AAP की नजरें 8 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर, पूर्वोत्तर से होगी जोर आजमाइश

आप की पूर्वोत्तर इकाई के संयोजक हाबंग पायेंग ने बताया कि पार्टी नगालैंड और मेघालय में सभी सीटों पर और त्रिपुरा की चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.

ज़ी न्यूज़ डेस्क
ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Jan 14, 2018, 12:01 AM IST

AAP की नजरें 8 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर, पूर्वोत्तर से होगी जोर आजमाइश

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. (फाइल फोटो)

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LoC के नजदीक पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी, भारतीय सेना का जवान शहीद

यह घटना पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा बीएसएफ के एक हेड कांस्टेबल की सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हत्या किये जाने के कुछ ही दिनों बाद हुई है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क
ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Jan 14, 2018, 12:19 AM IST

LoC के नजदीक पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी, भारतीय सेना का जवान शहीद

नियंत्रण रेखा के नजदीक चौकसी करते भारतीय सेना के जवान. (फाइल फोटो)

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जनरल बिपिन रावत के बयान पर बौखलाया पाकिस्तान, परमाणु हमले की दी धमकी

नई दिल्ली: भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने शनिवार को पलटवार करते हुए परमाणु हमले की धमकी दी है. विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने ट्वीट कर कहा, ‘भारतीय सेना प्रमुख का बयान बेहद गैर जिम्मेदाराना है, ये परमाणु हमले को निमंत्रण देने वाली बात है. अगर वे (भारत) ऐसा चाहते हैं तो हम भी इसके लिए तैयार हैं. इंशाअल्लाह… जल्द ही सेना प्रमुख की गलतफहमी दूर हो जाएगी.’

भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल ने भी ट्वीट कर कहा है, ‘हम इस मामले को हल्के में नहीं लेंगे. वे पाकिस्तान को लेकर गलत आंकलन न करें. भारतीय सेना की ओर से धमकी और गैर जिम्मेदाराना बयान ये साबित करता है कि वे डरे हुए हैं. पाकिस्तान अपनी रक्षा करने में सक्षम है.’

इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर ने जनरल रावत के बयान पर जियो टीवी से बातचीत में कहा, ‘इस तरह का बयान उनके कद के लोगों के लिए शोभनीय नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि चार स्टार पा चुके अनुभवी सेना प्रमुख को बयान देने में परिपक्वता दिखानी चाहिए.’

Khawaja Muhammad Asif

क्या कहा था बिपिन रावत ने?
भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने 12 जनवरी को कहा था कि अगर सरकार कहे तो सेना पाकिस्तान के परमाणु झांसों को धता बताने और किसी भी अभियान के लिए सीमापार करने को तैयार है. 

जनरल रावत ने कहा कि हम पाकिस्तान की परमाणु हथियारों की बातों को चुनौती देंगे. उन्होंने कहा, ‘अगर हमें वाकई पाकिस्तानियों का सामना करना पड़ा और हमें ऐसा काम दिया गया तो हम यह नहीं कहेंगे कि हम सीमा पार नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास परमाणु हथियार हैं. हमें उनकी परमाणु हथियारों की बातों को धता बताना होगा.’ 

ये भी पढ़ें:  जनरल बिपिन रावत ने पूछा, J&K और भारत के अलग-अलग नक्शे दिखाने से बच्चों को क्या तालीम मिल रही है?

सेना प्रमुख ने कहा, ‘हम प्रस्ताव के विभिन्न आयामों का अध्ययन रहे हैं.’ उनसे यहां एक संवाददाता सम्मेलन में सीमा पर हालात बिगड़ने की स्थिति में पाकिस्तान द्वारा उसके परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना पर सवाल पूछा गया था.

‘पाकिस्तान को दे रहे करारा जवाब’
सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि सैन्य बल पाकिस्तान के संघर्षविराम उल्लंघनों का करारा जवाब दे रहे हैं और लक्ष्य पाकिस्तान को आतंकी समूहों के समर्थन के दुष्परिणाम महसूस कराना है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादी ‘इस्तेमाल कर फेंकने लायक सामान’ हैं और भारतीय सेना गोलीबारी की आड़ में आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने वाली पाकिस्तानी सेना की चौकियों को दंडित करने पर ध्यान दे रही है.

डोकलाम में सैनिकों की कमी पर चीन की चुप्पी, जनरल बिपिन रावत ने दिया था बयान
भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत

‘पाकिस्तानी चौकियों को तबाह करते रहेंगे’
जनरल रावत ने कहा, ‘हमारा रुख पाकिस्तानी सेना को दुष्परिणाम महसूस कराना है.’ उन्होंने कहा, ‘जब तक पाकिस्तान दुष्परिणाम महसूस नहीं करता, वह आतंकियों को भेजता रहेगा जो उनके लिए उपयोग कर फेंकने लायक सामान हैं. हम आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने वाली पाकिस्तानी चौकियों को तबाह करते रहेंगे. जवाबी गोलीबारी में पाकिस्तान को तीन-चार गुना ज्यादा नुकसान हुआ है.’ 

