Game of Gujarat: 4-5 फीसद वोटों पर टिका ‘गणित’, जाति का ‘तड़का’ लगा रहे दल

गुजरात में होने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस जातिगत नेताओं के सहारे उन नौ प्रतिशत मतों के अंतर को पाटने की कोशिश में लगी है जिनसे भाजपा पिछले चुनाव में विजयी रही थी. वहीं दूसरी ओर दो दशक से गुजरात की सत्ता पर काबिज भगवा पार्टी को न केवल विश्वास है कि वह 2012 के अपने पुराने आधार को बरकरार रखने रखने में सफल होगी, बल्कि वह अपना वोट आधार भी बढ़ा रही है. 

1. जातिगत आंदोलन के उभर कर सामने आने के बाद इस बार चुनावों के मूल में इस बार जाति व्यवस्था के बने रहने की संभावना है. इसीलिए बीजेपी और कांग्रेस सहित बड़े दलों ने इसी समीकरण को ध्यान में रख कर टिकटों का बंटवारा किया है. पाटीदार और अन्य पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को दोनों दलों ने अधिकतर सीटों पर मैदान में उतारा है. 

2. सत्‍तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस बार 50 पाटीदार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस के 41 उम्मीदवार इस समुदाय से हैं. भाजपा ने अन्य पिछड़े वर्ग के 58 उम्मीदवारों को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस के इस वर्ग से 62 प्रत्याशी मैदान में हैं .

3. कांग्रेस को उम्मीद है कि राहुल की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ उनके पक्ष में मतदान करेगी. साथ ही नए स्थानीय सहयोगियों से पार्टी को अतिरिक्त सहायता मिलेगी. ये सहयोगी हैं-पाटीदार कोटा आंदोलन के हार्दिक पटेल, ओबीसी नेता अल्पेश ठाकुर और दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवानी.

4. अल्‍पेश ठाकुर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, वहीं पटेल ने मुख्य विपक्षी पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की है. चुनाव आयोग के 2012 के गुजरात चुनाव के आंकड़ों के अनुसार उस वक्त बीजेपी को 47.85 प्रतिशत मत मिले थे, वहीं कांग्रेस को 38.93 प्रतिशत मत मिले थे. दोनों पार्टियों के बीच 8.92 प्रतिशत मतों का अंतर था.

5. गुजरात में मुख्य विपक्षी दल ने चुनावों के लिए 14 दलितों को टिकट दिया है तो बीजेपी ने 13 ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं. राजनीतिक पंडितों की मानें तो जिस पार्टी को ”अतिरिक्त चार से पांच फीसदी मत मिलेगा” वही दल राज्य में इस राजनीतिक लड़ाई को जीतेगा.

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6. भाजपा इस चुनाव में हारना नहीं चाहती है, जबकि कांग्रेस उन जातियों को अपनी आकर्षित करने का भरसक प्रयास कर रही है जो ”नाराज” हैं और वोट शेयर के अंतर को कम कर सकते हैं.

7. राजनीतिक विश्लेषक अच्युत याग्निक के अनुसार केवल चार से पांच फीसदी वोट की अदला-बदली कांग्रेस के लिये गेमचेंजर साबित होगी. याग्निक कहते हैं, ”अगर आप 2002, 2007 तथा 2012 के चुनावों में वोट की हिस्सेदारी पर नजर डालें तो हर बार कांग्रेस को तकरीबन 40 फीसदी जबकि भाजपा को 49 प्रतिशत वोट मिले हैं. इस बार अगर चार से पांच फीसदी वोटों की स्वैपिंग होती है तो इससे कांग्रेस को बड़ा फायदा होगा.” 

8. उन्होंने कहा, ”गुजरात की राजनीति के मूल में जातिगत व्यवस्था अभी भी बरकरार है और इसी के आधार पर टिकटों का बंटवारा भी किया गया है.” 

9. मतदाता सूची के अनुसार गुजरात में 4.35 करोड़ मतदाता हैं. गुजरात कांग्रेस प्रदेश कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष कुवंरजीभाई बवालिया के अनुसार इस बार पार्टी भाजपा को कांटे की टक्कर दे रही है. उन्होंने कहा, ”हमारा अपना प्रचार, हार्दिक पटेल की पाटीदार समुदाय में स्वीकार्यता और ओबीसी तथा दलितों में अल्पेश और जिग्नेश का प्रभाव, ये सब कड़ी चुनौती पेश करेंगे. लेकिन भाजपा, कांग्रेस के दावे को मानने के लिए राजी नहीं है.

10. गुजरात भाजपा के प्रवक्ता हरशद पटेल ने कहा, ”2012 के चुनाव के बाद 2014 में आम चुनाव हुए जिसमें अनेक विधानसभाओं में भाजपा को बड़ी विजय मिली थी.” गुजरात में दो चरण में नौ और 14 दिसंबर को मतदान होना है. मतगणना 18 दिसंबर को होगी.

(इनपुट: भाषा से भी)

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