ZEE जानकारी : क्या पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत के पीछे कोई साज़िश थी ?

भारत के इतिहास में आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है . आज 11 जनवरी है . आज से 52 वर्ष पहले… 1966 में हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की सोवियत संघ के ताशकंद में मृत्यु हो गई थी. ये मौत कोई साधारण मौत नहीं थी.. ये ऐसी मौत थी… जिसका रहस्य.. आज भी अनसुलझा है. आज शास्त्री जी की यादों के साथ कुछ सवाल भी लोगों के मन में खटक रहे हैं. 

क्या शास्त्री जी की मृत्यु के पीछे कोई साज़िश थी ? क्या शास्त्री जी की मौत ज़हर की वजह से हुई? आखिर उनकी मृत्यु के बाद उनके शव का Postmortem क्यों नहीं करवाया गया ? और क्या भारत के परमाणु कार्यक्रम का शास्त्री जी की मृत्यु से कोई संबंध है ? शास्त्री जी का परिवार भी कई बार उनकी मृत्यु को लेकर शक जता चुका है . इसलिए किसी भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता . 

आज हमने इन प्रश्नों के आधार पर गहरा Research किया है… Research के दौरान हमें CIA के एक पूर्व अधिकारी और एक विदेशी पत्रकार के बीच हुई बातचीत की Transcript मिली है . इस Transcript को पढ़ने से ये पता चलता है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु की वजह.. एक ही थी… और वो थी भारत का परमाणु कार्यक्रम . एक Website… TBRNEWS.ORG ने इस बातचीत को Publish किया था . हम इस Website के दावों की पुष्टि तो नहीं कर सकते. लेकिन हमें लगता है कि इस तरह के दावों की भी गहराई से जांच होनी चाहिए . 

ऐसा कहा जाता है कि वर्ष 1962 में चीन से युद्ध हारने के बाद भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम की रफ़्तार तेज़ कर दी थी. जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने और वो भारत को एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे . भारत के परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा भी इस अभियान में भारत सरकार के साथ थे . ये वो दौर था जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध चल रहा था . तब भारत और सोवियत संघ के बीच बहुत गहरे संबंध थे और ये बात अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA को पसंद नहीं थी . 

5 जुलाई 1996 को एक पत्रकार Gregory Douglas ने CIA के Secret Mission के Deputy Director…. Robert T. Crowley से CIA के कामकाज के बारे में कुछ सवाल पूछे थे . इन सवालों के जवाब में CIA के पूर्व अधिकारी Robert  Crowley ने लाल बहादुर शास्त्री और होमी जहांगीर भाभा का नाम लिया था . Douglas ने इस पूरी बातचीत के Notes लिए थे. और बाद में इस पूरी बातचीत की Transcript एक Website ने छापी थी . 

वो Transcript इस वक़्त मेरे हाथ में है . CIA के पूर्व अधिकारी Robert Crowley ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि ‘हम लोग परेशान थे.. क्योंकि वर्ष 1960 के आस-पास भारत ने परमाणु बम बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया था, भारत के विशेषज्ञ… परमाणु बम बनाने की योग्यता रखते थे और ये बात हम जानते थे . हमने कई बार उन्हें चेतावनी दी लेकिन हमारी बात उन्होंने नहीं मानी . उनका नाम होमी जहांगीर भाभा था . वो बहुत खतरनाक थे . वो हमारे लिए और मुश्किल खड़ी करने के लिए Vienna जा रहे थे . लेकिन उनकी फ्लाइट के Cargo में बम था जो फट गया ‘ 

इसके बाद Gregory Douglas ने ये सवाल पूछा कि आपने उनको एक ऐसे प्लेन में क्यों मारा जिसमें लोग भी थे ? आप एक ज़हरीली मिठाई का डिब्बा भी भेज सकते थे ? किसी सड़क पर उन्हें गोली मार सकते थे ? उनकी कार को धमाके से उड़ा सकते थे . इस सवाल के जवाब में CIA के इस पूर्व अधिकारी ने कहा कि उस समय यही सबसे अच्छा विकल्प था . और हमने शास्त्री को भी अपने रास्ते से हटा दिया . 

हम इस Website के दावों की पुष्टि नहीं करते. लेकिन हमें लगता है कि इस तरह के दावों की जांच होनी चाहिए और शास्त्री जी की मृत्यु का सच सामने आना चाहिए . Research के दौरान हमें कुछ और तथ्य भी मिले हैं… वर्ष 2009 में एक RTI दायर करके लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु से जुड़े सवाल पूछे गए थे. इस RTI के जवाब में कहा गया कि RTI Act के Section 8 (1) (a) की वजह से शास्त्री जी की मृत्यु से जुड़े कुछ सवालों के जवाब नहीं दिए जा सकते . 

इसके बाद हमने ये Research किया कि RTI Act के Section 8(1) (a) के तहत किन विषयों पर सूचना नहीं दी जा सकती है . तो हमें पता चला कि 
Section 8(1) (a) के तहत वो सूचनाएं आती हैं जिससे भारत की संप्रभुता, एकता, सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों पर असर पड़ता है . या भारत के दूसरे देशों के साथ संबंधों पर असर पड़ता है . 

कहा जाता है कि मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री का शव नीला पड़ गया था . इसीलिए ये सवाल भी उठता है कि कि क्या शास्त्री जी की मृत्यु ज़हर से हुई ? अगर उस वक्त लाल बहादुर शास्त्री के शव का Postmortem  करवाया गया होता तो शायद इस सवाल का जवाब मिल सकता था . लेकिन ऐसा नहीं किया गया जो बहुत हैरानी की बात है.

किसी देश के कार्यकारी प्रधानमंत्री की किसी दूसरे देश में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो जाना बहुत बड़ी बात होती है.. आप इसे कूटनीति की दुनिया की सूनामी भी कह सकते हैं…. आप सोचिए कि ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मौत उस दौर की कितनी बड़ी ख़बर रही होगी… लेकिन उस वक़्त मीडिया की ताकत आज जैसी नहीं थी.. उस वक़्त न तो 24 घंटे के न्यूज़ चैनल हुआ करते थे और न ही सोशल मीडिया का जन्म हुआ था.. इसलिए ये मामला और ये ख़बर दब गई… और हम कभी भी शास्त्री जी की मौत की सही वजह को नहीं जान पाए..

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