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‘पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को देंगे चुनौती’
सेना प्रमुख ने कहा कि सेना पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के झांसे को चुनौती देगी. उन्होंने कहा, ‘हम इसे चुनौती देंगे. अगर हमें सच में पाकिस्तानियों से टकराना हो और हमें देश कोई काम दे तो हम यह नहीं कहेंगे कि उनके पास परमाणु हथियार होने के कारण हम सीमा पार नहीं कर सकते. हमें उनके परमाणु हथियारों के झांसे को चुनौती देनी होगी.’

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Justice Kurian Joseph Says, No need for outside intervention

कोच्चि: मामलों के ‘‘चुनिंदा’’ तरीके से आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों के विरुद्ध देश के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ एक तरह से बगावत का कदम उठाने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में एक न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने शनिवार (13 जनवरी) को कहा कि समस्या के समाधान के लिए बाहरी हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है. उनके और तीन अन्य न्यायाधीशों के संवाददाता सम्मेलन के एक दिन बाद जोसेफ ने भरोसा जताया कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं उनका समाधान होगा. पत्रकारों के सवाल पर न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ‘‘एक मुद्दा उठाया गया है. संबंधित लोगों ने इसे सुना है. इस तरह के कदम भविष्य में नहीं दिखेंगे. इसलिए (मेरा) मानना है कि मुद्दा सुलझ गया है.’’

यह पूछे जाने पर कि क्या इस मामले के समाधान में बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत है तो उन्होंने कहा, ‘‘मामले को हल करने के लिए बाहरी हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह मामला संस्था के भीतर हुआ है. इसे हल करने के लिए संस्था की ओर से जरूरी कदम उठाए जाएंगे.’’ न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि मामले को राष्ट्रपति के संज्ञान में नहीं लाया गया है क्योंकि उच्चतम न्यायालय या इसके न्यायाधीशों को लेकर उनकी कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रधान न्यायाधीश की तरफ से कोई संवैधानिक खामी नहीं है, लेकिन उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए परंपरा, चलन और प्रक्रिया का अनुसरण किया जाना चाहिए.

उन्होंने यहां एक समारोह से इतर कहा, ‘‘हम सिर्फ मामले को उनके संज्ञान में लाए हैं.’’ न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि न्यापालिका और न्याय के हित में न्यायाधीशों ने धीरे-धीरे कदम उठाया. इससे पहले, स्थानीय चैनलों ने जब उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए यहां के निकट कलाडी में उनके पैतृक घर का रुख किया तो न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ‘‘न्याय और न्यायपालिका के पक्ष में खड़े हुए. यही चीज कल वहां (नयी दिल्ली में) हमने कही.’’ उन्होंने कहा, ‘‘एक मुद्दे की ओर ध्यान गया है. ध्यान में आने पर निश्चित तौर पर यह मुद्दा सुलझ जाएगा.’’ न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि ‘‘न्यायाधीशों ने न्यायपालिका में लोगों का भरोसा जीतने के लिए यह किया.’’ 

उल्लेखनीय है कि न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार (12 जनवरी) को एक संवाददाता सम्मेलन किया और कहा कि शीर्ष अदालत में हालात ‘सही नहीं हैं’ और कई ऐसी बातें हैं जो ‘अपेक्षा से कहीं कम’ थीं. प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘… कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई चीजें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं कम थीं.’

जज vs सीजेआई: विवादों पर बोले जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायपालिका में कोई संकट नहीं है

इससे पहले भारत के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ ‘चयनात्मक’ तरीके से’ मामलों के आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों को लेकर एक तरह से बगावत करने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शनिवार (13 जनवरी) को कहा कि ‘कोई संकट नहीं है.’ न्यायमूर्ति गोगोई एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आये थे. कार्यक्रम के इतर उनसे पूछा गया कि संकट सुलझाने के लिए आगे का क्या रास्ता है, इस पर उन्होंने कहा, ‘कोई संकट नहीं है.’ यह पूछे जाने पर कि उनका कृत्य क्या अनुशासन का उल्लंघन है, गोगोई ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ‘मुझे लखनऊ के लिए एक उड़ान पकड़नी है. मैं बात नहीं कर सकता.’ उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश राज्य विधिक सेवा प्राधिकारियों के पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आये थे.

(इनपुट एजेंसी से भी)

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There is no crisis, Says Justice Ranjan Gogoi

यह पूछे जाने पर कि उनका कृत्य क्या अनुशासन का उल्लंघन है, गोगोई ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ‘मुझे लखनऊ के लिए एक उड़ान पकड़नी है. मैं बात नहीं कर सकता.’

