बाबा वीरेन्द्र दीक्षित के आश्रम से मिलीं 114 नाबालिग लड़कियां, हिप्नोटाइज करने की बात आई सामने

नई दिल्ली: यौन शोषण का आरोपी वीरेंद्र देव दीक्षित की संस्था ईश्वरीय आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की जांच का दायरा दिल्ली और माउंट आबू से होते हुए आबूरोड तक पहुंच चुका है. जिसके चलते गुरुवार देर शाम को बाल संरक्षण आयोग की तीन सदस्य टीम सांतपुर स्थित आश्रम के केंद्र पर पहुंची. पुलिस दल के साथ पहुंची तीन सदस्यीय टीम ने दो घंटे से अधिक समय तक केंद्र का गहनता से निरीक्षण किया. टीम ने केंद्र में मौजूद बालिकाओं से बातचीत करने की कोशिश भी की. जांच के दौरान केंद्र में 60 बालिकाएं नाबालिग पाई गईं. कार्यवाही के दौरान क्षेत्र में माहौल गर्मा गया. लोगों ने आध्यात्मिक केंद्र का विरोध किया. इस बात को लेकर हंगामा हो गया. आक्रोशित लोगों ने निरीक्षण के बाद बाहर निकली आयोग की टीम से प्रभावी कार्यवाही की मांग भी की.

दो घंटे से ज्यादा चली तहकीकात
जानकारी के मुताबिक राज्य बाल सरंक्षण आयोग के सदस्य एस पी सिंह, उमा रत्नू और डॉ. साधना सिंह गुरुवार शाम को आबूरोड कोतवाली पहुंचे. इसके बाद पुलिस टीम के साथ सांतपुर स्थित आध्यात्मिक केंद्र पहुंचे. केंद्र के अंदर पहुंची टीम ने मौके पर मौजूद महिला व केंद्र के सदस्यों से पूछताछ की. बहुमंजिला केंद्र में मौजूद बालिकाओं से बातचीत करने का प्रयास भी किया. लेकिन, उन्हें सफलता नहीं मिली. दो घंटे से अधिक समय तक पुलिस व आयोग की टीम केंद्र की तहकीकात करती रही.

हिप्नोटाइज कर रखी गई हैं नाबालिग लड़कियां
आयोग की टीम के सदस्य एस पी सिंह ने बताया कि केंद्र में मौजूद बालिकाएं सम्मोहित हैं. वह स्प्रिच्युअल के अलावा और कुछ बोलने में असमर्थ हैं. नाबालिग बच्चियों को हिप्नोटाइज कर आश्रम में रखा गया है. लड़कियों के लिए यह आश्रम किसी नर्क से कम नहीं है. केंद्र में बालिकाओं के लिए कोई सुविधा नहीं है. यहां तक की धूप तक नहीं पहुंच पाती है. केंद्र में नेपाल की करीब पंद्रह बालिकाएं हैं. जबकि, राजस्थान की एक बालिका पाई गई है. केंद्र में मौजूद व्यक्तियों द्वारा बालिकाओं के बारे में कोई दस्तावेज नहीं दिखाए गए हैं.

सात दिन का काम तीन दिन में पूरा करेगी टीम
सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार करने का कार्य तेजी से किया जाएगा. सात दिन के कार्य को तीन में पूरा कर जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री व सीडब्ल्यूसी को भेजी जाएगी. वहीं टीम की सदस्य उमा रत्नू ने बताया कि बच्चियों ने संतुष्टि पूर्वक जवाब नहीं दिया है. बालिकाएं शिक्षा व संरक्षण से वंचित हैं. उन्होंने बताया कि माउंट आबू के केंद्र में 54 बालिकाएं पाई गई हैं.

एफआईआर भी होगी दर्ज
टीम की सदस्य साधना सिंह ने बताया कि कलक्टर, एसपी व सीडब्ल्यूसी को रिपोर्ट दी जाएगी और साथ ही प्राथमिकी दर्ज करवाई जाएगी. बालिकाओं का शारीरिक व मानसिक विकास अवरुद्ध है. इससे पूर्व टीम द्वारा माउंट आबू के आश्रम में भी जांच की गई थी जिसमें भी भारी खामियां पाई गई थीं.

जेल की जिंदगी जी रही हैं लड़कियां
बाल आयोग के सदस्यों का कहना था कि नाबालिग लड़कियां जिनके पढ़ने और खेलने की उम्र है वे जेल की जिंदगी जी रही हैं. उन्होंने बताया कि लडकियों के बातचीत करने पर जब उनसे पूछा गया कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहती हैं तो उनके मुंह से एक ही शब्द निकलता रहा आध्यत्मिकता. वहीं जांच में संस्था का किसी प्रकार का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होना पाया गया है. टीम के सदस्यों ने बताया कि जांच रिर्पोट देने के बाद आयोग द्वारा इस आध्यत्मिक संस्था पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी.

किला बंदी की तरह है आश्रम
नयाखेड़ा में स्थित संस्था का केंद्र किला बंदी की तरह है. केंद्र का बड़ा प्रवेश द्वार अधिकतर बंद ही रहता है. बहुमंजिला इमारत की खिड़कियां अधिकांश समय बंद रहती हैं. बालकनी को कवर्ड कर दिया गया है. क्षेत्र के लोगों के मुताबिक संस्था में सुबह छह बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है. अंदर से महिलाओं की आवाज आती रहती है. पूर्व में भी दिल्ली पुलिस एक नाबालिग बालिका की तलाश करते हुए इस केंद्र को खंगाल चुकी है.

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