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हमारे नेताओं, लोगों को अरुणाचल की यात्रा का अधिकार है : भारत का चीन को जवाब

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर चीन के ऐतराज जताए जाने पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया जाहिर की. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क
ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Feb 17, 2018, 12:22 AM IST

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त्रिपुरा में थमा चुनाव प्रचार, मतदान के लिए काउट डाउन शुरू

अगरतला : त्रिपुरा में पूरे जोर शोर से चल रहा चुनाव प्रचार शुक्रवार को खत्म हो गया. त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के लिए 18 फरवरी को वोट डाले जाएंगे. राज्य में अब तक असफलता का स्वाद चखने वाली भाजपा ने वाम दल के इस गढ़ में उसके 25 साल के शासन को खत्म करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह जैसे भाजपा के दिग्गजों ने प्रचार किया. हालांकि, राज्य में अब तक वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला देखा गया है. लेकिन इस बार कांग्रेस का चुनाव प्रचार उतना आक्रामक नहीं रहा. पार्टी प्रमुख राहुल गांधी ने प्रचार के अंतिम दिन चुनावी रैलियों को संबोधित किया. 

कड़ा मुकाबला
राज्य के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने भी कहा कि 18 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला माकपा और भाजपा के बीच होने जा रहा है. त्रिपुरा में जहां लेफ्ट की सरकार है, वहीं, मेघालय में कांग्रेस सत्‍ता में है, जबकि नागा पीपुल्स फ्रंट-लीड डेमोक्रेटिक गठबंधन नागालैंड में सत्‍तासीन है. डेमोक्रेटिक गठबंधन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा समर्थित है.

18 फरवरी को मतदान, 3 मार्च को मतगणना
त्रिपुरा की आबादी 37 लाख है, जिनमें मतदाताओं की संख्या करीब 25 लाख है. 2013 विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ माकपा को 48.11 फीसदी वोट मिले थे. माकपा ने 60 में से 49 सीटों पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस को 36.53 फीसदी वोट मिले थे और उसने 10 सीटों पर कब्जा किया था. 1 सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जीत हुई थी.

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इस चुनाव में 60 सीटों पर कुल 297 प्रत्याशी मैदान में हैं. बीजेपी ने 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, कांग्रेस ने 59 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जबकि वामदल ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. मतदान 18 फरवरी को होगा जबकि मतगणना 3 मार्च को होगी.

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बीजेपी ने लगाई पूरी ताकत
पूर्वोत्तर राज्यों में पैर पसारने के लिए बीजेपी ने इस विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. त्रिपुरा की राजनीति पर पैनी निगाह रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इस चुनाव के नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं. पिछले दो दशकों से प्रदेश की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री माणिक सरकार को भी इस चुनाव में बीजेपी से कड़ी चुनौती मिल रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संघ और बीजेपी के कार्यकर्ता पिछले कुछ समय से जमीनी स्तर पर प्रचार में जुटे हुए हैं. घर-घर जाकर मतदाताओं से मुलाकात की जा रही है, उनसे बात की जा रही है. बीजेपी को इस रणनीति का फायदा मिलेगा और माकपा को नुकसान पहुंच सकता है.

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7 महीने पहले भारत में दाखिल हुए थे सुंजवान आर्मी कैंप पर हमला करने वाले आतंकी : सैन्य सूत्र

नई दिल्ली : थलसेना सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि जम्मू की सुंजवान आर्मी कैंप में हमले को अंजाम देने वाले जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के तीनों आतंकवादी पिछले साल जून में घुसपैठ कर भारत की सीमा में दाखिल हुए थे. थलसेना की शुरुआती जांच के मुताबिक, तीनों आतंकवादी पिछले सात महीने से जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में छुप-छुपकर रह रहे थे और हमले को अंजाम देने की ताक में थे.

पिछले साल जून में भारत आए थे आतंकी
सूत्रों ने बताया कि हमले को अंजाम देने वाले जेईएम के आतंकवादी पिछले साल जून में उस वक्त पाकिस्तान से भारत आए थे जब घुसपैठ के मामलों में बढ़ोतरी हो गई थी. उन्होंने बताया कि सुंजवान हमले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट का परीक्षण थलसेना के शीर्षस्थ अधिकारी करेंगे.

बारामूला: आतंकवादियों को घेरने पर भीड़ ने किया सुरक्षाबलों पर पथराव, फरार होने में कामयाब हुए आतंकी

सूत्रों ने बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं जिससे ऐसे हमले दोबारा नहीं हों. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास थलसेना के स्थानीय कमांडरों को पूरी आजादी दी गई है ताकि वे पाकिस्तानी सेना की किसी हिंसक गतिविधि का प्रभावी तरीके से जवाब दे सकें.

10 फरवरी को हुआ था सुंजवान आर्मी कैंप पर हमला
 बता दें सुंजवान सैन्य शिविर पर 10 फरवरी को हुए हमले में थलसेना के छह जवान शहीद हुए थे जबकि एक आम नागरिक को भी जान गंवानी पड़ी थी. हमले को अंजाम देने वाले जेईएम के तीनों आतंकवादी सेना के साथ हुई मुठभेड़ में मार गिराए गए थे.

LOC पर पाकिस्तानी हरकतों का जवाब देने के लिए कमांडरों को पूरी छूट
इससे पहले 15 फरवरी को  सेना में मौजूद सूत्रों ने बताया कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों की किसी भी हिंसक कार्रवाई के खिलाफ सेना के स्थानीय कमांडरों को जोरदार तरीके से जवाब देने की पूरी छूट दी गयी है. सूत्रों ने कहा कि देश की सेना पिछले कुछ सप्ताह से नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब देते हुए पाकिस्तानी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा रही है.

उन्होंने कहा कि स्थानीय कमांडरों को किसी भी पाकिस्तानी दुस्साहस का जवाब देने की पूरी छूट दी गयी हैं. सेना नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी का जवाब देने में एक सूझ बूझ भरी रणनीति के तहत काम कर रही है.

(इनपुट – भाषा)

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रेल मंत्रालय का निर्देश, 1 मार्च से ट्रेनों के डिब्बों पर नहीं लगेगा रिजर्वेशन चार्ट

रेल मंत्रालय ने जोनल रेवले को निर्देश दिया है कि वे 01 मार्च, 2018 से तत्‍कालीन ए 1, ए और बी श्रेणी के सभी स्‍टेशनों पर सभी ट्रेनों के आरक्षित डिब्‍बों पर आरक्षण चार्ट चिपकाना 6 महीने के लिए बंद कर दें. ट्रेन के प्‍लेटफॉर्मों पर फिजिकल/ डिजिटल चार्ट लगना जारी रहेगा. उन स्‍टेशनों पर जहां इलेक्‍ट्रॉनिक चार्ट दिखाने वाला प्‍लाज्‍मा लगाया गया है और वह उचित तरीके से काम कर रहा है, ऐसे प्‍लेटफॉर्मों पर फिजिकल आरक्षण चार्ट लगाना बंद किया जा सकता है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क
ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Feb 16, 2018, 07:17 PM IST

रेल मंत्रालय का निर्देश, 1 मार्च से ट्रेनों के डिब्बों पर नहीं लगेगा रिजर्वेशन चार्ट

(प्रतीकात्मक फोटो)

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क्‍या कर्नाटक चुनावों में कांग्रेस को मिलेगा लाभ? Cauvery verdict and its implication for karnataka elections 2018