ज़ी न्यूज़ डेस्क
ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Jan 13, 2018, 06:46 PM IST

विवादों पर बोले जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायपालिका में कोई संकट नहीं है

नई दिल्ली में प3ेस कॉन्फ्रेंस के दौरान न्यायमूर्ति रंजन गोगोई. (IANS/12 Jan, 2018)

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CJI पर आरोप लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चारों जजों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए : उद्भव ठाकरे

मुंबई : शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर उठाए सवालों को लेकर शुरू हुई राजनीति खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. अब इस मामले में शिवसेना प्रमुख उद्भव ठाकरे ने कहा है कि चीफ जस्टिस पर उंगली उठाने वाले चारों जजों पर कार्रवाई की जा सकती है. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में जो कुछ भी हुआ वह वाकई परेशान करने वाला था. उद्भव ठाकरे ने कहा कि लेकिन कोई भी कार्रवाई करने से पहले हमें इस बात पर यह जरूर विचार कर लेने चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के जजों ने आखिर यह कदम क्यों उठाया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सभी चारों स्तंभ स्वतंत्र रूप से खड़े हैं. अगर ये स्तंभ एकदूसरे पर गिरेंगे, तो भारत का लोकतंत्र टूट जाएगा, तबाह हो जाएगा.

कुरियन जोसेफ ने कहा, ‘यह मुद्दा सुलझ जाएगा’
मुकदमे के ‘चुनिंदा’ तरीके से आवंटन और कुछ न्यायिक फैसले के विरूद्ध देश के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ एक तरह से बगावत का कदम उठाने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में एक न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने शनिवार को भरोसा जताया कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उनका समाधान होगा. उनके और तीन अन्य न्यायाधीशों के प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के एक दिन बाद जोसेफ ने कहा कि उन्होंने न्याय और न्यायपालिका के हित में काम किया.

स्थानीय न्यूज चैनलों ने शुक्रवार के घटनाक्रम पर उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए यहां के निकट कलाडी में उनके पैतृक घर का रुख किया तो न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ‘न्याय और न्यायपालिका के पक्ष में खड़े हुए. यही चीज कल (शुक्रवार को) वहां (नई दिल्ली में) हमने कहा’. उन्होंने कहा, ‘एक मुद्दे की ओर ध्यान गया है. ध्यान में आने पर निश्चित तौर पर यह मुद्दा सुलझ जाएगा’. न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि ‘न्यायाधीशों ने न्यायपालिका में लोगों का भरोसा जीतने के लिए यह किया’.

जजों ने लगाए CJI पर आरोप
बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के न्‍यायाधीश जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में मीडिया से बातचीत की थी. उन्‍होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है. हमने चीफ जस्टिस से इस बारे में मुलाकात भी की है. उन्‍होंने कहा कि चीफ जस्टिस से कई गड़बडि़यों की शिकायत की थी, जिन्‍हें ठीक किए जाने की जरूरत है. आज सुबह भी हम चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिले थे’. जजों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में मामलों का बंटवारा सहीं ढंग से नहीं होता है. सुप्रीम कोर्ट के जजों ने पहली बार मीडिया के सामने आते हुए यह बातें कहीं. न्‍यायाधीशों ने मीडिया से कहा, हम आज इसलिए आपके सामने आए हैं, ताकि कोई ये न कहे कि हमने अपनी आत्‍माएं बेच दीं.

पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट जज विवाद : CJI दीपक मिश्रा कल कर सकते हैं जजों से मुलाकात- सूत्र

अटॉर्नी जनरल ने दिए सुलह के संकेत
सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर सवाल उठाए जाने को लेकर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह मुद्दा शनिवार तक सुलझा लिया जाएगा. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज अपने मतभेद 13 जनवरी तक सुलझा सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस को टाला जा सकता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट सभी जज बहुत ही अनुभवी और कुशल हैं और मुझे उम्मीद है कि शनिवार तक इस विवाद का हल हो जाएगा. 

पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर लगाए ये 8 आरोप, पढ़ें…

प्रधानमंत्री ने की कानून मंत्री से बात
यह अपने आप में ऐतिहासिक घटना थी. क्योंकि इससे पहले कभी किसी जज ने मीडिया के सामने आकर बयानबाजी नहीं की थी. चार जजों के इस कदम से भारतीय राजनीति में भूचाल मच गया. मुख्‍य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के संवाददाता सम्मेलन की पृष्ठभूमि में अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल को बैठक के लिए बुलाया और उनसे चर्चा की. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से मामले की जानकारी ली. 

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दिल्ली हाईकोर्ट : मात्र 3 घंटे में सुना दिया पांच साल पुराने मामले का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने मुकदमों के फौरन निपटान का उदाहरण पेश करते हुए लंबे समय से लंबित हत्या के एक मामले में महज तीन घंटे में फैसला सुना दिया. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क
ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Jan 13, 2018, 12:24 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट : मात्र 3 घंटे में सुना दिया पांच साल पुराने मामले का फैसला

उत्तर प्रदेश निवासी मोसिन को निचली अदालत ने सितंबर, 2017 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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CJI दीपक मिश्रा आज करेंगे SC के जजों से मुलाकात, सुलझ सकता है विवाद, बार एसोसिएशन ने बुलाई बैठक

नई दिल्ली : शुक्रवार को भारतीय जुडिशरी के इतिहास में पहली बार मीडिया से मुखातिब होकर चर्चा में आए सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने देश की सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. जजों के इन आरोपों ने भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. इन जजों ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सही तरीके से काम नहीं कर रहा है. यही स्थिति रही तो यह भारत के लोकतंत्र के लिए भी खतरा होगा. जजों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में उन्हीं की बात नहीं सुनी जाती है.

