हैं. पिछले एक महीन में राहुल गांधी के ट्वीट अचानक से काफी संख्या में रिट्वीट होने लगे हैं. मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के गुजरात के कुछ नेता आरोप लगा चुके हैं कि राहुल गांधी के ट्वीट को विदेशी अकाउंट से रिट्वीट किया जा रहा है.

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देश में 5 लाख वक्फ संपत्तियां, 3.3 लाख संपत्तियों के रिकॉर्ड का हुआ डिजिटलीकरण

नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का काम पिछले सात वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब तक 3.3 लाख से अधिक संपत्तियों का ही ऑनलाइन ब्यौरा जमा करने में सफलता मिल पाई है, जबकि देश में करीब पांच लाख वक्फ संपत्तियां हैं केंद्रीय वक्फ परिषद का कहना है कि वक्फ बोर्डों के पास मानव संसाधन की कमी के कारण विलंब हुआ है, लेकिन जिन वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड उपलब्ध है, उनके डिजिटलीकरण का काम लगभग पूरा हो गया है और आने वाले समय में सर्वेक्षणों के बाद दूसरी संपत्तियों के रिकॉर्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए जाएंगे.

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अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड एक स्थान पर ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए भारतीय वक्फ प्रबंधन सिस्टम (वामसी) की शुरुआत की. वामसी की वेबसाइट पर अक्तूबर, 2011 से तकरीबन हर महीने वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के काम को अपडेट किया जाता रहा है. वामसी की वेबसाइट पर उपलब्ध सितंबर, 2017 के आंकड़ों के अनुसार देश के 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की 3,32,976 संपत्तियों के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और करीब 94 फीसदी संपत्तियों का डिजिटलीकरण हो गया है.

केंद्रीय वक्फ परिषद के सचिव बी एम जमाल ने भाषा से कहा, वक्फ बोर्डों के पास पर्याप्त मानव संसाधन की कमी है. इससे विलंब हो गया. वैसे काम लगातार जारी है. उन्होंने कहा, पहले दौर के सर्वेक्षण के आधार पर जिन संपत्तियों का रिकॉर्ड उपलब्ध है, उनके डिजिटलीकरण का काम तकरीबन पूरा हो गया है. हम दूसरे और तीसरे दौर के सर्वेक्षण की तैयारी कर रहे हैं. वैसे, वक्फ संपत्तियों का पता लगाना और उनके रिकॉर्ड को ऑनलाइन करना, निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है.

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जमाल ने कहा, एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब पांच लाख वक्फ संपत्तियां हैं.  इनके रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और इन संपत्तियों के विकास के लिए हम प्रतिबद्ध हैं. गौरतलब है कि वक्फ पर संयुक्त संसदीय समिति ने संसद को अपनी एक रिपोर्ट 23-10-2008 को सौंपी थीं जिसमें अन्य सिफारिशों के अलावा 25 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से राज्य वक्फ बोर्डों के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की सिफारिश की गई थी.

डिजिटलीकरण से संबंधित सिफारिशों को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया. साल 2009-10 में तत्कालीन सरकार की ओर से इस काम के लिए 10 करोड़ रुपये की एक शुरुआती टोकन रकम प्रदान की गई. 

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