सैलरी पर पड़ेगी GST की मार, आपके वेतन पर चल सकती है कैची

नई दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की मार अब वेतनभोगियों पर भी पड़ सकती है. कंपनियों ने जीएसटी की मार से बचने के लिए कर्मचारियों के वेतन पैकेज में बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि कंपनियों पर जीएसटी का असर ना पड़े. विशेषज्ञों के मुताबिक, वेतन में मिलने वाले किराए, मेडिकल बीमा, ट्रांसपोर्टेशन और फोन किराए के तहत मिलने वाला लाभ अब जीएसटी के दायरे में आ जाएगा. 

सैलरी पैकेज की समीक्षा करने की सलाह
टैक्स विशेषज्ञों ने कंपनियों को सलाह दी है कि कंपनियों का एचआर डिपार्टमेंट सैलरी की इन मदों की फिर से समीक्षा करे. अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) के हालिया निर्णयों के बाद कंपनियां इस मामले को लेकर सजग हो गई हैं.

बता दें कि एएआर ने हाल ही में फैसला दिया था कि कंपनियों द्वारा कैंटीन चार्जेस के नाम पर कर्मचारी के वेतन से कटौती जीएसटी के दायरे में होगी. इस फैसले के बाद जानकारों का मानना है कि कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की दी जा रही कई सुविधाएं जिसके ऐवज में सैलरी में कटौती की जाती है को जीएसटी के दायरे में कर दिया जाएगा.

12 फीसदी तक बढ़ सकता है कर्मचारियों वेतन
नियुक्तियों की रफ्तार बढ़ने से कंपनियों के ऊपर अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बरकरार रखने का दबाव है और इस कारण कर्मियों के वेतन में इस साल 9-12 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों ने कहा कि बेहतर कर्मचारियों के वेतन में 15 प्रतिशत तक की वृद्धि का अनुमान है. 

विशेषज्ञों ने कहा कि कंपनियां औसत और बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों में फर्क करने पर जोर दे रही हैं. वे इसके लिए वेतन वृद्धि आदि जैसे उपाय अपना रही हैं. उपभेाक्ता आधारित क्षेत्र जैसे एफएमसीजी/सीडी, खुदरा, मीडिया एवं विज्ञापन आदि इस साल सकारात्मक वेतन वृद्धि देने वाली हैं. 

ग्लोबल हंट के प्रबंध निदेशक सुनील गोयल ने कहा, ‘इस साल वेतनवृद्धि की दर 9-12 प्रतिशत रहेगी. यह पिछले साल की तुलना में कुछ अधिक है. वरिष्ठ पदों की तुलना में बीच के पदों पर वृद्धि की दर अधिक रहेगी.’ एंटल इंटरनेशनल इंडिया के एमडी जोसेफ देवासिया ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तथा रोजगार बाजार में अब तेजी आई है और 2018-19 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में काफी सकारात्मकता का अनुमान है. उन्होंने कहा, ‘विभिन्न क्षेत्रों में नियुक्तियां तेज होने से कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बनाये रखना चाहती हैं.’ 

वेतन देने में बेंगलुरु अव्वल
विशेषज्ञों के अनुसार वेतन वृद्धि के मामले में बेंगलुरु और दिल्ली देश के अन्य शहरों जैसे मुंबई, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता आदि की तुलना में बेहतर रहेंगे. सबसे अधिक वेतन देने के मामले में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु सबसे आगे है. यहां पेशेवरों का औसत वेतन पैकेज 10.8 लाख रुपये सालाना है. एक रिपोर्ट में सामने आया है कि दवा और स्वास्थ्य सेवा कंपनियां अन्य कंपनियों के मुकाबले ज्यादा वेतन दे रही हैं. रैंडस्टैड इनसाइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु में पेशेवरों का वार्षिक वेतन औसतन 10.8 लाख रुपये है. पुणे दूसरे स्थान पर है, यहां औसत वेतन 10.3 लाख रुपये है. 

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