इस घटना के बाद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कल मीडिया के सामने आने की बात कही जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. चर्चा है कि सीजेआई आज सुप्रीम कोर्ट के अन्य सभी जजों से मुलाकात कर सकते हैं. इस बारे में बार एसोसिएशन ने एक बैठक भी बुलाई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बैठक में यह विवाद सुलझ सकता है. 

अटॉर्नी जनरल ने दिए सुलह के संकेत
सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर सवाल उठाए जाने को लेकर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह मुद्दा शनिवार तक सुलझा लिया जाएगा. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज अपने मतभेद 13 जनवरी तक सुलझा सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस को टाला जा सकता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट सभी जज बहुत ही अनुभवी और कुशल हैं और मुझे उम्मीद है कि शनिवार तक इस विवाद का हल हो जाएगा. 

जजों ने लगाए मुख्य न्यायाधीश पर आरोप
बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के न्‍यायाधीश जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में मीडिया से बातचीत की थी. उन्‍होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है. हमने चीफ जस्टिस से इस बारे में मुलाकात भी की है. उन्‍होंने कहा कि चीफ जस्टिस से कई गड़बडि़यों की शिकायत की थी, जिन्‍हें ठीक किए जाने की जरूरत है. आज सुबह भी हम चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिले थे’. जजों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में मामलों का बंटवारा सहीं ढंग से नहीं होता है. सुप्रीम कोर्ट के जजों ने पहली बार मीडिया के सामने आते हुए यह बातें कहीं. न्‍यायाधीशों ने मीडिया से कहा, हम आज इसलिए आपके सामने आए हैं, ताकि कोई ये न कहे कि हमने अपनी आत्‍माएं बेच दीं.

पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस, चीफ जस्टिस पर लगाए आरोप 

प्रधानमंत्री ने की कानून मंत्री से बात
यह अपने आप में ऐतिहासिक घटना थी. क्योंकि इससे पहले कभी किसी जज ने मीडिया के सामने आकर बयानबाजी नहीं की थी. चार जजों के इस कदम से भारतीय राजनीति में भूचाल मच गया. मुख्‍य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के संवाददाता सम्मेलन की पृष्ठभूमि में अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल को बैठक के लिए बुलाया और उनसे चर्चा की. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से मामले की जानकारी ली. 

पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर लगाए ये 8 आरोप, पढ़ें…

समर्थन में उतरे बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी 
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की कार्यशैली पर सवाल उठाने को लेकर हुई 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बीजेपी नेता और वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. स्वामी ने सीजेआई पर आरोप लगाने वाले चारों जजों न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि इन चारों जजों का लीगल करियर साफ सुथरा रहा है और इन्होंने कभी भी पैसे को महत्व नहीं दिया. यह सभी चाहते तो वरिष्ठ वकील के रूप में प्रैक्टिस जारी रखते हुए पैसे बना सकते थे, लेकिन इन्होंने जज का पद स्वीकार किया. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा द्वारा मामलों के आवंटन समेत कई मामले उठाए हैं.

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Analysis, Media Trial Supreme Politics in Supreme Court, 4 Judges Press Conference

सर्वोच्च न्यायालय में आज सर्वोच्च स्तर की राजनीति हुई. सुप्रीम कोर्ट में आज वो हो गया जो भारत में आज से पहले कभी नहीं हुआ था.. न्यायाधीश आज खुद.. याचिकाकर्ता बन गये और न्याय की गुहार लगाने लगे और पूरा देश सुप्रीम कोर्ट के चार My Lords को इस रूप में देखकर हैरान रह गया. सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जज, आज मीडिया की अदालत में आ गये.. और सीधे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगे. भारत में सुप्रीम कोर्ट का एक बहुत बड़ा रुतबा है. सुप्रीम कोर्ट, देश के हर छोटे-बड़े मुद्दे में ज़रूरी हस्तक्षेप करता है और लोग भी सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा करते हैं. लेकिन आज जो कुछ हुआ है.. उसने सुप्रीम कोर्ट जैसे Institution की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. हमारे देश में बात बात पर Contempt of Court  यानी अदालत की अवमानना का ज़िक्र होता है.. लेकिन आज इसी शब्द की गंभीरता पर सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है. भारत में लोग बड़े विश्वास के साथ ये कहते हैं कि हम सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे.. आज इसी विश्वास को धक्का लगा है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. और इस लोकतंत्र के चार मुख्य स्तंभ हैं. कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया. लोकतंत्र के तीन स्तंभों पर बार बार सवाल उठते हैं. लेकिन एक स्तंभ विवादों से अब तक दूर रहा है और वो है – न्यायपालिका यानी Judiciary.. लेकिन आज हमारे देश की न्यायपालिका पर भी सवाल उठ गए हैं. और ये सवाल किसी और ने नहीं बल्कि खुद सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों ने उठाए हैं. आज सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर सवाल उठाने के लिए Media का सहारा लिया. देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के Sitting Judge प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी पीड़ा बता रहे थे. इन 4 जजों की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से पूरा देश हैरान हो गया. आप भी आज दोपहर से ये पूरी ख़बर देख रहे होंगे. लेकिन आपको ये पता नहीं चला होगा कि इन जजों की परेशानी क्या है और वो क्या कहना चाहते हैं? इसलिए आज हम साधारण भाषा में आपके लिए न्यायपालिका का ये पूरा विवाद Decode करेंगे. सबसे पहले आपको इन चार जजों के नाम बताते हैं. 

इनके नाम हैं  – जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ.

सुप्रीम कोर्ट के Chief Justice दीपक मिश्रा के बाद ये चारों जज सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं. आज दोपहर में इन चारों जजों ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में Chief Justice दीपक मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन चारों जजों ने आज से दो महीने पहले जस्टिस दीपक मिश्रा को लिखी गई एक चिट्ठी भी सार्वजनिक की. इस चिट्ठी में जजों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं. इन जजों ने लिखा है कि वो इस चिट्ठी को बहुत ही चिंता और पीड़ा के साथ लिख रहे हैं. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ ऐसे फैसले दिए गए, जिससे न्याय व्यवस्था प्रभावित हुई है. 

और इन फैसलों से High Courts की स्वतंत्रता भी खतरे में पड़ी है. इस चिट्ठी में लिखा गया है कि कौन से जज या बेंच को कौन सा केस दिया जाना है, ये भारत के मुख्य न्यायाधीश का विशेषाधिकार है. और केस के हिसाब से ही वो बेंच या जज तय करते हैं. लेकिन इस प्रक्रिया में पक्षपात हो रहा है. इन जजों ने लिखा है कि चीफ जस्टिस को ये विशेषाधिकार इसलिए दिया गया है ताकि सुप्रीम कोर्ट का काम अनुशासन में रहे और काम अच्छी तरह हो. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि चीफ जस्टिस की अपने साथी जजों के ऊपर कोई Legal या Superior Authority है. इन जजों ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही है. और वो ये है कि देश के न्यायशास्त्र में ये बात स्थापित है कि सभी जज बराबर हैं और मुख्य न्यायाधीश इनमें सबसे पहले हैं, वो ना तो किसी जज से ज्यादा हैं और ना ही कम. जजों की शिकायत है कि सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा व्यवस्था में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. 

उनका कहना है कि ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जब मुख्य न्यायाधीश ने देश को प्रभावित करने वाले मामलों को अपनी पसंद की बेंच को Refer कर दिया. 7 पन्नों की इस चिठ्ठी में जजों ने लिखा है कि वो सुप्रीम कोर्ट को शर्मनाक स्थिति से बचाने के लिए इन मामलों के बारे में नहीं बता रहे हैं. और ये भी कहा कि अगर वो आज अपनी ज़ुबान बंद रखेंगे.. तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा.. और इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा.

कुल मिलाकर आज ऐसा लग रहा था कि जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज ही याचिकाकर्ता बन गए हों और न्याय की गुहार लगा रहे हों. लेकिन सवाल ये है कि क्या इन जजों के पास यही आखिरी विकल्प था? क्या इस विवाद का हल निकालने का कोई दूसरा तरीका नहीं था? 
इन जजों का कहना है कि उन्होंने चीफ जस्टिस से मिलकर इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की और आज सुबह भी वो चीफ जस्टिस से मिले थे. लेकिन जब इसका हल नहीं निकला तो वो जनता की अदालत में आए हैं. यहां सवाल ये है कि अगर देशभर के High Courts और Lower Courts के जज भी ऐसे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सवाल उठाने लगे तो फिर क्या होगा.  

आज तक न्यायपालिका पर कभी भी सवाल नहीं उठे हैं. लेकिन आज की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बहुत से डिज़ाइनर वकीलों और नेताओं को खुश होने का मौका दे दिया है. जजों के इस टकराव पर देश में राजनीति शुरू हो चुकी है. और इस टकराव को इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे भारत का लोकतंत्र खतरे में हो. लेकिन आज शाम को एक ऐसी तस्वीर भी आई, जिसके बाद जजों की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठने लगे. 

ये तस्वीरें CPI के नेता डी राजा की हैं. आज डी राजा ने जस्टिस चेलमेश्वर से उनके घर पर जाकर मुलाकात की. हो सकता है कि जस्टिस चेलमेश्वर और डी राजा एक दूसरे को पहले से जानते हों.  लेकिन ऐसे वक्त में उन्होंने डी राजा जैसे राजनीतिक व्यक्ति से मुलाकात क्यों की? हालांकि डी राजा का कहना है कि वो चाहते हैं कि जजों की नाराज़गी के इस मामले पर संसद में बहस हो.

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस विवाद का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं. ममता बनर्जी ने Tweet किया है.. और कहा कि केन्द्र सरकार का न्यायपालिका में ज़रूरत से ज़्यादा हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मुद्दे को हवा दी. यानी अब नेता इस विवाद का पूरा राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं. और इसके लिए केन्द्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. लेकिन हमारे सूत्रों के मुताबिक सरकार इस पूरे विवाद से खुद को दूर रख रही है. सरकार का मानना है कि ये न्यायपालिका का आपसी विवाद है, और इससे जजों को खुद ही निपटना चाहिए. 

आज दिन में एक और दिलचस्प तस्वीर देखने को मिली. जब ये चारों जज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तो जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस गोगोई आपस में बात कर रहे थे. तभी उनके पीछे खड़ी एक महिला रिपोर्टर उनकी बातें सुनने की कोशिश करने लगी. लेकिन जस्टिस चेलमेश्वर ने उस महिला रिपोर्टर को टोंक दिया और उसे ये भी बता दिया कि वो उनकी बातें सुनने की कोशिश न करें.

देश की न्यायपालिका पर इस वक्त बहुत बोझ है. आंकड़ों के मुताबिक 2016 तक पूरे देश की अदालतों में करीब 3 करोड़ 15 लाख केस लंबित थे. इनमें से 40 लाख से ज्यादा मामले हाईकोर्ट में और करीब 2 करोड़ 75 लाख मामले निचली अदालतों में लंबित हैं. जबकि 1 नवंबर 2017 तक सुप्रीम कोर्ट में 55 हज़ार से ज्यादा मामले लंबित पड़े हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त चीफ जस्टिस को मिलाकर 25 जज हैं. जबकि उनकी संख्या 31 होनी चाहिए. इस लिहाज से सुप्रीम कोर्ट के जजों पर काम का बहुत बोझ है. अब आपको ये भी समझना चाहिए कि मुख्य न्यायाधीश और इन 4 जजों के बीच का विवाद इतना कैसे बढ़ गया ?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने के लिए हुए घूसकांड के मामले में बड़ी बेंच गठित करने के, जस्टिस चेलमेश्वर के एक आदेश को रद्द किया था. इसके पीछे जस्टिस दीपक मिश्रा का तर्क ये था कि कि सुप्रीम कोर्ट में बेंच गठित करने का अधिकार सिर्फ़ चीफ जस्टिस के पास है. जस्टिस चेलमेश्वर ने इस घूसकांड के मामले में पांच जजों की संविधान पीठ के गठन का आदेश दिया था.. लेकिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने.. जस्टिस चेलमेश्वर का आदेश रद्द कर दिया.. और कहा कि ये उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. जस्टिस दीपक मिश्रा ने इस मामले को दूसरी बेंच को भेज दिया था.

मुख्य रूप से इसी घटनाक्रम के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस चेलमेश्वर के बीच विवाद हुआ. हालांकि ये किसी ने नहीं सोचा था कि ये विवाद मीडिया की अदालत में पहुंच जाएगा. 
सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट के 4 Judges को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की क्या ज़रूरत थी ? इन Judges ने अपनी कुछ आपत्तियां.. एक चिठ्ठी में लिखी थी.. और वो चिठ्ठी मुख्य न्यायाधीश को दे दी थी. वो चाहते तो चीफ जस्टिस से एक बार और मिलने की कोशिश कर सकते थे… बातचीत की प्रक्रिया को और मौका दे सकते थे और संतुष्ट ना होने पर राष्ट्रपति को भी चिठ्ठी लिख सकते थे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. और इन जजों ने खुद ही मीडिया ट्रायल शुरू कर दिया. इस पूरे घटनाक्रम की वजह से न्यायपालिका पर आम आदमी के अटूट विश्वास को भी गहरा झटका लगा है.

बहुत बार हमारे देश में ऐसा हुआ है कि जब सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को देखकर लोगों ने ये कहा है कि शुक्र है कि सुप्रीम कोर्ट है. और इसी वजह से पूरे देश के लोगों की सुप्रीम कोर्ट में अटूट आस्था है. लेकिन आज के घटनाक्रम से लोगों के इस विश्वास को ठेस पहुंची है. देश के इतिहास में बहुत बार ऐसा हुआ है जब सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच सीधा टकराव रहा हो. पिछले 30 वर्षों में ताकत के हिसाब से सुप्रीम कोर्ट किसी भी प्रधानमंत्री या संसद से ज़्यादा असरदार था. 

और इसकी वजह ये थी कि 2014 से पहले के 30 वर्षों में देश में कोई भी पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बनी थी. इस दौरान हमेशा गठबंधन की सरकारें रहीं. और इसी वजह से हर छोटे-बड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप बना रहा. आखिरी बार 1984 में देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी. 1984 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे. और उस वक्त उन्हें लोकसभा की 404 सीटों पर जीत मिली थी. 

इसके बाद देश में गठबंधन की सरकारें रहीं.. पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बनने की वजह से प्रधानमंत्री और सरकारें कमज़ोर रही.. और सुप्रीम कोर्ट मज़बूत रहा. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला. लोकसभा में बीजेपी को 282 सीटों पर जीत मिली थी. और यही वजह है कि सरकार मज़बूत है. और इसी वजह से पिछले तीन वर्षों में हमें कई बार सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव भी देखने को मिला है 

अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका को खारिज कर दिया था. 2014 के NJAC एक्ट को असंवैधानिक बताया था.. और जजों की नियुक्ति के Collegium सिस्टम को बरकरार रखा था. यहां आपको बता दें कि Collegium का मतलब होता है सुप्रीम कोर्ट के 5 सबसे वरिष्ठ जजों का समूह.. जो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति की सिफारिश करता है.

इसके अलावा 2016 में जब केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाया था, तो उस वक्त भी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटाकर Floor Test करवाने का आदेश दिया था. जिसमें कांग्रेस जीत गई थी और हरीश रावत एक बार फिर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बन गए थे. और फिर जुलाई 2016 में भी सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को रद्द कर दिया था. ये वो मामले थे, जिनमें केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच सीधा टकराव देखने को मिला था. 

हमारे देश के सिस्टम को Contempt of Court यानी अदालत की अवमानना करने की आदत बहुत पहले से लगी हुई है. सुप्रीम कोर्ट के बहुत से फैसलों का हमारे देश के सिस्टम और लोगों ने पालन नहीं किया. दिल्ली में यमुना के किनारे अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है. लेकिन इसके बावजूद यमुना के किनारे धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा है. प्रदूषण को लेकर बार बार सुप्रीम कोर्ट आदेश जारी करता है. लेकिन इन आदेशों का भी पालन नहीं होता. यहां तक कि पिछले वर्ष दीवाली से पहले दिल्ली और NCR में पटाखे बेचने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी, लेकिन दीवाली पर पटाखे बेचे गये और जलाए भी गये.

 यानी हमारे देश का सिस्टम और यहां के लोग बार बार Contempt of Court करते रहते हैं. हमारे देश में दबी ज़ुबान में ये कहा जाता है कि Judiciary में बहुत भ्रष्टाचार है.. लेकिन कोर्ट की अवमानना के डर से कोई भी ये बात खुलकर नहीं बोलता था.. और ना ही ये बात मीडिया में सामने आती थी.. लेकिन आज Contempt of Court यानी अदालत की अवमानना जैसा शब्द खुद ही अपमानित हो गया.

सुप्रीम कोर्ट के 4 Judges जिस तरह मीडिया की अदालत में आ गये.. उससे कई सवाल उठते हैं, आज जो कुछ भी हुआ.. उसके पीछे सिर्फ ये चार जज हैं.. या फिर इन Judges के पीछे भी कोई और बड़ी ताकत है? इस पूरे मामले पर हमारी नज़र है.. आने वाले दिनों में हम आपको बताएंगे कि ये सब क्यों हुआ?

हमारे देश में दबी ज़ुबान में ये कहा जाता है कि Judiciary में बहुत भ्रष्टाचार है.. लेकिन कोर्ट की अवमानना के डर से कोई भी ये बात खुलकर नहीं बोलता था.. और ना ही ये बात मीडिया में सामने आती थी.. लेकिन आज Contempt of Court यानी अदालत की अवमानना जैसा शब्द खुद ही अपमानित हो गया. सुप्रीम कोर्ट के 4 Judges जिस तरह मीडिया की अदालत में आ गये.. उससे कई सवाल उठते हैं. आज जो कुछ भी हुआ.. उसके पीछे सिर्फ ये चार जज हैं.. या फिर इन Judges के पीछे भी कोई और बड़ी ताकत है? इस पूरे मामले पर हमारी नज़र है.. आने वाले दिनों में हम आपको बताएंगे कि ये सब क्यों हुआ?

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ZEE जानकारी: भारत का Cartosat-2 Series उपग्रह यानी ‘आसमान में भारत की आंख’

हमारी अगली ख़बर आपको खुश होने के एक या दो नहीं.. बल्कि पूरे 100 मौके देगी. क्योंकि, ISRO…अब अंतरिक्ष की दुनिया का ऐसा खिलाड़ी बन गया है, जिसका Strike Rate दुनिया में सबसे अच्छा है. ISRO ने आज एक साथ 31 Satellites की क़ामयाब Launching की है. PSLV-C40 रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में स्थापित किए गए Cartosat-2 Series के इन सभी Satellites का कुल वज़न 1 हज़ार 323 किलोग्राम है. जिसमें भारत के अलावा….Canada, Finland, France, ब्रिटेन और अमेरिका के Satellites भी शामिल हैं. इनमें भारत के Cartosat-2 Series Satellite का वजन 710 किलोग्राम है, जबकि बाकी के 30 Satellites का वजन 613 किलोग्राम है.

भारत के Cartosat-2 Series, Satellite को Eye In The Sky यानी ‘आसमान में भारत की आंख’ भी कहा जाता है. ये एक Earth Observation Satellite है, जो धरती की तस्वीरें लेता है. इस Series के Satellite में State-Of-The-Art Pan-Chromatic Camera लगा हुआ है. इसकी मदद से ली गई तस्वीरों के आधार पर ज़रुरी Data इकट्ठा किया जाता है. इसका इस्तेमाल Urban और Rural Infrastructure Development के अलावा, भौगोलिक स्थिति से जुड़ी जानकारियां हासिल करने के लिए होता है. इसका इस्तेमाल भारत की पूर्वी और पश्चिमी सीमा के इलाकों में दुश्मनों पर नज़र रखने के लिए भी किया जाता है. 

Cartosat-2 Series के Satellites से ली गई तस्वीरें कैसी होती हैं…इसे समझने के लिए हमने ISRO की Website की मदद ली. और इस वक्त आप वही तस्वीरें देख रहे हैं. पहली तस्वीर राजस्थान के किशनगढ़ रेलवे स्टेशन की हैं, जिसे 26 जून 2017 को अंतरिक्ष से लिया गया था. दूसरी तस्वीर उत्तर प्रदेश के एक इलाके की है. जिसे अगले दिन 27 जून 2017 को लिया गया था. तीसरी तस्वीर तेंलगाना के शाद नगर की हैं. चौथी तस्वीर Qatar की राजधानी Doha की है. इन सभी तस्वीरों की सबसे बड़ी ख़ासियत है, इनकी Clarity…यानी सबकुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा है.

हमने आपको Cartosat-2 Series के Satellites से ली गई इन तस्वीरों को सिर्फ इसलिए दिखाया…ताकि आप ये समझ सकें…कि इस Series के Satellites की Launching से पाकिस्तान में मातम जैसा माहौल क्यों है. पाकिस्तान, इस Launching से एक दिन पहले काफी चिंतित था.पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (11 जनवरी) को चिंता जताते हुए ये कहा था…कि भारत अगर इन Satellites को Launch करता है…तो उससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने का ख़तरा है. वहां के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ये भी कहा था…कि भारत इसका इस्तेमाल अपने नागरिकों की भलाई के अलावा, सैन्य अभियानों के लिए भी कर सकता है.

वैसे, पाकिस्तान की ये चिंता जायज़ है. क्योंकि, अब आसमान से भारत की आंख..उसकी एक-एक हरकत पर नज़र रखेगी. आतंकवादी और भारत के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोग इस Satellite की नज़र से बच नहीं पाएंगे. वैसे नोट करने वाली बात ये भी है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को launch कर रहा है जबकि भारत सैटेलाइट लॉन्च कर रहा है.

आपने अक्सर सुना होगा कि जो कक्षा में प्रवेश करेगा वही आखिरी इम्तिहान में पास होगा . भारत अंतरिक्ष की कक्षा में कई वर्ष पहले ही प्रवेश कर गया था और अब भारत अंतरिक्ष की दुनिया का Topper बनता जा रहा है. और अंतरिक्ष में भारत की अपार सफलता के पीछे ISRO के वैज्ञानिकों की काबिलियत और मेहनत का सबसे बड़ा योगदान है. Satellite Launching की सेंचुरी पूरी करने के मामले में किसी एक व्यक्ति का योगदान नहीं है. बल्कि इसमें ISRO की पूरी टीम लगी हुई थी, जिसका नेतृत्व देश के बड़े वैज्ञानिकों के मज़बूत कंधों पर था.

आपने इन वैज्ञानिकों को कभी कोई नारेबाज़ी करते हुए नहीं देखा होगा, आपने कभी इन्हें सड़कों पर कोई मांग या धरना प्रदर्शन करते हुए नहीं देखा होगा, इन्हें हड़ताल करते हुए नहीं देखा होगा.. इन्हें मीडिया में इंटरव्यू देते हुए नहीं देखा होगा…. इन्हें देश के बारे में नकारात्मक बाते करते हुए नहीं देखा होगा.. और आपने कभी इन वैज्ञानिकों को देश के लिए आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए भी नहीं सुना होगा.. और शायद यही कारण है कि आजकल के मीडिया के हिसाब से ये हेडलाइन्स में आने के लिए Qualify नहीं करते. क्योंकि ये वैज्ञानिक विवादों से दूर रहते हैं और चुपचाप अपना काम करते हैं. ये वैज्ञानिक चाहते तो पैसा कमा सकते थे.. किसी दूसरे देश में जाकर बस सकते थे लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया. ये लोग पढ़े लिखे हैं.. देश के लिए काम कर रहे हैं.. और इनका काम किसी तरह की पब्लिसिटी का मोहताज नहीं है. और हमें लगता है कि भारत का असली Brand Ambassador इन्हें ही होना चाहिए. आज का दिन ISRO के हर वैज्ञानिक और उसके परिवार को सलाम करने का है. क्योंकि इन लोगों ने दुनिया के मंच पर अपने देश भारत की शान बढ़ाई है…

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